Sleeping Vastu Tips: शादीशुदा जीवन से जुड़े नियमों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की बातें चलती रहती हैं. ऐसा ही एक सवाल बहुत सी माताओं और बहनों का हो सकता है कि, आखिर पत्नी को सोते समय पति के दाएं तरफ सोना चाहिए या बाएं तरफ. बेशक आपको यह सवाल साधारण लगे, लेकिन शास्त्रों में इसके लिए नियम बताए गए हैं. आइए जानते हैं इससे जुड़े नियमों के बारे में-
जानिए, पत्नी को पति के किस तरफ सोना चाहिए. (Canva)
Sleeping Vastu Tips: सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व होता है. इनकी छोटी से छोटी अनदेखी से जीवन में बड़ा दर्द दे सकती है. ऐसे ही कुछ नियम शादीशुदा लोगों के लिए बताए गए हैं. दरअसल, शादीशुदा जीवन से जुड़े नियमों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की बातें चलती रहती हैं. ऐसा ही एक सवाल बहुत सी माताओं और बहनों का हो सकता है कि, आखिर पत्नी को सोते समय पति के दाएं तरफ सोना चाहिए या बाएं तरफ. बेशक आपको यह सवाल साधारण लगे, लेकिन शास्त्रों में इसके लिए नियम बताए गए हैं. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो, शादी, पूजा-पाठ, भोजन, अभिषेक और रोजमर्रा के जीवन में स्त्री और पुरुष की स्थिति को लेकर हमारे शास्त्रों में अलग-अलग नियम बनाए गए हैं. इन नियमों का उद्देश्य जीवन में संतुलन और मर्यादा बनाए रखना. अब सवाल है कि आखिर सोते समय पत्नी को पति के किस साइड में सोना चाहिए? पत्नी के सही साइड में सोने से क्या लाभ होते हैं? इस बारे में जानने के लिए India News ने गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी से बात की.
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि, शास्त्रों के अनुसार विवाह संस्कार के समय पत्नी को हमेशा पति के बाएं तरफ बैठाया जाता है. मांग भरने की विधि भी पति के बाएं पक्ष से ही होती है. इसका मतलब साफ है कि विवाह के समय से ही स्त्री का स्थान बाएं पक्ष में माना गया है. इसी नियम को सोने के समय भी लागू बताया गया है. बताा दें कि, जब पति-पत्नी सोते हैं, तब पत्नी को हमेशा पति के बाएं तरफ ही सोना चाहिए. ऐसा करने से आपसी प्रेम बढ़ता है, जीवन में मनमुटाव नहीं होता और दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है.
शास्त्रों के मुताबिक, कुछ खास कामों में पत्नी को पति के दाएं तरफ रहना चाहिए. सभी मांगलिक कार्यों में, जैसे यज्ञ, हवन, मूर्ति स्थापना, पूजा-पाठ और दूसरे शुभ कार्यों में पत्नी का स्थान पति के दाएं तरफ माना गया है. यानि रोजमर्रा के जीवन और सोने-भोजन जैसे कामों में बाएं तरफ का नियम है, जबकि धार्मिक और मांगलिक कार्यों में दाएं तरफ रहने की परंपरा बताई गई है.
शास्त्रों में स्त्री को वामांगी कहा गया है. इसके पीछे भी एक शास्त्रीय मान्यता बताई गई है. कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तब दाहिने भाग से पुरुष की उत्पत्ति हुई और बाएं भाग से स्त्री की उत्पत्ति हुई. इसी वजह से स्त्री को वामांगी कहा गया और उसका स्थान बाएं पक्ष में माना गया.
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