Cicada New Covid 19 Variant: हर बार की तरह इस बार भी कोरोना नया रूप लेकर आया है और ये है बीए.3.2 वेरिएंट, जिसे सिकाडा नाम दिया गया है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, यह सिकाडा वेरिएंट अमेरिका के कई राज्यों सहित दुनिया के 22 देशों में फैल चुका है और लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या है सिकाडा वायरस-
जानिए, कोरोना का नया वेरिएंट 'सिकाडा' कितना खतरनाक. (Canva)
Cicada New Covid 19 Variant: साल 2020 में फैल चुके कोरोना वायरस को अभी हम भूले नहीं हैं. इस वायरस ने कैसे दुनियाभर में तूफान ला दिया था. इसके बाद से कोरोना नए-नए वेरिएंट में आकर लोगों को डरा रहा है. पिछले दिनों आए ओमिक्रोन के बाद कोरोना के नए वेरिएंट ने एक बार फिर लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. हर बार की तरह इस बार भी कोरोना नया रूप लेकर आया है और ये है बीए.3.2 वेरिएंट, जिसे सिकाडा नाम दिया गया है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, यह सिकाडा वेरिएंट अमेरिका के कई राज्यों सहित दुनिया के 22 देशों में फैल चुका है और लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वेरिएंट पिछले वेरिएंट्स की तुलना में काफी अलग है. इसके म्यूटेशन की संख्या नॉर्मल से ज्यादा है.
बता दें कि, ओमिक्रोन परिवार से आने वाला यह नया वेरिएंट ‘सिकाडा’ दुनिया के लिए बिल्कुल नया नहीं है. बल्कि, यह 2024 के अंत में सबसे पहले साउथ अफ्रीका में मिला था. तभी से दुनिया भर के वैज्ञानिक और ग्लोबल हेल्थ एजेंसियां लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं. इस वेरिएंट के अब दक्षिण अफ्रीका से निकलकर बाकी यूरोपियन देशों, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में फैलने के बाद यह एक बार फिर चर्चा में आ गया है. लिहाजा यह सवाल लाजिमी है कि क्या भारत में भी यह वायरस एंट्री कर चुका है? यह वेरिएंट कोविड के पुराने वेरिएंट या सब-वेरिएंट्स से कितना खतरनाक है? क्या इस वेरिएंट पर वैक्सीन काम नहीं कर पाएगी?
अमेरिका की वेबसाइट Gizmodo के मुताबिक, BA.3.2 यानी सिकाडा वैरिएं ओमिक्रॉन फैमिली का एक नया सब-वैरिएंट है जिसे सबसे पहले नवंबर 2024 में साउथ अफ्रीका में एक रेस्पिरेटरी सैंपल में पहचाना गया था. तभी से दुनिया भर के वैज्ञानिक और ग्लोबल हेल्थ एजेंसियां लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं. बाद में यह 2025 के दौरान अलग-अलग महाद्वीपों में फैला. इसमें 70-75 जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं जो इसे बाकी स्ट्रेन्स से काफी अलग बनाते हैं. इस वेरिएंट के अब दक्षिण अफ्रीका से निकलकर बाकी यूरोपियन देशों, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में फैलने के बाद यह एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
सिकाडा वैरिएंट में 70-75 जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे पिछले ‘JN.1’ वैरिएंट से काफी अलग बनाते हैं. यही कारण है कि वैज्ञानिक इसकी निगरानी कर रहे हैं. CDC की रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 22-23 देशों और अमेरिका के लगभग आधे राज्यों में मिल चुका है. इंडिपेंडेंट ने सीडीएस रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 3 हवाई जहाज के अपशिष्ट जल के नमूनों और 20 से अधिक राज्यों से लिए गए 132 अपशिष्ट जल के नमूनों में भी इसका पता चला है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे फिलहाल निगरानी के घेरे में रहने वाला वैरिएंट (Variant Under Monitoring) की कैटेगरी में रखा है यानी इस पर कड़ी नजर रखी जा रही है लेकिन इसे अभी तक चिंता का विषय बनने वाला वैरिएंट (Variant of Concern) घोषित नहीं किया गया है.
सिकाडा वैरिएंट के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही हैं लेकिन यह शरीर को बहुत जल्दी थका देता है. मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, गले में खराश, लगातार खांसी और शरीर में तेज दर्द शामिल है. कुछ मरीजों में सांस लेने में दिक्कत और स्वाद-गंध जाने की समस्या भी दोबारा देखी जा रही है.
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. महेश चंद्र मिश्र News18 को बताते हैं कि कोरोना के नए वेरिएंट के आने का मतलब ये नहीं है कि महामारी वापस आ रही है. कोरोना वायरस है और वायरस के म्यूटेशन में बदलाव होता रहता है. इसी तरह कोरोना भी अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए रूप बदलता रहता है. इसलिए सावधान रहें. लोग कोशिश करें कि कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को अपनाते रहें और हाथों को साबुन से बार-बार धोने, ज्यादा भीड़भाड़ में न जाने और खुद का बचाव करने के प्रयासों को करते रहें.
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