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कौन थी मधु कांबीकर, 73 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, लावणी और मराठी सिनेमा में बिखेरा अभिनय का जादू

Madhu Kambikar death: मराठी अभिनेत्री और मशहूर लावणी डांसर मधु कांबीकर का 73 साल की उम्र में पुणे में निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार थीं. उन्होंने मराठी सिनेमा, रंगमंच और महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला लावणी में दशकों तक योगदान दिया. साल 2018 में उन्हें जी चित्र गौरव लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. ‘एक होता विदूषक’, ‘शापित’ और ‘झपाटलेला’ जैसी फिल्मों में उनके काम को याद किया जाता है.

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Last Updated: October 12, 2026 17:33:04 IST

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Madhu Kambikar death: मराठी मनोरंजन जगत से दुखद खबर सामने आई है. मशहूर अभिनेत्री और लावणी डांसर मधु कांबीकर का 73 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने पुणे में अंतिम सांस ली. वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं. मधु कांबीकर ने अपने अभिनय और मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए मराठी सिनेमा, रंगमंच और महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला लावणी में खास पहचान बनाई थी. उनके निधन से मराठी कला जगत ने एक ऐसी कलाकार को खो दिया है, जिन्होंने अपना जीवन अभिनय और लोककला को समर्पित कर दिया.

हर मंच पर बनाई अलग पहचान

मधु कांबीकर को मराठी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के साथ साथ लावणी की शानदार प्रस्तुतियों के लिए भी जाना जाता था. उन्होंने अपनी कला के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई. उनकी पहचान केवल एक अभिनेत्री तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाली कलाकारों में भी शामिल थीं. फिल्मों और थिएटर में काम करने के साथ उन्होंने मंच पर लावणी प्रस्तुत कर इस पारंपरिक लोककला को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया. उनके लंबे कलात्मक सफर ने उन्हें मराठी मनोरंजन जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई.

कला में योगदान के लिए मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

मधु कांबीकर के अभिनय और कला के क्षेत्र में लंबे योगदान को सम्मानित भी किया गया था. साल 2018 में उन्हें जी चित्र गौरव लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया. यह सम्मान उनके दशकों लंबे करियर और मराठी मनोरंजन जगत में उनके योगदान को रेखांकित करता है. उन्होंने फिल्मों, रंगमंच और लावणी के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. उनके काम को महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला से जुड़ी विरासत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

स्ट्रोक के बाद लंबे समय तक मंच से रहीं दूर

मधु कांबीकर की जिंदगी में एक दौर ऐसा भी आया, जब स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उन्हें मंच से दूरी बनानी पड़ी. दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2016 में उन्हें स्ट्रोक आया था. मुंबई में लावणी की प्रस्तुति देने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी थी. इसके बाद उन्हें लंबे समय तक मंचीय कार्यक्रमों से दूर रहना पड़ा. बीमारी के कारण उनकी लावणी प्रस्तुतियों पर भी विराम लग गया था. करीब 12 साल के अंतराल के बाद उन्होंने माटुंगा स्थित यशवंत नाट्य मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम के जरिए मंच पर वापसी की थी. उनकी यह वापसी उनके कला के प्रति लगाव और मंच से जुड़ाव की कहानी का अहम हिस्सा रही.

इन मराठी फिल्मों में किया यादगार काम

अपने लंबे करियर में मधु कांबीकर ने कई मराठी फिल्मों में काम किया. उन्हें ‘एक होता विदूषक’, ‘शापित’, ‘झपाटलेला’, ‘येऊ का घरात’ और ‘मला घेऊन चला’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के लिए याद किया जाता है. मधु कांबीकर ने सिनेमा के साथ साथ रंगमंच और लावणी के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी. उनके निधन के साथ मराठी मनोरंजन जगत ने एक अनुभवी कलाकार को खो दिया है. उनका अभिनय और पारंपरिक लोककला के प्रति योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा.

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Madhu Kambikar death: मराठी मनोरंजन जगत से दुखद खबर सामने आई है. मशहूर अभिनेत्री और लावणी डांसर मधु कांबीकर का 73 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने पुणे में अंतिम सांस ली. वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं. मधु कांबीकर ने अपने अभिनय और मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए मराठी सिनेमा, रंगमंच और महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला लावणी में खास पहचान बनाई थी. उनके निधन से मराठी कला जगत ने एक ऐसी कलाकार को खो दिया है, जिन्होंने अपना जीवन अभिनय और लोककला को समर्पित कर दिया.

हर मंच पर बनाई अलग पहचान

मधु कांबीकर को मराठी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के साथ साथ लावणी की शानदार प्रस्तुतियों के लिए भी जाना जाता था. उन्होंने अपनी कला के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई. उनकी पहचान केवल एक अभिनेत्री तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाली कलाकारों में भी शामिल थीं. फिल्मों और थिएटर में काम करने के साथ उन्होंने मंच पर लावणी प्रस्तुत कर इस पारंपरिक लोककला को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया. उनके लंबे कलात्मक सफर ने उन्हें मराठी मनोरंजन जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई.

कला में योगदान के लिए मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

मधु कांबीकर के अभिनय और कला के क्षेत्र में लंबे योगदान को सम्मानित भी किया गया था. साल 2018 में उन्हें जी चित्र गौरव लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया. यह सम्मान उनके दशकों लंबे करियर और मराठी मनोरंजन जगत में उनके योगदान को रेखांकित करता है. उन्होंने फिल्मों, रंगमंच और लावणी के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. उनके काम को महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला से जुड़ी विरासत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

स्ट्रोक के बाद लंबे समय तक मंच से रहीं दूर

मधु कांबीकर की जिंदगी में एक दौर ऐसा भी आया, जब स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उन्हें मंच से दूरी बनानी पड़ी. दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2016 में उन्हें स्ट्रोक आया था. मुंबई में लावणी की प्रस्तुति देने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी थी. इसके बाद उन्हें लंबे समय तक मंचीय कार्यक्रमों से दूर रहना पड़ा. बीमारी के कारण उनकी लावणी प्रस्तुतियों पर भी विराम लग गया था. करीब 12 साल के अंतराल के बाद उन्होंने माटुंगा स्थित यशवंत नाट्य मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम के जरिए मंच पर वापसी की थी. उनकी यह वापसी उनके कला के प्रति लगाव और मंच से जुड़ाव की कहानी का अहम हिस्सा रही.

इन मराठी फिल्मों में किया यादगार काम

अपने लंबे करियर में मधु कांबीकर ने कई मराठी फिल्मों में काम किया. उन्हें ‘एक होता विदूषक’, ‘शापित’, ‘झपाटलेला’, ‘येऊ का घरात’ और ‘मला घेऊन चला’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के लिए याद किया जाता है. मधु कांबीकर ने सिनेमा के साथ साथ रंगमंच और लावणी के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी. उनके निधन के साथ मराठी मनोरंजन जगत ने एक अनुभवी कलाकार को खो दिया है. उनका अभिनय और पारंपरिक लोककला के प्रति योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा.

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