Bollywood Villain: एक्टिंग की दुनिया में ज्यादातर सितारे हीरो बनने का सपना लेकर आते हैं. लेकिन अब वक्त बदल गया है और हीरो से ज्यादा विलेनगिरी के चर्चा हो रहे हैं. बॉबी देओल और अक्षय खन्ना भी विलेन बनकर छाए हुए हैं.
Bobby Deol And Akshaye Khanna
Bollywood Actors: हिंदी सिनेमा के उस दौर में, जहां स्टारडम शोर करता था और अभिनय अक्सर चमक के पीछे छुप जाता था, दो कलाकार ऐसे आए जिन्होंने अपनी-अपनी राह खुद बनाई. एक तरफ अक्षय खन्ना- कम बोलने वाले, गहरी आंखों से अभिनय करने वाले, जो किरदारों में घुलते नहीं बल्कि उन्हें जीते हैं. हर भूमिका में एक अजीब-सा ठहराव, एक बुद्धिमानी, जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है.
दूसरी तरफ बॉबी देओल - स्टार परिवार की विरासत को कंधों पर उठाए, रोमांटिक हीरो से लेकर ज़िंदगी के सबसे अंधेरे किरदारों तक का सफर तय करता हुआ एक अभिनेता, जिसने समय की बेरुखी देखी, गुमनामी का स्वाद चखा, और फिर खुद को नए सिरे से गढ़कर वापसी की. जहां अक्षय खन्ना की खामोशी में गहराई है, वहीं बॉबी देओल की वापसी में आग. हालांकि दोनों का सफर अलग है, लेकिन एक बात दोनों में समान है. दोनों ही सितारों ने बतौर हीरो हिंदी सिनेमा में कदम रखा. कुछ फिल्में चलीं और कुछ फिल्मों का हाल बेहद खराब रहा.
वक्त के साथ बॉबी और अक्षय को समझ आया कि अब हीरोगिरी ज्यादा की तो उनकी एक्टिंग का दीया बुझ जाएगा. स्टारडम डूब चुका था, काम मिलने में परेशानियां आ रही थीं और एक्टिंग का सपना कहीं खोने लगा था. ऐसे में वक्त की नजाकत को समझते हुए हीरो बनने का सपना छोड़ा और विलेनगिरी की दुनिया में दोनों ने अपने-अपने कदम रखे.
पहले बात बॉबी देओल की. रोमांटिक हीरो की छवि से बाहर निकलकर जब बॉबी देओल ने विलेन की राह पकड़ी, तो यह सिर्फ एक इमेज बदलाव नहीं था, बल्कि उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. नेगेटिव किरदारों में उनकी मौजूदगी ने फिल्मों को वो धार दी, जो सीधे बॉक्स ऑफिस पर दिखाई दी. जिन फिल्मों में वे खलनायक बने, वहां कहानी को मजबूती मिली, टकराव गहरा हुआ और दर्शकों की दिलचस्पी कई गुना बढ़ी. नतीजा यह रहा कि ऐसी फिल्मों ने न सिर्फ उम्मीद से बेहतर ओपनिंग ली, बल्कि लंबे समय तक सिनेमाघरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चर्चा में रहीं.
बॉबी देओल का विलेन अवतार साबित कर गया कि जब किरदार असरदार हो, तो कमाई अपने आप रास्ता ढूंढ लेती है और यही वजह है कि उनकी दूसरी पारी बॉक्स ऑफिस के लिहाज से भी यादगार बन गई. साल 2023 में 'एनिमल' में बॉबी ने अपनी शराफत का छोड़ी, लोग उनकी विलेनगिरी के दीवाने ही हो गए. 900 करोड़ी इस फिल्म में बॉबी का रोल भले ही थोड़ा कम था, लेकिन काम के वजन के आगे फिल्म के लीड हीरो रणबीर कपूर भी दबे नजर आए. आश्रम सीरीज और एनिमल के बाद बॉबी ने साउथ सिनेमा में भी अपनी विलेनगिरी का दम दिखाया. अब बॉबी नेगेटिव रोल के लिए मेकर्स की पहली पसंद बने हुए हैं.
अक्षय खन्ना ने थोड़ा देर से ही सही, लेकिन विलेनगिरी में जब अपने कदम रखे, तो लोग खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर हो गए. साल 2025 अक्षय खन्ना ने अपने नाम दर्ज करवा लिया है. अक्षय ने विलेन बनकर साबित कर दिया कि असली खौफ ऊंची आवाज में नहीं, दिमागी खेल में होता है. साल 2025 की फिल्मों में उनके नेगेटिव किरदारों ने दर्शकों को चौंकाया, क्योंकि ये विलेन दिखावटी नहीं, बल्कि बेहद सधा हुआ, चालाक और कहानी को भीतर से हिला देने वाला था. उनकी शांत बॉडी लैंग्वेज, पैनी नजर और डॉयलॉग्स के बीच का ठहराव ही सबसे बड़ा हथियार बना. 'छावा' के औरंगजेब हों या फिर 'धुरंधर' के रहमान डकैत... हर सीन में ऐसा लगा जैसे वो बाकी किरदारों से दो कदम आगे चल रहे हैं. भले ही हीरो बनकर अक्षय और बॉबी का सिक्का नहीं चला, लेकिन अब विलेन बनवकर 90 के दशक के ये दोनों सितारे पर्दे पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं.
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