: भारतीय सिनेमा में इन दिनों पौराणिक और धार्मिक कहानियों का दौर तेजी से मजबूत हो रहा है. कभी ऐसी फिल्मों को एक खास दर्शक वर्ग तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब बड़े पर्दे पर धर्म, संस्कृति और पौराणिक किरदारों से जुड़ी कहानियों को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. छोटे बजट की फिल्मों से लेकर बड़े प्रोडक्शन हाउस तक इस बदलते ट्रेंड को भुनाने की तैयारी में हैं. इसी कड़ी में अब करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस भी पौराणिक कहानी पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में बताया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मा प्रोडक्शंस भगवान कृष्ण और राधा की कहानी पर फिल्म बनाने जा रहा है. इस फिल्म का निर्देशन ‘अवने श्रीमन्नारायण’ के निर्देशक सचिन रवि कर सकते हैं.
कृष्ण के जन्म से कंस वध तक की कहानी दिखाने की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित फिल्म में भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर कंस के वध तक की कहानी को बड़े पर्दे पर दिखाया जा सकता है. यानी दर्शकों को कृष्ण के जीवन के एक महत्वपूर्ण दौर को सिनेमाई अंदाज में देखने का मौका मिलेगा. फिल्म की कहानी में पौराणिक घटनाओं के साथ रोमांस, इमोशन, ड्रामा और ट्रेजेडी का मेल देखने को मिलने की बात कही जा रही है. अगर यह प्रोजेक्ट आकार लेता है तो धर्मा प्रोडक्शंस के लिए यह उसके अब तक के पारंपरिक लव-स्टोरी और फैमिली-ड्रामा से अलग तरह का प्रयोग होगा.
कोरोना काल में ‘रामायण-महाभारत’ ने बदला मेकर्स का नजरिया
पौराणिक कहानियों की लोकप्रियता का असर पिछले कुछ वर्षों में खास तौर पर देखने को मिला है. कोरोना काल के दौरान जब टीवी पर ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ का दोबारा प्रसारण हुआ, तो इन धारावाहिकों को दर्शकों ने जबरदस्त पसंद किया. इस दौर ने मेकर्स को यह संकेत दिया कि धार्मिक और पौराणिक कहानियों की लोकप्रियता सिर्फ पुरानी पीढ़ी तक सीमित नहीं है. इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में युवा दर्शक भी अपनी संस्कृति, इतिहास और धार्मिक कथाओं को नए नजरिए से जानना चाहते हैं. इसी बदलते दर्शक वर्ग ने पौराणिक कहानियों को नए तरीके से पेश करने की संभावनाएं बढ़ा दी हैं.
साउथ सिनेमा ने पहले पहचाना पौराणिक फिल्मों का पैन-इंडिया कनेक्शन
इस ट्रेंड को दक्षिण भारतीय सिनेमा ने काफी पहले समझ लिया था. तेलुगु, तमिल और कन्नड़ सिनेमा ने लोककथाओं और पौराणिक किरदारों को आधुनिक तकनीक और बड़े विजुअल स्केल के साथ पेश किया. खास बात यह रही कि इन फिल्मों को सिर्फ क्षेत्रीय दर्शकों तक सीमित रखने के बजाय पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज किया गया. इसका फायदा भी देखने को मिला. क्षेत्रीय कहानियां देशभर के दर्शकों तक पहुंचीं और पौराणिक किरदारों पर बनी फिल्मों के लिए एक बड़ा बाजार तैयार हुआ.
‘हनुमान अंश’ की सफलता ने बढ़ाया भरोसा
हालिया दौर में ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने इस ट्रेंड को और मजबूत किया. फिल्म के सीमित बजट के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई ने ट्रेड को चौंका दिया. करीब 2 करोड़ रुपये की लागत में बनी बताई जा रही इस फिल्म ने 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा छूने का दावा किया गया है. फिल्म की सफलता से यह संदेश गया कि किसी धार्मिक या पौराणिक कहानी को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए सिर्फ बड़े स्टार और भारी-भरकम बजट जरूरी नहीं हैं. मजबूत कहानी और दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव भी फिल्म को बड़ी सफलता दिला सकता है.
‘महावतार नरसिम्हा’ और ‘लालो’ ने भी दिखाया रास्ता
पौराणिक कहानियों की सफलता का दायरा सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है. भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार पर आधारित एनिमेशन फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ ने भी कई भारतीय भाषाओं में रिलीज होकर अच्छा प्रदर्शन किया. फिल्म के भारत में 180 करोड़ रुपये से ज्यादा और दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई करने की ट्रेड रिपोर्ट सामने आई. वहीं गुजराती भक्तिपूर्ण ड्रामा ‘लालो – कृष्ण सदा सहायते’ ने कम बजट में बड़ी सफलता हासिल कर यह साबित किया कि दर्शकों को जोड़ने के लिए बड़े स्टार का होना जरूरी नहीं है. करीब 50 लाख रुपये के बजट में बनी बताई जाने वाली इस फिल्म ने दुनिया भर में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया और गुजराती सिनेमा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की.
अब पौराणिक कहानियां सिर्फ भक्ति तक सीमित नहीं
पौराणिक फिल्मों की लगातार सफलता के बाद फिल्म इंडस्ट्री का नजरिया भी बदलता दिख रहा है. अब ऐसी कहानियों को केवल धार्मिक या भक्तिपूर्ण फिल्मों के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इनके भीतर बड़े सिनेमाई और व्यावसायिक अवसर भी तलाशे जा रहे हैं. करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस की राधा-कृष्ण पर संभावित फिल्म भी इसी बदलते ट्रेंड का हिस्सा मानी जा रही है. अगर यह प्रोजेक्ट बनता है, तो प्रेम, आस्था, संघर्ष और पौराणिक कथा को बड़े फिल्मी कैनवास पर पेश करने की कोशिश होगी. ऐसे में आने वाले समय में पौराणिक कहानियों पर बड़े बजट की फिल्मों की संख्या और बढ़ सकती है.