Umesh Reddy Serial killer Story: एक कांस्टेबल, जिसका पेशा लोगों की रक्षा करना था वह देखते ही देखते अचानक एक वहशी दरिंदे में तबदील हो गया. देशभर में में महिलाओं का बलात्कारी, लुटेरा और हत्यारा होने के बाद भी वह लगातार गिरफ्तारी से बचने के लिए तैयार रहा. हम बात कर रहें है उमेश रेड्डी की.
उमेश रेड्डी एक पढ़ा-लिखा अफसर, जिसे सुरक्षा करने की ट्रेनिंग मिली थी, वह सबके सामने छिपा हुआ एक शिकारी बन गया. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि एक कांस्टेबल होने के बाद वह सीरियल किलर कैसे बन गया, जिसने रात के समय युवतियों को निशाना बनाया और कई बार गिरफ़्तारी से बचने में कामयाब रहा, आखिरकार वह कैसे पकड़ा गया?
20 से ज्यादा महिलाओं के साथ किया बलात्कार
उमेश रेड्डी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में 20 से ज़्यादा महिलाओं का बलात्कार करने, उन्हें लूटने और उनकी हत्या करने का आरोप है. जहां उसके ज़्यादातर पीड़ित कर्नाटक के थे, वहीं रेड्डी ने महाराष्ट्र, गुजरात और कश्मीर में भी अपराध किए. उसे पहली बार 1997 में बलात्कार और हत्या के आरोपों में गिरफ़्तार किया गया था. न्यायिक हिरासत में रहते हुए, रेड्डी बेल्लारी हिंडलगा जेल से भागने में कामयाब हो गया.
कैसे करता था उमेश रेड्डी शिकार?
उमेश रेड्डी पूरे देश में घूमता रहता था. वह कभी भी एक जगह पर एक साल से ज़्यादा नहीं रुकता था. वह उन औरतों को निशाना बनाता था जो घर पर अकेली होती थीं. रेड्डी रात में घरों में घुसकर रेप, लूट और हत्या करता था. जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वह एक साइकोपैथ था जिसे औरतों को मारने में मज़ा आता था.
नवंबर 1996 में, रेड्डी ने चित्रदुर्ग की KEB कॉलोनी में एक औरत का रेप किया और उसकी हत्या कर दी. उसी साल, उसने एक जवान औरत का रेप करने की कोशिश की. उसे जुलाई 1997 में गिरफ़्तार किया गया, लेकिन वह 24 घंटे के अंदर ही भाग निकला. इसके बाद, उसे दोबारा गिरफ़्तार करके बेल्लारी जेल भेज दिया गया, जहां से वह मार्च 1997 में भाग निकला. उसे एक बार फिर गिरफ़्तार किया गया, लेकिन 1998 में वह तीसरी बार पुलिस हिरासत से भाग निकला. उसने हुबली, दावणगेरे और पुणे में तीन जवान औरतों का रेप किया.
उसने कश्मीर में एक CRPF अधिकारी की बेटी का रेप किया और बाद में उसकी हत्या कर दी. 2002 में, पीन्या पुलिस के इलाके में उसके ख़िलाफ़ रेप और हत्या का एक मामला दर्ज किया गया, और उसे एक सैलून से गिरफ़्तार कर लिया गया. हालांकि, इस बार वह भागने में कामयाब नहीं हो पाया.
जेल से भागने का माहिर
खास बात यह है कि पुलिस 1998 तक उसका पता नहीं लगा पाई, जब चित्रदुर्ग में एक विधवा के बलात्कार और हत्या का मामला सामने आया. हालांकि, इस गिरफ़्तारी के बाद भी, वह एक बार फिर पुलिस हिरासत से भाग निकला. जेल तोड़ने के माहिर के तौर पर पहचाने जाने वाले रेड्डी ने तीन अलग-अलग मौकों पर जेल से फ़रार होने में कामयाबी हासिल की. बेल्लारी हिंडलगा जेल कर्नाटक की सबसे बड़ी जेल है और इसे देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है. राज्य के लगभग सभी सबसे कुख्यात अपराधी इसी जेल की चारदीवारी के भीतर बंद हैं. ऐतिहासिक रूप से रेड्डी को छोड़कर इस जेल से किसी अन्य कैदी के भागने का कोई रिकॉर्ड नहीं है.
बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में बंद है उमेश रेड्डी
उमेश रेड्डी, जो एक सीरियल रेपिस्ट और हत्यारा है, इस समय बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में बंद है. वह इसी जेल में 30 साल की सज़ा काट रहा है यह वह सज़ा है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में मौत की सज़ा से बदलकर तय किया था. यह जेल हाल ही में एक बार फिर सुर्खियों में आई, जब कुछ वीडियो सामने आए जिनमें उमेश रेड्डी जेल के अंदर मोबाइल फ़ोन और टेलीविज़न का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहा था.