Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
Akshay Tritiya 2026: अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह हैं, इस साल यह त्योहार 19 अप्रैल को मनाया जाएगा.आइए जानते हैं कि आखिर अक्षय तृतीया की शुरूवात कब से और क्यों हुई.
आखिर क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया?
Akshay Tritiya 2026: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र और शुभ तिथियों में गिनी जाती है. साल 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति को कई गुना फल प्राप्त होता है. यही कारण है कि लोग इस दिन को बेहद खास मानते हैं. लेकिन आखिर ऐसा क्या है जो अक्षय तृतीया को इतना शुभ बनाता है? आइए इसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से समझते हैं.
अक्षय तृतीया के दिन आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है. पूजा, ध्यान, जप और योग करने से सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है और मानसिक शांति मिलती है. साथ ही, इस दिन किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक मानी जाती है. यही कारण है कि अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ भी कहा जाता है, यानी ऐसा दिन जब बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं.
इस तिथि को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं.
मां गंगा का पृथ्वी पर आगमन
मान्यता है कि इसी पावन दिन मां गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था. उनके आगमन से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ, जिससे यह दिन और भी पुण्यदायी माना जाता है.
भगवान परशुराम का जन्म
हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म भी अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था. इसलिए इस दिन को उनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है.
महाभारत की रचना का आरंभ
ऐसी मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश के साथ मिलकर महाभारत की रचना शुरू की थी. यह घटना इस तिथि के महत्व को और बढ़ा देती है.
त्रेता युग की शुरुआत
पौराणिक कथाओं के अनुसार अक्षय तृतीया से ही त्रेता युग का आरंभ हुआ था. इसी कारण इसे ‘युगादि तिथि’ भी कहा जाता है.
कृष्ण और सुदामा का मिलन
कहा जाता है कि इसी दिन सुदामा अपने प्रिय मित्र भगवान कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे थे. यह प्रसंग सच्ची मित्रता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है.
ज्योतिष के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत शुभ संयोग लेकर आता है. इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं, जो एक दुर्लभ स्थिति मानी जाती है. सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है और चंद्रमा मन का, इसलिए इन दोनों का मजबूत होना जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक संतुलन का संकेत देता है. यही वजह है कि इस दिन नई शुरुआत, निवेश या खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है.
Assembly Election Result: पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक! अब जनता बेसब्री से इंतजार कर…
Bhopal Robbery Case: भोपाल में एक IAS अकादमी की डायरेक्टर शुभ्रा रंजन से ₹1.89 करोड़…
Singrauli News: सिंगरौली जिले के नवानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत सीएचपी निगाही में एक आदिवासी बैगा…
Aurangabad news: सरकार भले ही हर घर तक नल का जल पहुंचाने का दावा कर…
Raebareli news: उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे…
Katni News: कटनी जिले के रीठी में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पोस्ट ऑफिस…