M1 Coach In Indian Railway: भारतीय रेलवे में ट्रेन के हर कोच पर अलग-अलग कोड लिखे होते हैं जैसे S1, B1, A1, D1 आदि. इन्हीं कोड्स में से एक है M1, M2 या M3. कई यात्री इसे देखकर थर्ड एसी समझ लेते हैं या कुछ और. इसी कन्फ्यूजन में कई बार लोग गलत डिब्बे में चढ़ जाते हैं.
ट्रेन में M1 कोच का क्या है मतलब
M1 Coach In Indian Railway: भारतीय रेलवे में ट्रेन के हर कोच पर अलग-अलग कोड लिखे होते हैं जैसे S1, B1, A1, D1 आदि. इन कोड्स के आशय को लेकर अक्सर लोग कंफ्यूज होते रहते हैं.
ये कोड टिकट चेक करने, कोच ढूंढ़ने और सुविधाओं का अंदाजा लगाने में बहुत मदद करते हैं. इन्हीं कोड्स में से एक है M1, M2 या M3. कई यात्री इसे देखकर थर्ड एसी समझ लेते हैं या कुछ और. इसी कन्फ्यूजन में कई बार लोग गलत डिब्बे में चढ़ जाते हैं जिससे उनका नुकसान हो जाता है फिर वे पछताते हैं.
M1 कोच भारतीय रेलवे का एक स्मार्ट प्रयोग है जो पुराने थर्ड AC कोचों को नए रूप में पेश करता है. वास्तव में M1 का मतलब मॉडिफाइड थर्ड AC या AC 3-टियर इकोनॉमी होता है. रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती संख्या और AC कोचों की कमी को देखते हुए 2021 के आसपास यह नया कोच शुरू किया. पुराने थर्ड AC कोच को थोड़े बदलाव के साथ नॉन-AC स्लीपर कोच में कन्वर्ट कर दिया गया. M1, M2, M3 जैसे कोड इन्हें अलग पहचान देते हैं.
तीसरे AC कोच से M1 का सबसे बड़ा अंतर एयर कंडीशनिंग का है. तीसरी AC में फुल AC सुविधा मिलती है, जबकि M1 कोच में केवल पंखे, बेहतर वेंटिलेशन और LED लाइटिंग होती है. M1 कोच में 72 से 83 बर्थ तक होती हैं, जो सामान्य स्लीपर कोच से ज्यादा आरामदायक हैं. इसमें बायो-टॉयलेट, चार्जिंग पॉइंट और आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम भी लगे होते हैं. वहीं इसका किराया थर्ड AC की तुलना में 6-8% कम होता है, जिससे कम बजट वाले यात्रियों को फायदा मिलता है. रेलवे ने M1 कोच इसलिए बनाए ताकि पुराने कोचों का अधिकतम उपयोग हो और यात्रियों को किफायती स्लीपर जैसी सुविधा मिले. लंबी दूरी की ट्रेनों जैसे राजधानी, दुरंतो या अन्य एक्सप्रेस ट्रेन में ये कोच आम हैं.
रेलवे का यह कदम यात्रा को सुलभ बनाने की दिशा में सराहनीय है. M1 कोच स्लीपर क्लास से बेहतर लेकिन AC से सस्ता विकल्प है. यात्रियों को सलाह है कि टिकट बुक करते समय कोच कोड ध्यान से देखें. M1 कोच नॉन-AC स्लीपर कोच होता है.
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