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Wet and Wild: क्या है वेटलैंड एरिया जिसे इंसानों ने किया दरकिनार, खूबसूरत जीवों और पर्यावरण के लिए यह क्यों है जरूरी?

Wet and Wild: अगर वेटलैंड्स खत्म होते गए तो जैव विविधता पर संकट छा जाएगा. आज इन्हें विकास के नाम पर खत्म किया गया. जनसंख्या भी एक कारण है. यह खूबसूरत और लोगों के लिए वाकई में बहुत जरूरी हैं.

Wet and Wild: संसार में कई तरह के जीव-जंतु हैं. जब आप किसी नेचुरल और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की तरफ जाते हैं तो वहां एक अलग ही तरह की वाइव मिलती है. वेटलैंड्स ऐसे इलाके होते हैं जहां साल के कुछ या पूरे समय मिट्टी की सतह पर या उसके पास पानी मौजूद रहता है. सच में जंगली जीवों की जगह काफी अलग होती है. नम मिट्टी में माइक्रोऑर्गेनिज्म का पनपना, ड्रैगनफ्लाई कीचड़ के ऊपर उड़ना, सैलामैंडर और मेंढक मांसाहारी पौधों के बीच छिपना और बगुले और बीवर पानी में घूमते हुए नजर आते हैं. वे दुनिया के सबसे ज्यादा प्रोडक्टिव इकोसिस्टम में से भी हैं. वेटलैंड्स असल में “बायोलॉजिकल सुपरमार्केट” हैं जो बहुत ज़्यादा मात्रा में खाना पैदा करते हैं और अनगिनत जानवरों की प्रजातियों को आकर्षित करते हैं और उन्हें बनाए रखते हैं.

वेटलैंड्स क्या हैं?

वेटलैंड्स का मतलब  नमभूमि या आद्रभूमि से होता है. मतलब वैसी जमीन जो पानी से सराबोर हो. आसान भाषा में समझे तो जमीन का वह हिस्सा जहां पानी और भूमि का मिलन हो उसे वेटलैंड कहते हैं. सालभर या साल के कुछ महीने यहां पानी भरा रहता है. इसमें दलदली भूमि, बाढ़ के मैदान, नदियां, झीलें, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियां और अन्य समुद्री क्षेत्र जो कि कम ज्वार पर 6 मीटर से अधिक गहरे न हो सब वेटलैंड्स की श्रेणी में आते हैं. साथ ही इंसानों द्वारा बनाए तालाब या अपशिष्ट-जल को उपचारित करने वाले तालाब या जलाशय भी इसी श्रेणी में आते हैं. वेटलैंड्स की जैविक संरचना में पानी में रहने वाली मछलियां, पानी के आसपास रहने वाले प्रवासी पक्षी सब शामिल हैं.

वेटलैंड्स क्यों ज़रूरी हैं?

बता दें कि मछली, मखाना और अन्य जलीय पौधों की खेती करने वाले लोगों का रोजगार इन वेटलैंड्स पर ही निर्भर होता है. वातावरण में कार्बन की मात्रा में कमी के लिए भी यह कारगार है. भारत में इस समय 42 वेटलैंड्स को रामसर कंन्वेशन के द्वारा रामसर साइट के तौर पर मान्यता मिली हुई है. इसका कुल क्षेत्रफल तकरीबन 10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है. बता दें कि 75% वन्यजीव अपने जीवन में किसी न किसी समय वेटलैंड्स पर निर्भर रहते हैं. इलिनोइस में खतरे में पड़ी और लुप्तप्राय 40% पौधे और जानवर वेटलैंड हैबिटेट पर निर्भर हैं.

इंडियाना में अलग-थलग वेटलैंड्स में संघीय रूप से लुप्तप्राय मिशेल की सैटायर तितली पाई जाती है, जो सिर्फ़ दो राज्यों में मिलती है. वेटलैंड्स जलवायु परिवर्तन से लड़ने और उसके अनुकूल होने के लिए भी अहम हैं. वे दुनिया की मिट्टी के कार्बन की महत्वपूर्ण मात्रा को जमा करते हैं. बाढ़ को कम करने के लिए पानी का भंडारण करते हैं, पानी को साफ रखने के लिए उसमें से प्रदूषकों को फिल्टर करते हैं, सूखे वाले इलाकों में गीली परिस्थितियों की ज़रूरत वाली प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित जगह प्रदान करते हैं और भी बहुत कुछ प्रक्रियाएं यहां चलती रहती हैं.

खतरे में पर्यावरण

जीवन की विविधता का समर्थन करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में अपनी बड़ी भूमिका के बावजूद वेटलैंड्स खतरे में हैं. वेटलैंड्स को खेती या विकास के लिए खत्म किया गया. कहीं से इन्हें भरकर रास्ता बनाया गया. तो खेती के लिए इन्हें खत्म किया गया. शहरीकरण और तेजी से बढ़ती जनसंख्या भी इसकी एक वजह है. 

जीवों के लिए जरूरी है जंगल

हमारे एमिकॉन प्रिजर्व में बैकवाटर दलदल, धाराओं और झीलों को जोड़ने सहित हैबिटेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के हमारे प्रयास इसे मिडवेस्ट में सबसे बड़ा बाढ़ के मैदान को बहाल करने वाला प्रोजेक्ट बनाते हैं. एमिकॉन सैकड़ों-हजारों प्रवासी और निवासी पक्षियों का घर है, जिसमें अमेरिकी गंजे बाज और सफेद पेलिकन शामिल हैं साथ ही नदी ऊदबिलाव, मस्कराट और बीवर जैसे स्तनधारी भी हैं. वेटलैंड्स पानी और मिट्टी को साफ करते हैं. यह भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं और जैव विविधता को सहारा देते हैं. 

भारत की स्थिति पर नजर

भारत में वन्यजीवों और वेटलैंड्स जलीय पारिस्थितिक तंत्र के महत्व को दर्शाता है. यह पारिस्थितिक संतुलन, जैव विविधता, साफ पानी और मिट्टी संरक्षण के लिए काफी अहम है. सरकार ने इसके संरक्षण के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट टाइगर और वेटलैंड्स संरक्षण नियम जैसे कानून व कार्यक्रम चलाए. हालांकि, पॉल्यूशन, जलवायु परिवर्तन और अतिक्रमण जैसे खतरे आज भी बने हुए हैं. जलवायु परिवर्तन इनमें से एक बड़ा खतरा बना हुआ है.

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