Mahashivratri 2026 Shiva Puja: इसबार महाशिवरात्रि का पर्व 15 अगस्त 2026 दिन रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन सुबह से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए भक्तों की भीड़ जुट जाती है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि दिन में ही नहीं, रात्रि में भी शिवजी की पूजा विधान है. ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि, महाशिवरात्रि पर रात्रि पूजन का महत्व बहुत अधिक है. आइए जानते हैं कि, रात्रि में शिवजी की पूजा का महत्व क्या है? इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
महाशिवरात्रि पर रात्रि पूजन महत्व, विधि और व्रत पारण का समय. (Canva)
Mahashivratri 2026 Shiva Puja: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना गया है. वहीं, कुछ विद्वानों का कहना है कि इस दिन ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ था इसलिए भी महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा की जाती है. बता दें कि, यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इसबार महाशिवरात्रि का पर्व 15 अगस्त 2026 दिन रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन सुबह से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए भक्तों की भीड़ जुट जाती है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि दिन में ही नहीं, रात्रि में भी शिवजी की पूजा विधान है. ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि, महाशिवरात्रि पर रात्रि पूजन का महत्व बहुत अधिक है. माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. वजह कोई भी हो लेकिन महाशिवरात्रि पर रात के समय पूजन करना बेहद शुभ होता है. अब सवाल है कि आखिर महाशिवरात्रि पर कहां करनी चाहिए पूजा? रात्रि में शिवजी की पूजा का महत्व क्या है? अगर महाशिवरात्रि पर व्रत रखा है कब करें पारण? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर हो रही है. इस तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा.
इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मान्य होगी. लेकिन, व्रत करने वालों को सलाह है कि वे 15 फरवरी को रात्रि पूजन जरूर करें. इसके बाद व्रत का पारण करें.
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06:39 से 09:45
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – सुबह 12:52 से 03:59
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – सुबह 03:59 से 07:06
घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर रात्रि पूजन के लिए भगवान शिव का चित्र या शिवलिंग स्थापित आपको करना चाहिए. इसके बाद पूजा के लिए लकड़ी चौकी आपको बिछानी चाहिए. इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल से आपको अभिषेक करना चाहिए. अभिषेक करते समय आप दूध, दही, शहद, घी, चीनी भी शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं. इसके साथ ही भगवान शिव के प्रिय बेलपत्र, भांग-धतूरा, आक के फूल आदि भी आप अर्पित कर सकते हैं. तत्पश्चात धूप-दीप जलाकर आपको भगवान शिव के मंत्रों का जप, शिव चालीसा आदि का पाठ करना चाहिए. महाशिवरात्रि की रात में जागरण करते हुए आपको “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करना चाहिए. इसके साथ ही भजन कीर्तन भी आप कर सकते हैं.
शिवरात्रि की रात में जागरण करते हुए रात के अंतिम प्रहर (3 से 6 बजे के बीच) की पूजा भी आपको अवश्य करनी चाहिए. इस दौरान अंतिम बार गंगाजल, फूल, प्रसाद आदिर शिवलिंग पर आप अर्पित कर सकते हैं. वहीं अंतिम प्रहर की पूजा में शिव जी की आरती का पाठ भी अवश्य करें.
रात्रि की अंतिम प्रहर की पूजा के बाद सुबह के समय आप शिवरात्रि के व्रत का पारण कर सकते हैं. इसके बाद लोगों में प्रसाद वितरित करके आपको खुद भी इसका सेवन करना चाहिए. साथ ही शिवरात्रि व्रत के पारण के बाद आप भोजन भी कर दान भी कर सकते हैं.
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाशिवरात्रि पर रात के समय जागरण करने से व्यक्ति को शिव कृपा प्राप्त होती है. वहीं भक्तों को ज्ञान और विवेक भी रात्रि जागरण से मिलता है. आदियोगी शिव की रात्रि साधना करने से आध्यात्मिक उन्नति भी भक्त पाते हैं और अंत समय में उन्हें सद्गति भी प्राप्त होती है. रात्रि के समय जागरण करने का महत्व इसलिए भी है कि, रात में एकांत अधिक होता है जिससे साधना करने में आसानी होती है.
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