shamshan se lautate samay peeche kyon nahin dekhte: हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार को जीवन की अंतिम यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है. मृत्यु के बाद जब पार्थिव शरीर को अग्नि को समर्पित किया जाता है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार शरीर पंचतत्वों में विलीन हो जाता है. अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद जब परिजन श्मशान से घर लौटते हैं, तो उन्हें एक खास बात का ध्यान रखने के लिए कहा जाता हैपी-छे मुड़कर नहीं देखना चाहिए और सीधे घर की ओर जाना चाहिए. आखिर इस परंपरा के पीछे क्या मान्यता है और इसे आत्मा की यात्रा से क्यों जोड़ा जाता है?
गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की स्थिति का वर्णन
गरुड़ पुराण को हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में शामिल माना जाता है. इसमें धर्म, नीति, सदाचार, यज्ञ, जप और वैराग्य के साथ मृत्यु तथा मृत्यु के बाद की स्थिति से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखने की परंपरा भी आत्मा और उसके सांसारिक मोह से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि शरीर नष्ट होने के बाद आत्मा का अंत नहीं होता. मृत्यु के बाद आत्मा सूक्ष्म शरीर धारण करती है और अपने कर्मों के अनुसार आगे की यात्रा करती है. समय आने पर वह दूसरा शरीर धारण करती है. इसी वजह से मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा को शरीर और सांसारिक जीवन से अलग होने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जाता है.
शरीर जलने के बाद आत्मा को आगे बढ़ना चाहिए
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अंतिम संस्कार के दौरान आत्मा अपने शरीर को अग्नि में विलीन होते हुए देखती है. जब शरीर पूरी तरह अग्नि को समर्पित हो जाता है, तो इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि अब आत्मा का उस शरीर से संबंध समाप्त हो चुका है. इसके बाद आत्मा को अपनी आगे की यात्रा पर बढ़ना होता है. मान्यता के अनुसार, अगर आत्मा का ध्यान पुराने शरीर और सांसारिक जीवन की ओर बना रहे, तो उसका मोह पूरी तरह खत्म नहीं हो पाता. इसलिए अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखने की परंपरा को आत्मा को संसार से संबंध छोड़कर आगे बढ़ने का प्रतीक माना जाता है.
परिजनों का मोह भी माना जाता है एक वजह
मृत्यु के बाद अपने प्रियजनों से लगाव तुरंत समाप्त हो जाए, ऐसा धार्मिक मान्यताओं में नहीं माना जाता. कहा जाता है कि जीवात्मा का अपने परिवार और प्रियजनों के प्रति मोह बना रह सकता है. यही वजह है कि अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखने को भी इसी लगाव से जोड़कर देखा जाता है. इस परंपरा के पीछे भाव यह है कि जब परिजन श्मशान से लौटते हैं और पीछे मुड़कर नहीं देखते, तो वे प्रतीकात्मक रूप से आत्मा को यह संदेश देते हैं कि अब उसका इस संसार से संबंध पूरा हो चुका है. उसे सांसारिक मोह छोड़कर अपने अगले सफर की ओर बढ़ना चाहिए.
क्या पीछे देखने से आत्मा घर तक आ सकती है?
इससे जुड़ी एक अन्य धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है. कहा जाता है कि शरीर छोड़ने के बाद आत्मा कुछ समय तक अपने परिजनों और घर के प्रति मोह रख सकती है. इसी आधार पर ऐसी मान्यता बताई जाती है कि आत्मा अपने प्रियजनों के पीछे घर तक आने का प्रयास कर सकती है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति श्मशान से लौटते समय पीछे मुड़कर देखता है, तो इसे आत्मा के प्रति अपने लगाव को बनाए रखने के संकेत के रूप में देखा जाता है. इसलिए पीछे न देखने की परंपरा को आत्मा और परिजनों, दोनों के मोह को समाप्त करने से जोड़कर समझाया जाता है.
श्मशान से लौटने के बाद सीधे घर जाने की परंपरा
अंतिम संस्कार के बाद सीधे घर लौटने की परंपरा भी कई धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है. इसका एक भाव यह माना जाता है कि अंतिम संस्कार के साथ मृत व्यक्ति के सांसारिक शरीर से जुड़े सभी कर्म पूरे हो गए और अब परिजनों को भी जीवन की ओर लौटना चाहिए. कई जगह बच्चों को श्मशान न ले जाने की परंपरा भी देखने को मिलती है. इसे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ बच्चों की मानसिक स्थिति और मृत्यु के दृश्य के उनके मन पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़कर समझाया जाता है.
धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक तथ्य नहीं
श्मशान से लौटते समय पीछे न देखने के पीछे बताई जाने वाली आत्मा, मोह और उसके घर तक आने जैसी बातें धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं. इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए. यह परंपरा मुख्य रूप से धार्मिक विश्वासों और मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा से जुड़ी मान्यताओं के आधार पर चली आ रही है. इस परंपरा का मूल भाव यही माना जाता है कि अंतिम संस्कार के बाद आत्मा को सांसारिक मोह से मुक्त होकर आगे की यात्रा करनी चाहिए और परिजनों को भी मृत व्यक्ति की स्मृतियों के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए.