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‘टॉक्सिक’ का डर या सिर्फ एक रणनीति? ‘धुरंधर 2’ की रिलीज पर क्यों मंडराया संकट?

यश की फिल्म 'टॉक्सिक' (Yash Film Toxic) अपने डार्क और एक्शन अवतार (Dark and Action Mode) से चर्चा में है, वहीं 'धुरंधर 2' (Dhurandhar 2) को लेकर भी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. दोनों फिल्मों के कंटेंट और फैन बेस (Fan Base) का विश्लेषण, जो यह साफ करता है कि बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर असल में किसका पलड़ा भारी पड़ने वाला है.

Afraid of Dhurandar2 and Toxic?: भारतीय गेमिंग और स्ट्रीमिंग कम्युनिटी में ‘धुरंधर 2’ (Dhurander 2) और ‘टॉक्सिक’ (Toxic) जैसे नाम ज्यादातर विवादों, कट्टर फैनबेस और उनकी आक्रामक शैली के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं. लेकिन,  जब हम पूछते हैं कि “क्या लोग इनसे डरते हैं?”, तो इसका जवाब सीधा ‘हां’ या ‘ना’ में नहीं दिया जा सकता है. दरअसल, यह डर शारीरिक न होकर डिजिटल प्रभाव, ट्रोलिंग और ऑनलाइन साख (Reputation) से जुड़ा हुआ होता है. 

1. डिजिटल प्रभुत्व और ट्रोलिंग का डर

इंटरनेट की दुनिया में ‘डर’ का मतलब ज्यादातर ‘कैंसिल कल्चर’ या फिर भारी संख्या में ट्रोलिंग से किया जाता है. लेकिन,  धुरंधर 2 और टॉक्सिक जैसे क्रिएटर्स ने एक ऐसी ऑडियंस तैयार की है जो बहुत वफादार और कभी-कभी आक्रामक भी होती है. तो वहीं, अगर कोई छोटा क्रिएटर या व्यक्ति इनके खिलाफ बोलता है, तो उन्हें इन स्ट्रीमर्स के प्रशंसकों के गुस्सा झेलना पड़ता है. इसके साथ ही कमेंट सेक्शन में गालियों के साथ-साथ सोशल मीडिया अकाउंट्स का रिपोर्ट होना एक बहुत ही सामान्य बात होती है. भयंकर ट्रोलिंग की वजह से किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह से तोड़ सकता है, जिससे ज्यादातर लोग सार्वजनिक रूप से इनसे भिड़ने से बचने की कोशिश भी करते हैं.

2. ‘टॉक्सिक’ व्यवहार और गेमिंग कल्चर

‘टॉक्सिक’ (Toxic) नाम ही इस बात का प्रतीक है कि उनकी शैली आक्रामक (Aggressive) है. तो वहीं, दूसरी तरफ गेमिंग कम्युनिटी में गाली-गलौज और रोस्टिंग एक आम बात बन चुकी है, जो आज के ज़माने में हर कोई एक दूसरे को ट्रोल करने में लगा हुआ है. इतना ही नहीं, लोगों को इस बात का भी डर रहता है कि अगर वे इन बड़े नामों की नज़र में गलती से भी आ गए तो, लोग कुछ ही देर में उनका रोस्ट कर देंगे और साथ ही ट्रोलिंग की भी शुरुआत हो जाएगी. इन सबके के बावजूद भी एक बार किसी व्यक्ति की रोस्ट वीडियो बनने के बाद इंटरनेट पर उस व्यक्ति की छवि को सुधारना सबसे ज्यादा मुश्किल हो जाता है. दूसरी तरफ लाइव स्ट्रीम के दौरान जिस तरह का आत्मविश्वास और दबदबा ये क्रिएटर्स दिखाते हैं, वह नए खिलाड़ियों या कम्युनिटी के अन्य सदस्यों के बीच एक खौफ पैदा करने का भी काम करता है. 

3. क्या यह डर है या सम्मान?

ज्यादातर हम जिसे ‘डर’ समझते हैं, वह वास्तव में विवादों से बचने की कोशिश होती है. बड़े इन्फ्लुएंसर्स और ब्रांड्स इनसे उलझने से डरते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि किसी भी तरह के विवाद की वजह से उनकी ब्रांड वैल्यू पूरी तरह से गिर सकती है. हालाँकि, कई बार लोग डरते नहीं हैं, बल्कि वे इन क्रिएटर्स की पहुंच (Reach) का सम्मान करते हैं. वे जानते हैं कि इनसे पंगा लेने का मतलब है अपनी शांति को पूरी तरह से खो देना. धुरंधर 2 और टॉक्सिक से लोग उनके शरीर या ताकत की वजह से नहीं, बल्कि उनकी ‘डिजिटल आर्मी’ और ‘बेबाक शैली’ की वजह से कतराते हैं. इसके साथ ही इंटरनेट पर लोकप्रियता ही शक्ति है, और जब उस शक्ति का इस्तेमाल किसी के खिलाफ होता है, तो वह निश्चित रूप से डर पैदा करने का काम अच्छी तरह से करता है. हालाँकि, यह भी सच है कि इसी आक्रामकता ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है जहां लोग उनके बारे में बात करने से पहले सौ बार ज़रूर सोचते हैं. 

Darshna Deep

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