जेल से बाहर आते ही राजपाल यादव ने तोड़ी चुप्पी! ₹9 करोड़ के कर्ज और सलाखों के पीछे की वो कड़वी सच्चाई, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. क्या है पूरा सच? यहां जानें...
राजपाल यादव ने अपना जेल का अनुभव साझा किया है
एक्टर राजपाल यादव बेल पर जेल से रिहा हो गए हैं. रिहा होने के बाद, उन्होंने सबसे पहला सेलिब्रेशन अपने घर पर किया, या यूँ कहें कि उनके घर पर हो रहा है. असल में, राजपाल यादव रिहा होने के तुरंत बाद अपनी भतीजी की शादी में शामिल हुए, और उन्होंने सच में जश्न का माहौल बना दिया. राजपाल यादव की भतीजी की शादी उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुई, और वे अभी वहीं हैं. शादी की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इस बीच, राजपाल यादव ने एक इंटरव्यू में अपने जेल के अनुभव और इससे जुड़े मामले में पूरी बात बताई है. उन्होंने यह भी बताया कि इस समय में कौन उनका सहारा बना और जेल के अंदर वो कैसे सख्त रूटीन फॉलो करते थे?
राजपाल यादव के कानूनी संकट की जड़ 2010 में है. उन्होंने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फ़िल्म ‘अता पता लापता’ को प्रोड्यूस करने के लिए ₹5 करोड़ का लोन लिया था. यह फ़िल्म 2012 में रिलीज़ हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाई और बुरी तरह फ्लॉप हो गई. इस फ़ाइनेंशियल नुकसान की वजह से वह समय पर लोन नहीं चुका पाए. धीरे-धीरे, इंटरेस्ट और चेक बाउंस चार्ज ने रकम को लगभग ₹9 करोड़ तक बढ़ा दिया, जिससे उन्हें कानूनी कार्रवाई और जेल की सज़ा का सामना करना पड़ा.
इस मुश्किल समय में उनकी पत्नी राधा यादव मजबूती से उनके साथ खड़ी रहीं. राधा ने साफ किया कि मामला अभी पूरी तरह से सुलझा नहीं है, लेकिन वे हर कदम सोच-समझकर उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कानूनी और सम्मानजनक ऑप्शन पर विचार किया जा रहा है, और कभी-कभी चीजें सिर्फ विलपावर पर ही नहीं बल्कि सही टाइमिंग पर भी निर्भर करती हैं. राजपाल यादव का मानना है कि इस मामले को कानूनी तौर पर सुलझाना ही एकमात्र सही रास्ता था, और वे पिछले कई सालों से इस पर काम कर रहे हैं.
सलाखों के पीछे अपने अनुभव शेयर करते हुए, राजपाल यादव ने बताया कि उनके लिए सबसे मुश्किल समय अपने परिवार से दूर रहना था. हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि उन्होंने जेल के अंदर एक सख्त रूटीन अपनाया. वह सुबह जल्दी उठते और अपना धैर्य बनाए रखने के लिए प्राणायाम और मेडिटेशन करते. राजपाल के अनुसार, मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखना सबसे बड़ी जीत है. उन्होंने अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने को इमोशनल बताया और कहा कि मुश्किल समय के बाद अपनों से घिरा होना उनके लिए बहुत बड़ी राहत थी.
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