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Home > मनोरंजन > श्रीदेवी का चेन्नई स्थित संपत्ति विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट; बोनी कपूर, जाह्नवी और खुशी को मिला नोटिस, जानें पूरा मामला

श्रीदेवी का चेन्नई स्थित संपत्ति विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट; बोनी कपूर, जाह्नवी और खुशी को मिला नोटिस, जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी से जुड़ी चेन्नई की विवादित 2.7 एकड़ जमीन पर स्टे का आदेश दिया है और बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने मध्यस्थता का सुझाव भी दिया है और मामले की सुनवाई 18 दिसंबर को होगी.

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Last Updated: September 17, 2026 15:43:34 IST

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चेन्नई में दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी से जुड़ी एक संपत्ति को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिससे बोनी कपूर और उनकी बेटियां जाह्नवी और खुशी कपूर एक बार फिर कानूनी सुर्खियों में आ गए हैं. 16 सितंबर को जस्टिस केवी विश्वनाथन और अरुण पल्ली की बेंच ने कपूर परिवार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें एमसी शिवकामी और उनके भाई एमसी नटराजन द्वारा दायर दीवानी मुकदमे को खारिज कर दिया गया था. 

याचिकाकर्ता चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित 2.7 एकड़ जमीन में हिस्सेदारी का दावा कर रहे हैं, जिसे 1988 में श्रीदेवी के परिवार को बेचा गया था. सर्वोच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई तक संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है , जिसमें हस्तांतरण, निर्माण और कब्जे से संबंधित प्रतिबंध शामिल हैं. पीठ ने पक्षों को मध्यस्थता के विकल्प तलाशने के लिए भी प्रोत्साहित किया है और संकेत दिया है कि उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को मध्यस्थ नियुक्त किया जा सकता है.

श्रीदेवी चेन्नई संपत्ति विवाद

यह विवाद 19 अप्रैल, 1988 को हुए एक बिक्री सौदे से जुड़ा है. शिवकामी और अन्य याचिकाकर्ता संपत्ति में अपने अधिकार का दावा करते हैं और उन विक्रय दस्तावेजों को चुनौती देते हैं जिनके माध्यम से श्रीदेवी और उनके परिवार ने जमीन हासिल की थी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निचली अदालत ने प्रथम दृष्टया मुकदमे का आधार पाया था और मुकदमा आगे बढ़ाने का फैसला सुनाया था. उनके वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक चरण में ही दस्तावेजों की खूबियों और कानूनी उत्तराधिकार से संबंधित प्रश्नों पर विचार किया, जिसे उन्होंने प्रभावी रूप से “मिनी-ट्रायल” बताया.

मद्रास उच्च न्यायालय ने मुकदमा क्यों खारिज किया?

कपूर परिवार ने दीवानी मुकदमे को जारी रखने को चुनौती दी थी, यह तर्क देते हुए कि लेन-देन लगभग चार दशक पुराना है और दावा समय सीमा के कारण खारिज हो चुका है. अप्रैल 2026 में, मद्रास उच्च न्यायालय ने कपूरी परिवार की चुनौती को स्वीकार करते हुए वाद को खारिज करने का आदेश दिया. न्यायालय ने पाया कि संबंधित विक्रय विलेख 1988 से मौजूद थे और याचिकाकर्ताओं के इस दावे पर सवाल उठाया कि उन्हें इनकी जानकारी केवल 2023 में हुई. न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के वैधानिक उत्तराधिकारी होने के दावे की भी जांच की.

कपूर परिवार के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि श्रीदेवी की 2018 में हुई मृत्यु के बाद 2023 में म्यूटेशन के लिए आवेदन किया गया था, जबकि दशकों पुराने लेन-देन को चुनौती देने के लिए मुकदमा 2025 में दायर किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया मध्यस्थता का सुझाव

सुनवाई के दौरान, पीठ ने दोनों पक्षों से एमसी चंद्रशेखरन की संपत्ति में हिस्सेदारी और याचिकाकर्ताओं के इस दावे के बारे में सवाल किए कि वे उनके बच्चे हैं. विवाद को केवल लंबी कानूनी कार्यवाही में उलझने देने के बजाय, सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को समझौता करने का सुझाव दिया. न्यायालय द्वारा एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश को मध्यस्थ नियुक्त किए जाने की संभावना है. इस मामले की सुनवाई 18 दिसंबर को होगी , जब अदालत मध्यस्थता की प्रगति पर विचार करेगी.

