Zakir Khan Birthday Special: ज़ाकिर इंदौर में बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रहे थे, जब उन्होंने रेडियो प्रोड्यूसर बनने का फैसला किया. बहुत कम लोग जानते हैं कि वे कॉलेज ड्रॉपआउट हैं.
कैसे जाकिर खान बन गए देश के नंबर- 1 कॉमेडियन?
Zakir Khan Birthday Special: जाकिर खान आज सिर्फ स्टैंडअप कॉमेडी का बड़ा नाम नहीं हैं, बल्कि अपनी शायरी, कविताओं और जिंदगी से जुड़े किस्सों के जरिए करोड़ों दिलों में खास जगह बना चुके हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंदौर के एक संगीत परिवार में 20 अगस्त 1987 को जन्मे इस लड़के की जिंदगी का रास्ता संगीत से निकलकर कॉमेडी के मंच तक पहुंचा? दादा सारंगी वादक और पिता म्यूजिक टीचर थे, ऐसे में परिवार की संगीत विरासत को आगे बढ़ाना उनकी पहली मंजिल माना जा रहा था. मगर किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही कहानी लिख रखी थी. नौकरी, रेडियो और कॉपीराइटिंग से होते हुए जाकिर खान ने स्टैंडअप कॉमेडी की दुनिया में ऐसा मुकाम बनाया, जहां उनकी हंसी के साथ-साथ उनकी शायरी भी लोगों के दिलों में उतर गई.
ज़ाकिर खान को सितार बजाने से ज़्यादा जोक्स लिखना और लोगों को हंसाना पसंद था. उनका ह्यूमर ज़बरदस्त था, और वे अपने आस-पास की चीज़ों को आसानी से ऐसे जोक्स से जोड़ लेते थे जिनसे सबका मनोरंजन होता था और वे उनकी तारीफ करते थे. शायद यहीं उन्हें एहसास हुआ कि वे इस फील्ड में अच्छा कर सकते हैं, लेकिन यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने इसमें करियर बनाने के बारे में सोचा था. उनका सपना कुछ और था.
ज़ाकिर इंदौर में बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रहे थे, जब उन्होंने रेडियो प्रोड्यूसर बनने का फैसला किया. बहुत कम लोग जानते हैं कि वे कॉलेज ड्रॉपआउट हैं. पढ़ाई छोड़ने के बाद, वे रेडियो मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चले गए. इसके बाद, वे इंटर्नशिप के लिए जयपुर चले गए. एक समय ऐसा आया जब वे इतने पैसे के तंगी में थे कि उनके मकान मालिक ने उनका किराया माफ़ कर दिया और उन्हें घर लौटने के लिए पैसे दिए.
पैसे की तंगी उनके सपनों और स्ट्रगल को रोक नहीं पाई. वे दिल्ली लौट आए और अपने खर्चे चलाने के लिए फ्रीलांसिंग शुरू कर दी. उन्होंने फिर से जोक्स पर फोकस करना शुरू कर दिया, थिएटर किया, और घोस्टराइटिंग भी की. एक दोस्त ने उन्हें ओपन माइक ट्राई करने का सुझाव दिया, और शायद वहीं से उन्हें अपनी किस्मत का रास्ता मिला.
ज़ाकिर खान का यह पहला शो था, और उन्हें 90 सेकंड में स्टेज से उतार दिया गया. इसके अलावा, उनके लुक्स पर कमेंट्स किए गए, और मज़ाक करने वाले एक इंसान का भी मज़ाक उड़ाया गया. लेकिन योद्धा वह होता है जो कभी हार नहीं मानता; जीत और हार तो होनी ही है. ज़ाकिर ने इस नेगेटिविटी को अपनी सफलता की सीढ़ी बनाने का फैसला किया. उनकी लगातार कोशिशों ने उन्हें काम और पॉपुलैरिटी दोनों दिलाई. वह पूरी दिल्ली में मशहूर हो गए, जिसके बाद वह मुंबई लौट आए और तन्मय भट्ट के ‘ऑन एयर विद AIB’ के लिए जोक्स लिखने लगे. उस पल से, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
आज, उनका करियर USA के न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन तक पहुँच गया है. “सख्त लौंडा” के नाम से मशहूर ज़ाकिर अब एक ग्लोबल स्टार हैं. उनका सफ़र और उनकी कोशिशें (ज़ाकिर खान स्ट्रगल) दिखाती हैं कि बड़े सपने देखो और उसे पाने के बारे में सोचो. हां रास्ते में इम्तिहान तो आएंगे ही, लेकिन जो लोग नेगेटिविटी को खुद पर हावी नहीं होने देते वे जरूर अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे और अपना नाम बनाएंगे.
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