Most Dangerous Criminal: वैसे तो आपने भारत के कई ऐसे सीरियल किलर के नाम सुने होंगे जिन्होंने काफी खौफनाक और डरा देने वाले कांड किए हैं. लेकिन आज में आपको एक ऐसे सीरियल किलर के बारे में बताने वाली हूँ जिसने सिर्फ हत्याएं नही कीं बल्कि उनकी लाशों के साथ घिनौना काम तक किया.
raman raghav serial killer story
Serial Killer Raman Raghav Full Story: वैसे तो आपने भारत के कई ऐसे सीरियल किलर के नाम सुने होंगे जिन्होंने काफी खौफनाक और डरा देने वाले कांड किए हैं. लेकिन आज में आपको एक ऐसे सीरियल किलर के बारे में बताने वाली हूँ जिसने सिर्फ हत्याएं नही कीं बल्कि उनकी लाशों के साथ घिनौना काम तक किया. ये एक ऐसा कुख्यात अपराधी था जिसके नाम से मुंबई में दहशत रहती थी. जिसकी हम बात कर रहे हैं उसका नाम रमन राघव है. दरअसल, वो न तो कोई गैंगस्टर था और न ही कोई माफिया डॉन; फिर भी, उसका खौफ ऐसा था कि रात के समय मुंबई की सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था. 1960 के दशक में, इस सीरियल किलर ने न केवल हत्याएं कीं, बल्कि लाशों के साथ घिनौना काम किया. ये चैन से तभी सोता था जब ये लाशों के साथ घिनौना काम कर ले.
दरअसल, रमन राघव एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था और अपने बचपन से ही उसे दिमागी बिमारी थी. गरीबी के चलते उसने छोटी-मोटी चोरियों से शुरुआत की, लेकिन धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ती गई और वो हैवान बनने लगा. धीरे-धीरे, उसने बेघर लोगों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया. अंधेरे की आड़ में, वो फुटपाथों पर सो रहे लोगों पर हमला करता था, उनके सिर पर लोहे की रॉड से वार करके उन्हें मौके पर ही मार डालता था.
हद तो तब पार होती थी जब रमन हत्या के बाद लाशों के साथ घिनौना काम करता था. ये एक ऐसा भयानक कृत्य था जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और यहाँ तक कि उसकी अपनी सगी बहन भी शामिल थी. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसने अपनी बहन को गंभीर रूप से घायल करने के बाद उसके साथ रेप किया था.
बता दें कि 1965 की एक रात, रमन ने फुटपाथों पर सो रहे 19 लोगों पर हमला किया; उनमें से नौ की मौत हो गई और दस घायल हो गए. घायल पीड़ितों में से कुछ ने अपने हमलावर का हुलिया बताया, जिससे पुलिस को पहली बार कोई ठोस सुराग मिला. लेकिन, उस दौर में तकनीकी संसाधनों की कमी की वजह से वो बार-बार पुलिस की पकड़ से बच निकलता था.
आखिरकार 1968 में रमन राघव को दबोच लिया गया, तो उसने पुलिस के सामने एक अजीब शर्त रखी, उसने कहा कि “पहले मुझे अंडे, मटन, दूध और केले दो; उसके बाद ही मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगा. जिसके बाद पुलिस ने उसकी मांगें मान लीं. अपना खाना खत्म करने के बाद, उसने अपनी डायरी पुलिस को सौंप दी. उसके अंदर, हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ये शब्द लिखे थे. “खल्लास” (खत्म).”सब खत्म हो गया. इसके बाद, उसने एक मजिस्ट्रेट के सामने 24 हत्याओं का इक़बाल किया.
कुख्यात राक्षस रमन को शुरू में मौत की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन उसके वकीलों ने सफलतापूर्वक यह दलील दी कि वो मानसिक रूप से बीमार था जिसके बाद, उसकी सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया. 1995 में, किडनी फेल होने की वजह से पुणे की यरवदा जेल में उसकी मौत हो गई.
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