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SNORING CAUSES: सोते समय खर्राटे आना आजकल आम समस्या बन गई है, लेकिन इसे हल्के में लेना ठीक नहीं है. खर्राटे तब आते हैं जब सोते समय सांस लेने के रास्ते में रुकावट हो जाती है. इससे हवा का प्रवाह सही नहीं हो पाता और गले व नाक के ऊतकों में कंपन होता है. डॉक्टरों के अनुसार, खर्राटे मोटापा, गलत लाइफस्टाइल, नाक या गले में रुकावट, टॉन्सिल, साइनस और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का संकेत हो सकते हैं.
SNORING CAUSES
SNORING CAUSES: आजकल सोते समय खर्राटे लेना आम हो गया है, लेकिन इसे हल्के में लेना सही नहीं है. खर्राटों की वजह से हार्ट अटैक, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. आपने भी अपने आसपास ऐसे लोगों को जरूर देखा होगा जो नींद में तेज आवाज में खर्राटे लेते हैं.
खर्राटे लेने वाला व्यक्ति भले ही आराम से सो रहा हो, लेकिन उसके साथ सोने वाले पार्टनर या बच्चों की नींद खराब हो जाती है. कई बार तो खुद व्यक्ति की नींद भी अपने ही खर्राटों की वजह से टूट जाती है.
डॉक्टरों के अनुसार, खर्राटे तब आते हैं जब सोते समय सांस लेने के रास्ते में रुकावट पैदा हो जाती है. जब हवा ठीक से अंदर-बाहर नहीं जा पाती, तो गले और नाक के ऊतकों में कंपन होता है और खर्राटों की आवाज आती है.यह रुकावट कई कारणों से हो सकती है, जैसे गले के ऊतक मोटे होना, जीभ का पीछे की ओर जाना या नाक में ब्लॉकेज होना. अब सिविल अस्पताल और बड़े मेडिकल कॉलेजों में खर्राटों की समस्या लेकर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं.
खर्राटे आना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति की लाइफस्टाइल सही नहीं है. ज्यादा वजन, गलत दिनचर्या और सांस लेने में रुकावट इसकी बड़ी वजह हो सकती है.
उन्होंने बताया कि जिन लोगों को खर्राटे आते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा ज्यादा रहता है. कुछ मामलों में यह स्लीप एपनिया की वजह से भी होता है, जिसमें सोते समय कुछ सेकंड के लिए सांस रुक जाती है.
पहले यह समस्या ज्यादा बुजुर्ग पुरुषों में देखी जाती थी, लेकिन अब हर उम्र के लोग खर्राटों से परेशान हैं. महिलाओं में मेनोपॉज के बाद यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है.
डॉक्टरों के मुताबिक, खर्राटों के इलाज के लिए सबसे अच्छा तरीका CPAP मशीन है. यह मशीन सोते समय सांस लेने के रास्ते को खुला रखती है, जिससे खर्राटे कम होते हैं.केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज उपलब्ध है. इलाज ज्यादा महंगा नहीं होता और कई सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त भी हो सकता है.
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