Jaya Ekadashi 2026 Date: हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व है. अभी माघ माह चल रहा है. इस महीने जया एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, जया एकादशी का व्रत माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. आइए जानते हैं जया तिथि की तारीख और शुभ योग क्या हैं?
जानिए, जया एकादशी कब और किस एकादशी तिथि में होगी पूजा.
Jaya Ekadashi 2026 Date: हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व है. हर महीने में दो एकादशी होती हैं, जो शुक्ल पक्ष की और कृष्ण पक्ष की एकादशी कहलाती है. इस तरह साल में कुल 24 एकादशी होती है. हालांकि, जब भी मलमास लगता है तो दो एकादशी और बढ़ जाती हैं जिसे- पुरुषोत्तम मास की एकादशी कहते हैं. अगर इन दोनों एकादशी को मिलाकर देखा जाए तो इनकी संख्या 26 हो जाती है. अभी माघ माह चल रहा है. इस महीने जया एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, जया एकादशी का व्रत माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. एकादशी की उदयातिथि तिथि में संकल्प करके व्रत और विष्णु पूजन किया जाता है. पौराणिक मान्यता है कि, इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. अब सवाल है कि आखिर जया तिथि की तारीख और शुभ योग क्या हैं? जया तिथि का महत्व क्या है? किस मुहूर्त में पूजा करें? इस बारे में India News को बता रहे हैं गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-
पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ 28 जनवरी दिन बुधवार को शाम 4 बजकर 35 मिनट से हो रहा है. यह तिथि 29 जनवरी दिन गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी गुरुवार को है. इस बार की जया एकादशी पर रवि योग, इंद्र योग और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है. जया एकादशी का दिन पितरों के लिए विशेष होता है. इस दिन आप अपने पितरों की मुक्ति के उपाय कर सकते हैं.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जो लोग जया एकादशी का व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं, उन लोगों की आत्माओं को मृत्यु के बाद भूत, पिशाच योनि में नहीं जाना पड़ता है. श्रहरि की कृपा से वे भूत और पिशाच की योनि से मुक्ति पा जाते हैं. ऐसे ही जया एकादशी का व्रत और पूजा का पुण्य अपने पितरों को दान कर देते हैं, जो जो पितर भूत या पिशाच योनि में भटक रहे होते हैं, उनको मुक्ति मिल जाती है.
जया एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 05:25 ए एम से 06:18 ए एम तक है, वहीं उस दिन का अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:13 बजे से लेकर 12:56 बजे तक है. जया एकादशी व्रत की पूजा आप शुभ-उत्तम मुहर्त 07:11 ए एम से 08:32 ए एम के बीच कर सकते हैं.
इस बार जया एकादशी पर रवि योग बन रहा है. रवि योग सुबह में 07:11 ए एम से 07:31 ए एम तक है. इस दिन रवि योग केवल 20 मिनट के लिए ही बन रहा है. एकादशी के दिन इन्द्र योग प्रात:काल से लेकर रात में 08 बजकर 27 मिनट तक है, उसके बाद से वैधृति योग है. जया एकादशी पर रोहिणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 07:31 ए एम तक है, उसके बाद से मृगशिरा नक्षत्र हैं, जो अगले दिन 30 जनवरी को 05:29 ए एम तक है.
जया एकादशी का व्रत रखने वाले लोग पारण 30 जनवरी शुक्रवार को करेंगे. जया एकादशी पारण का समय सुबह में 7 बजकर 10 मिनट से सुबह 9 बजकर 20 मिनट तक है. इस दिन द्वादशी तिथि का समापन दिन में 11 बजकर 09 मिनट पर होगा.
जया एकादशी के दिन भद्रा भी लगेगी. भद्रा सुबह में 07 बजकर 11 मिनट पर लगेगी और यह दोपहर में 01 बजकर 55 मिनट तक रहेगी. इस भद्रा का वास स्थान स्वर्ग लोक में है. स्वर्ग की भद्रा का कोई दुष्प्रभाव धरती पर नहीं होता है.
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