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50 लाख की सुपारी, 67 गोलियां और बिछ गई 4 लाशें…  9 साल बाद क्यों बंद हो गया धनबाद का बहुचर्चित हत्याकांड केस

Neeraj Singh Murder: सालों बाद, पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या का मामला, एक ऐसी घटना जिसने धनबाद की राजनीति और कानून-व्यवस्था की नींव हिलाकर रख दी थी, अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जो न्यायिक व्यवस्था, पुलिस जांच और पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

Neeraj Singh Murder Case: झारखंड में सालों बाद, पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या का मामला, एक ऐसी घटना जिसने धनबाद की राजनीति और कानून-व्यवस्था की नींव हिलाकर रख दी थी, अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जो न्यायिक व्यवस्था, पुलिस जांच और पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
अदालत में अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करते हुए, धनबाद पुलिस ने सबूतों की कमी के कारण इस मामले की जांच बंद कर दी है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें 2017 का वो हत्याकांड जिसमें नीरज सिंह सहित चार लोगों की हत्या हुई थी.

2017 का वो खौफनाक हत्याकांड?

यह वही हत्या का मामला है जिसने 21 मार्च, 2017 की शाम को पूरे धनबाद में दहशत फैला दी थी. सरायढेला के स्टीलगेट इलाके में अंधाधुंध गोलीबारी की एक दुस्साहसी घटना में, नीरज सिंह सहित चार लोगों को गोलियों से भून दिया गया था. लगातार गोलीबारी की आवाज ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी थी, और उस समय इसे झारखंड का सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्या का मामला माना गया था.

पुलिस अदालत में ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में विफल रही

नीरज सिंह हत्या मामले की जाँच कई सालों तक चली, जिसके दौरान कई नाम सामने आए; पुलिस ने विभिन्न कोणों से जांच शुरू की. राजनीतिक रंजिश, आपराधिक गिरोहों और विभिन्न साजिशों से जुड़े सिद्धांत सामने आए. आरोप पत्र में कई आरोपियों के नाम शामिल किए गए; गिरफ्तारियां हुईं, पूछताछ की गई, और अंततः, मामला अदालतों तक पहुंचा.
रिपोर्टों के अनुसार, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बावजूद, पुलिस अदालत में कोई ठोस या निर्णायक सबूत पेश करने में असमर्थ रही. परिणामस्वरूप, 2025 तक, कई आरोपी पहले ही बरी हो चुके थे, और अब पुलिस ने अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करके मामले को बंद करने का फैसला किया है.

कानूनी तौर पर बंद, फिर भी जनता के मन में सवाल बाकी

हालांकि कानून की नजर में यह मामला बंद माना जा सकता है, लेकिन आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है: आखिर, अगर चार लोगों की हत्या हुई थी, तो उनके हत्यारे कौन थे? जांच एजेंसियां ठोस सबूत जुटाने में विफल क्यों रहीं? क्या इस हाई-प्रोफाइल मामले के पीछे का सच हमेशा के लिए दफन हो गया है?

आखिरकार, पुलिस जांच में कहां चूक हुई?

रिपोर्टों के अनुसार, इस हाई-प्रोफ़ाइल हत्याकांड के पीछे के रहस्य को सुलझाने की कोशिश में पुलिस द्वारा अपनाए गए जांच के तरीकों पर शुरू से ही सवाल उठाए गए हैं.
इंटेलिजेंस और नेटवर्क की विफलता: एक ऐसे मामले में जहां अपराधी दूसरे राज्यों से आए थे और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था, पुलिस की इंटेलिजेंस विंग अपराध के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ की पहचान करने या उसे पकड़ने में नाकाम रही.
गवाहों का ‘पलट जाना’: यह तथ्य कि गवाहों ने एक-एक करके अपने बयान बदल लिए और साथ ही ठोस सबूतों की कमी यह संकेत देता है कि या तो जांच में पेशेवर गंभीरता की कमी थी, या फिर इस केस को पर्दे के पीछे से जान-बूझकर बिगाड़ा गया था,

नतीजा जीरो निकला

2017 से 2026 तक चली इस लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा पूरी तरह से ‘जीरो’ रहा है. स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा व्यक्त किया गया गुस्सा पूरी तरह से जायज़ है. उनका तर्क सीधा-सा है: अगर चार लोगों की हत्या हुई है, तो यकीनन कहीं न कहीं कोई हत्यारा तो होगा ही?
Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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