Delhi Crime: दिल्ली में हत्या के एक पुराने मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. करीब 26 साल से फरार चल रहे 62 वर्षीय आरोपी विश्वनाथ सिंह उर्फ मुन्ना को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पर अपने पड़ोसी जय प्रकाश की हत्या करने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, उसे शक था कि जय प्रकाश का उसकी पत्नी के साथ अवैध संबंध है. इसी शक में उसने कथित तौर पर हथौड़े से वार कर पड़ोसी की जान ले ली और वारदात को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की. गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने कई शहरों में ठिकाने बदले और अपनी पहचान छिपाकर जिंदगी बिताता रहा.
पहले सड़क हादसा माना गया था मामला
पुलिस के मुताबिक, यह घटना 20 अक्टूबर 1998 की है. उस दिन 24 वर्षीय जय प्रकाश दिल्ली के गोकलपुरी इलाके में गंभीर रूप से घायल और बेहोशी की हालत में मिला था. उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन होश में आए बिना ही उसकी मौत हो गई. शुरुआती जांच में मामला सड़क दुर्घटना का लगा. इसी आधार पर गोकलपुरी थाने में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया था.
पत्नी से संबंध का शक, हथौड़े से किया हमला
बाद में पुलिस की जांच में सामने आया कि जय प्रकाश की मौत सड़क हादसे में नहीं हुई थी, बल्कि यह कथित तौर पर सुनियोजित हत्या थी. जांच के अनुसार, आरोपी विश्वनाथ सिंह मृतक का पड़ोसी था. उसे शक था कि जय प्रकाश का उसकी पत्नी के साथ अवैध संबंध है. इसी रंजिश में उसने कथित तौर पर जय प्रकाश के सिर पर हथौड़े से वार किया. इसके बाद वारदात को हिट एंड रन यानी सड़क दुर्घटना दिखाने के लिए घटनास्थल को उसी तरह तैयार किया गया, ताकि पुलिस को शुरुआत में हत्या का शक न हो.
पत्नी से अवैध संबंध का शक
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हत्या के एक पुराने मामले में 62 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान विश्वनाथ सिंह उर्फ मुन्ना के रूप में हुई है. वह साल 2000 में दर्ज हत्या के मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था. पुलिस ने उसे 30 अक्टूबर को उत्तर पूर्वी दिल्ली के शिव विहार इलाके से गिरफ्तार किया. आरोप है कि उसने पत्नी के साथ पड़ोसी के अवैध संबंध होने के शक में उसकी हत्या कर दी थी. इतना ही नहीं, वारदात को सड़क हादसा दिखाने के लिए घटनास्थल को भी उसी हिसाब से तैयार किया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने और पहचान बदलता रहा.
पहले सड़क हादसा समझकर दर्ज किया गया था मामला
पुलिस के मुताबिक, यह मामला 20 अक्टूबर 1998 का है. उस दिन 24 वर्षीय जय प्रकाश उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोकलपुरी इलाके में गंभीर रूप से घायल और बेहोशी की हालत में मिले थे. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्हें होश नहीं आया और उनकी मौत हो गई. शुरुआत में पुलिस ने इस घटना को सड़क दुर्घटना माना था. इसके बाद गोकलपुरी थाने में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया. हालांकि, बाद की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पुलिस को मामला दुर्घटना के बजाय हत्या का होने का संदेह हुआ.
पत्नी से संबंध का शक, हथौड़े से सिर पर किया था वार
जांच में सामने आया कि विश्वनाथ सिंह मृतक जय प्रकाश का पड़ोसी था. पुलिस के मुताबिक, आरोपी को शक था कि जय प्रकाश का उसकी पत्नी के साथ अवैध संबंध है. इसी शक और रंजिश में उसने कथित तौर पर जय प्रकाश के सिर पर हथौड़े से वार किया था. हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिनकी वजह से उनकी मौत हो गई. पुलिस का आरोप है कि हत्या के बाद आरोपी ने घटनास्थल को इस तरह तैयार किया, जिससे मामला किसी वाहन की टक्कर से हुए हादसे जैसा लगे. जांच में हत्या के तथ्य सामने आने के बाद पहले दर्ज मामला रद्द कर दिया गया और साल 2000 में खजूरी खास थाने में हत्या का नया मामला दर्ज किया गया.पुलिस के मुताबिक, विश्वनाथ सिंह को 5 दिसंबर 2001 को घोषित अपराधी घोषित किया गया था. इसके बाद से ही वह गिरफ्तारी से बचता रहा.
भाइयों से मिलने आया तो पुलिस ने पहचान लिया
आरोपी को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने पहले उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में उसके पैतृक गांव का पता लगाया. इसके बाद दिल्ली में रह रहे उसके परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई गई. निगरानी के दौरान पुलिस ने एक व्यक्ति को आरोपी के भाइयों से चोरी छिपे मिलते हुए देखा. टीम ने गुप्त तरीके से उसकी पहचान का सत्यापन किया तो पता चला कि वह विश्वनाथ सिंह है. इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर 30 अक्टूबर को उसे उत्तर पूर्वी दिल्ली के शिव विहार इलाके से गिरफ्तार कर लिया. इस गिरफ्तारी के साथ ही करीब तीन दशक पुराने हत्या के मामले में लंबे समय से फरार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गया.