KBC 18 Kapila Taneja: ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ का मंच कई बार कंटेस्टेंट्स की जिंदगी से जुड़ी ऐसी कहानियों का गवाह बन जाता है, जो करोड़ों रुपये के इनाम से कहीं ज्यादा गहरा असर छोड़ती हैं. KBC 18 के लेटेस्ट एपिसोड में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से पहुंचीं कपिला तनेजा ने भी अपनी जिंदगी के ऐसे दर्दनाक अध्याय को सामने रखा, जिसे सुनकर अमिताभ बच्चन भी भावुक हो गए. हॉट सीट पर बैठीं कपिला ने बताया कि शादी के बाद उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और साल 2002 में उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई. इस घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. लेकिन उनके दर्द की सबसे बड़ी वजह सिर्फ वह हादसा नहीं था. कपिला ने बताया कि इसके बाद उन्हें अपनी बेटी से भी अलग कर दिया गया और वह पिछले 24 साल से उसे देख तक नहीं पाई हैं.
मिट्टी का तेल डालकर जलाने की कोशिश
कपिला ने अमिताभ बच्चन को बताया कि उनकी शादी परिवार की मर्जी के खिलाफ हुई थी. उनके ससुराल वाले इस रिश्ते से खुश नहीं थे और मायके से दहेज की उम्मीद कर रहे थे. शादी के बाद कथित तौर पर उन्हें लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. कपिला के मुताबिक, साल 2002 में उनके साथ ऐसी घटना हुई, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. उन्होंने बताया कि उनकी सास ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू किया और बाद में उन्हें जलाने की योजना बनाई गई. कपिला ने बताया कि उन पर मिट्टी का तेल डाला गया और फिर मोमबत्ती लगा दी गई. सर्दियों के दिन होने की वजह से साड़ी का आंचल उनके शरीर से चिपक गया था. कपिला ने बताया कि किसी तरह उन्होंने साड़ी को हटाया और खुद को पानी की टंकी में डुबोकर अपनी जान बचाई. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. वह दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बेहोश रहीं. होश में आने के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और फिर इलाज व सर्जरी का लंबा दौर शुरू हुआ.
हादसे से बच गईं, लेकिन बेटी से हमेशा के लिए हो गईं दूर
कपिला की कहानी का सबसे भावुक हिस्सा उनकी बेटी से जुड़ा था. उन्होंने बताया कि उस वक्त उनकी एक छोटी बेटी थी, लेकिन हादसे के बाद ससुराल वालों ने उन्हें बेटी से मिलने नहीं दिया. देखते ही देखते साल बीतते गए और मां-बेटी के बीच दूरी बढ़ती चली गई.
कपिला ने बताया कि अब 24 साल गुजर चुके हैं, लेकिन वह अपनी बेटी को देख तक नहीं पाई हैं. उन्हें पड़ोसियों के जरिए उसकी जिंदगी के बारे में कुछ जानकारी मिलती रही. कपिला ने बताया कि उन्हें पता चला है कि उनकी बेटी अब बड़ी हो चुकी है और नौकरी के लिए किसी दूसरे शहर में चली गई है. बेटी का जिक्र करते हुए कपिला की आवाज में दर्द साफ नजर आया. उन्होंने बताया कि वह आज भी हर दिन अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करती हैं. इतने लंबे समय तक बेटी से दूर रहने का दर्द उनके शब्दों में साफ महसूस हुआ.
अमिताभ बच्चन बोले- अन्याय कहना भी छोटा शब्द होगा
कपिला की आपबीती सुनकर अमिताभ बच्चन भी भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि उनके साथ जो हुआ, उसे सिर्फ अन्याय कहना भी छोटा शब्द होगा. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी महिला के साथ ऐसा होना गलत है. KBC का मंच उस समय सिर्फ सवाल-जवाब और इनाम की रकम तक सीमित नहीं रहा. कपिला की कहानी ने वहां मौजूद लोगों को उनकी जिंदगी के उस संघर्ष से रूबरू कराया, जिसे वह वर्षों से अपने भीतर लेकर जी रही हैं. हादसे के बाद कपिला की जिंदगी में भी काफी बदलाव आया. वह फिलहाल होम ट्यूटर के तौर पर काम करती हैं और उन्होंने बताया कि वह अपना ज्यादातर समय घर के अंदर ही बिताती हैं. इसके बावजूद उन्होंने अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी.
7.5 लाख रुपये लेकर लौटीं कपिला
गेम की बात करें तो कपिला तनेजा ने KBC 18 में 7.5 लाख रुपये जीते. ‘सुपर संदूक’ में जीती रकम को लाइफलाइन के बदले इस्तेमाल नहीं करने पर उन्हें 90 हजार रुपये का अतिरिक्त बोनस भी मिला. इसके बाद वह 12वें सवाल पर अटक गईं. सवाल था कि पश्चिम एशिया के इनमें से किस शहर को 1930 के दशक में ब्रिटिश भारत से अलग किया गया था? इसके विकल्प मोसुल, बसरा, जेद्दा और अदन थे. कपिला इस सवाल के जवाब को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थीं. ऐसे में उन्होंने जोखिम लेने के बजाय गेम छोड़ने का फैसला किया और 7.5 लाख रुपये लेकर घर लौट गईं. गेम छोड़ने के बाद अमिताभ बच्चन ने उनसे अनुमान लगाने को कहा. कपिला ने मोसुल को चुना, लेकिन यह जवाब गलत था. इस सवाल का सही जवाब अदन था.
जीती रकम से कान की सर्जरी
KBC से मिली रकम कपिला के लिए सिर्फ इनाम नहीं है. उन्होंने बताया कि वह इस पैसे का इस्तेमाल कान की सर्जरी कराने के लिए करना चाहती हैं. इसके साथ ही उनके मन में एक ऐसा सपना भी है, जो उनके अपने संघर्ष से जुड़ा हुआ है. कपिला अविवाहित माताओं के लिए एक घर खोलना चाहती हैं. उनका मानना है कि ऐसी महिलाओं को अक्सर समाज में भेदभाव और तानों का सामना करना पड़ता है. इस तरह कपिला तनेजा KBC से 7.5 लाख रुपये की रकम लेकर जरूर लौटीं, लेकिन उनके लिए इस मंच की अहमियत सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रही. उन्होंने अपनी जिंदगी के पुराने जख्मों को दुनिया के सामने रखा और साथ ही अपनी बेटी से दोबारा मिलने की उम्मीद और दूसरी महिलाओं के लिए कुछ करने का सपना भी अपने साथ लेकर गईं.