Akkineni Nageswara Rao: अक्किनेनी नागेश्वर राव बेहद साधारण किसान परिवार में जन्मे और तेलुगू के सुपरस्टार बन गए. उन्हें तेलुगु सिनेमा का 'नटसम्राट' भी कहा जाता था. उन्होंने कई बार महिलाओं की भूमिका निभाई.
अक्किनेनी नागेश्वर राव
Akkineni Nageswara Rao: अक्किनेनी नागेश्वर राव (ANR) की जिंदगी को अगर किसी फिल्म की कहानी कहा जाए, तो गलतत नहीं होगा. इनकी जिंदगी में संघर्ष, संयोग और कामयाबी तीनों का मेल है. बेहद साधारण किसान परिवार में जन्मे उस बच्चे ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उसकी पहचान तेलुगु सिनेमा के ‘नटसम्राट’ के तौर पर होगी. लगभग 10 साल की उम्र में उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखा और उस दौर में जब महिलाओं का मंच पर आना आम नहीं था, तो ANR को ही लड़की बना दिया गया.
ANR को महिला के किरदार निभाने के लिए तैयार किया जाता था. किशोरावस्था तक उन्होंने कई बार महिलाओं की भूमिका निभाई. फिर एक दिन विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन पर हुई एक मुलाकात ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी.
विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन पर फिल्म निर्माता घंटसाला बालरामय्या की नजर ANR पर पड़ी और उन्होंने उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका दिया. यही वह क्षण था, जिसे ANR अपने जीवन का बड़ा मोड़ मानते थे. फिल्मों में आने के बाद भी उनकी राह आसान नहीं रही लेकिन 1953 की ‘देवदासु’ ने उनकी पहचान को एक अलग ऊंचाई दे दी. देवदास के किरदार में उनकी एक्टिंग ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया और इसके बाद से उन्हें ट्रेजेडी भूमिकाओं के लिए याद किया जाने लगा.
हालांकि ANR सिर्फ एक ही तरह के किरदार में बंधने वाले एक्टर नहीं थे. 1966 में आई फिल्म नवरात्रि में उन्होंने एक ही फिल्म में नौ अलग-अलग किरदार निभाए. एक ही फिल्म में इतने सारे किरदारों को उनके करियर की खास उपलब्धियों में गिना जाता है. दिलचस्प यह भी है कि आगे चलकर हिंदी सिनेमा में संजीव कुमार ने ‘नया दिन नई रात’ में नौ भूमिकाएं निभाकर इसी तरह के प्रयोग को लोकप्रिय बनाया.
आर्थिक परेशानियों के कारण अक्किनेनी नागेश्वर राव की पढ़ाई ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई थी लेकिन बाद में विदेश यात्रा के दौरान अंग्रेजी न जानने की परेशानी महसूस हुई, तो उन्होंने खुद अंग्रेजी सीखने की कोशिश की और उसमें काफी सहज हो गए. ANR की कहानी का असली रहस्य शायद उनकी मंजिल में छिपा है. वह सिर्फ पर्दे पर चमकने वाले एक्टर नहीं बने बल्कि तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उन्होंने अन्नपूर्णा स्टूडियोज की स्थापना की और हैदराबाद को तेलुगु सिनेमा का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में काम किया. कहा जाता है कि वे 60 की उम्र में भी अपने काम और फिटनेस को लेकर सजग थे. वे साल में सीमित फिल्में करने और परिवार के साथ छुट्टियों के लिए समय निकालने पर जोर देते थे. एक तरफ बचपन में आर्थिक मजबूरियों के कारण पढ़ाई छूट गई थी, तो दूसरी तरफ वही बच्चा आगे चलकर 250 से ज्यादा फिल्मों का हिस्सा बना.
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