सर्दी या बदलते मौसम में अक्सर लोग दिन की शुरुआत 1 गिलास पानी के साथ करते हैं. विद्वानों बताते हैं कि, रोज सुबह खाली पेट ताजा पानी पीने से वजन घटाने से लेकर किडनी और लिवर से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती हैं. हालांकि, पानी के तापमान में मौसम के अनुसार बदलाव जरूरी है. अब सवाल है कि आखिर बदलते मौसम में कितना गर्म पानी पीना चाहिए? इस बारे में बता रही हैं आयुर्वेदाचार्य डॉ. शची श्रीवास्तव-
डॉक्टर से जानिए, बदलते मौसम में कैसा पानी पीना चाहिए. (Canva)
Lukewarm Water in Morning: फरवरी के अंत में ठंड की विदाई और गर्मी की शुरुआत होने लगी है. यानी मौसम में तेजी से बदलाव का क्रम जारी है. यह मौसम सेहत के लिहाज से बिलकुल ठीक नहीं माना जाता है. क्योंकि, यह वो समय होता है जब लोग सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं. विज्ञान कहता है कि मौसम परिवर्तन के साथ ही हमारे शरीर की जरूरतों में भी बदलाव आता है. इन्हीं जरूरतों के मुताबिक हम खानपान करते हैं. गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए ठंडी चीजें खाते हैं, सर्दियों में बॉडी को गर्म रखने के लिए गर्म चीजें खाते हैं. लेकिन, बदलते मौसम में दोनों का लेवल बनाकर रखना पड़ता है.
सर्दी या बदलते मौसम में अक्सर लोग दिन की शुरुआत 1 गिलास पानी के साथ करते हैं. विद्वानों बताते हैं कि, रोज सुबह खाली पेट ताजा पानी पीने से वजन घटाने से लेकर किडनी और लिवर से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती हैं. हालांकि, पानी के तापमान में मौसम के अनुसार बदलाव जरूरी है. अब सवाल है कि आखिर बदलते मौसम में कितना गर्म पानी पीना चाहिए? हमारे शरीर के लिए पानी का कितना तापमान सही? बदलते मौसम में ठंडा पानी पीने नुकसान और नियम क्या हैं? इस बारे में India News को बता रही हैं राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय लखनऊ की डॉ. शची श्रीवास्तव-
एक्सपर्ट के मुताबिक, बदलते मौसम में इंसान को शारीरिक दोष के हिसाब से सुबह के समय गुनगुना पानी पीना चाहिए. क्योंकि, जिस तरह ठंडा पानी नुकसानदेय हो सकता है, उसी तरह अधिक गर्म पानी भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. बता दें कि, गुनगुने पानी का तापमान 36.5°C से 40.5°C (98°F से 105°F) तक सामान्य माना जाता है.
एक्सपर्ट बताती हैं कि, सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है. इससे आपको नुकसान हो सकता है. इसलिए कोशिश करें कि गुनगुने पानी में थोड़ा सा घी या नींबू मिक्स कर लें. वहीं, यदि आप ट्रैवल कर रहे हैं, तो ऐसे में सादा पानी का भी सेवन किया जा सकता है.
कफ दोष: यदि आप कफ की परेशानी झेल रहे हैं, तो आपको ऐसा पानी पीना चाहिए, जो न ज्यादा गर्म हो और न ही ज्यादा ठंडा. सीमित तापमान का गुनगुना पानी चुस्की की तरह सेवन करना चाहिए. बता दें कि, गुनगुना पानी पीने से शरीर से टॉक्सिक बाहर होता है और आपको परेशानी से आराम मिलता है.
पित्त दोष: बदलते मौसम में पित्त दोष बढ़ने पर पेट और सीने में जलन महसूस होना, अपच, कब्ज और एसिडिटी की समस्या, नींद न आना और त्वचा पर दाने निकलना जैसी तमाम परेशानियां हो सकती हैं. इससे निजात पाने के लिए पानी को शरीर के तापमान तक ठंडा करने की आवश्यकता होती है.
वात दोष: मौसम का बदलाव और सुबह-शाम का सर्द तापमान वात दोष को बढ़ावा देता है. इसलिए वात दोष की स्थिति में अधिक गर्म और अधिक ठंडे पानी से परहेज करना चाहिए. हालांकि, कोशिश करें कि इस स्थिति में गुनगुना पानी ही पिएं.
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