Ramayan Interesting Facts: ये तो सभी लोग जानते होंगे कि, हनुमान जी अधिक शक्तिशाली थे. हनुमान जी ने श्रीलंका कैसे उपद्रव मचाया था. बहुत कम लोग जानते होंगे कि, एक बार हनुमानजी खुद अपनी शक्तियों को भूल गए थे. ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ था, क्योंकि शक्तिशाली हनुमानजी बहुत शरारती थे. उनकी इस आदत से परेशान होकर उन्हें शक्ति भूलने का श्राप मिला था. तो चलिए पढ़ते हैं इसके पीछे की रोचक कथा-
जानिए, श्राप से हनुमान जी अपनी शक्तियां भूल गए थे?
Ramayan Interesting Facts: रामायण तमाम रोचक और रहस्यमयी कथाओं से भरी पड़ी है. इसमें जहां मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श जीवन, त्याग और धर्म की बातें मिलती हैं, वहीं कई ऐसी घटनाएं भी हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं. कुछ कथाएं जैसे हनुमान जी का समुद्र लांघना, रामसेतु का निर्माण और रावण वध के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं. लेकिन, कई कम चर्चित प्रसंग भी हैं, जो सुनने वालों को चौंका देते हैं. यह तो सभी लोग जानते होंगे कि, हनुमान जी अधिक शक्तिशाली थे. हनुमान जी ने श्रीलंका कैसे उपद्रव मचाया था. बहुत कम लोग जानते होंगे कि, एक बार हनुमानजी खुद अपनी शक्तियों को भूल गए थे. ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ था, क्योंकि शक्तिशाली हनुमानजी बहुत शरारती थे. उनकी इस आदत से परेशान होकर उन्हें शक्ति भूलने का श्राप मिला था. तो चलिए पढ़ते हैं इसके पीछे की रोचक कथा-
भगवान राम के परम भक्त बजरंगबली हनुमान को कई देवी और देवताओं से शक्ति प्राप्त थीं. हनुमान जी को सभी देवताओं ने वरदान के रूप में शक्तियां और अस्त्र प्रदान किया थे. हनुमान जी का अस्त्र गदा था. यह गदा हनुमान जी को भगवान कुबेर से प्राप्त हुआ था. यह गदा अधिक शक्तिशाली था. हनुमान जी के गदे में कई प्रकार की शक्तियां विद्यमान थीं.
हनुमान जी बचपन से शरारती थे. वह बचपन में अत्यधिक शरारत करते थे. हनुमान जी का रूप वानर रूप था. दूसरा उन्हें देवताओं की शक्तियां प्राप्त थीं. तीसरा बचपन, जिसके कारण हनुमान जी शरारत करते थे. वह किसी के भी बगीचे में घुस जाते थे. फल खा कर बगीचे को तहस नहस कर देते थे. कभी कभी किसी की भी गोद में बैठ जाते थे. उन्हें कोई पकड़ नहीं पाता था.
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी बचपन में अत्यंत चंचल और अपार शक्तियों से भरपूर थे. अपनी बाल लीलाओं में वे अक्सर ऋषि-मुनियों के आश्रमों में पहुंचकर शरारतें किया करते थे. कभी साधना में बाधा डालना, तो कभी उनकी वस्तुएं इधर-उधर करना उनकी आदत बन गई थी. हनुमान जी इतने शरारती थे. वह ऋषि मुनि के आश्रम में घुस कर उनकी लंगोट को फाड़ देते थे. कभी उनके कमंडल का पानी गिरा देते और उनकी तपस्या को भंग कर देते थे.
एक बार अंगिरा और भृंग वंश के ऋषि तप कर रहे थे. हनुमान जी ने उनकी तपस्या भंग कर दी. इन शरारतों से परेशान होकर ऋषियों ने उन्हें श्राप दिया कि वे अपनी दिव्य शक्तियों को भूल जाएंगे. हालांकि, यह श्राप दंड से अधिक सीख देने वाला था. ऋषियों ने कहा कि जब भी कोई उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराएगा, तब वे अपनी ताकत फिर से पहचान लेंगे. यही कारण है कि हनुमान जी को अपने बल का ज्ञान तब हुआ, जब लंका जाने से पहले जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों की याद दिलाई. इसके बाद ही उन्होंने समुद्र लांघकर सीता माता की खोज की.
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