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चेन्नई में दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी से जुड़ी एक संपत्ति को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिससे बोनी कपूर और उनकी बेटियां जाह्नवी और खुशी कपूर एक बार फिर कानूनी सुर्खियों में आ गए हैं. 16 सितंबर को जस्टिस केवी विश्वनाथन और अरुण पल्ली की बेंच ने कपूर परिवार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें एमसी शिवकामी और उनके भाई एमसी नटराजन द्वारा दायर दीवानी मुकदमे को खारिज कर दिया गया था. 

याचिकाकर्ता चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित 2.7 एकड़ जमीन में हिस्सेदारी का दावा कर रहे हैं, जिसे 1988 में श्रीदेवी के परिवार को बेचा गया था. सर्वोच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई तक संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है , जिसमें हस्तांतरण, निर्माण और कब्जे से संबंधित प्रतिबंध शामिल हैं. पीठ ने पक्षों को मध्यस्थता के विकल्प तलाशने के लिए भी प्रोत्साहित किया है और संकेत दिया है कि उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को मध्यस्थ नियुक्त किया जा सकता है.

श्रीदेवी चेन्नई संपत्ति विवाद

यह विवाद 19 अप्रैल, 1988 को हुए एक बिक्री सौदे से जुड़ा है. शिवकामी और अन्य याचिकाकर्ता संपत्ति में अपने अधिकार का दावा करते हैं और उन विक्रय दस्तावेजों को चुनौती देते हैं जिनके माध्यम से श्रीदेवी और उनके परिवार ने जमीन हासिल की थी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निचली अदालत ने प्रथम दृष्टया मुकदमे का आधार पाया था और मुकदमा आगे बढ़ाने का फैसला सुनाया था. उनके वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक चरण में ही दस्तावेजों की खूबियों और कानूनी उत्तराधिकार से संबंधित प्रश्नों पर विचार किया, जिसे उन्होंने प्रभावी रूप से “मिनी-ट्रायल” बताया.

मद्रास उच्च न्यायालय ने मुकदमा क्यों खारिज किया?

कपूर परिवार ने दीवानी मुकदमे को जारी रखने को चुनौती दी थी, यह तर्क देते हुए कि लेन-देन लगभग चार दशक पुराना है और दावा समय सीमा के कारण खारिज हो चुका है. अप्रैल 2026 में, मद्रास उच्च न्यायालय ने कपूरी परिवार की चुनौती को स्वीकार करते हुए वाद को खारिज करने का आदेश दिया. न्यायालय ने पाया कि संबंधित विक्रय विलेख 1988 से मौजूद थे और याचिकाकर्ताओं के इस दावे पर सवाल उठाया कि उन्हें इनकी जानकारी केवल 2023 में हुई. न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के वैधानिक उत्तराधिकारी होने के दावे की भी जांच की.

कपूर परिवार के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि श्रीदेवी की 2018 में हुई मृत्यु के बाद 2023 में म्यूटेशन के लिए आवेदन किया गया था, जबकि दशकों पुराने लेन-देन को चुनौती देने के लिए मुकदमा 2025 में दायर किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया मध्यस्थता का सुझाव

सुनवाई के दौरान, पीठ ने दोनों पक्षों से एमसी चंद्रशेखरन की संपत्ति में हिस्सेदारी और याचिकाकर्ताओं के इस दावे के बारे में सवाल किए कि वे उनके बच्चे हैं. विवाद को केवल लंबी कानूनी कार्यवाही में उलझने देने के बजाय, सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को समझौता करने का सुझाव दिया. न्यायालय द्वारा एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश को मध्यस्थ नियुक्त किए जाने की संभावना है. इस मामले की सुनवाई 18 दिसंबर को होगी , जब अदालत मध्यस्थता की प्रगति पर विचार करेगी.

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