first sign of diabetic retinopathy: दुनियाभर में डायबिटीज या मधुमेह पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि, हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर के कई अंग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. आमतौर पर लोगों को लगता है कि डायबिटीज से सबसे ज्यादा नुकसान हार्ट और किडनी को ही होता है. लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट कहते है कि इसका बड़ा प्रभाव आंखों पर भी पड़ता है. डॉ. मयंक जैन से जानिए आखिर क्या है यह बीमारी और बचाव क्या है.
आंखों के लिए घातक है यह बीमारी. (Canva)
first sign of diabetic retinopathy: दुनियाभर में डायबिटीज या मधुमेह पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. लेकिन, भारत में यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. एक आंकड़ों के मुताबिक, 17 फीसदी डायबिटिक मरीजों के साथ इस रोग में भारत पहले नंबर पर है. इसीलिए भारत को डायबिटीज की राजधानी कहा जाता है. यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि, हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर के कई अंग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. आमतौर पर लोगों को लगता है कि डायबिटीज से सबसे ज्यादा नुकसान हार्ट और किडनी को ही होता है. लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट कहते है कि इसका बड़ा प्रभाव आंखों पर भी पड़ता है. इस बीमारी को डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) कहा जाता है, जो शुगर के मरीजों की आंखों की रोशनी खत्म करके उन्हें अंधा बना रही है.
नेशनल डायबिटिक रेटिनोपैथी सर्वे इंडिया 2015-2019 की समरी रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में डायबिटीज (Diabetes) से पीड़ित 50 साल से ऊपर का हर छठा मरीज आंखों की गंभीर बीमारी डायबिटिक रेटिनोपैथी से भी जूझ रहा है. अब सवाल है कि आखिर डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या है? यह बीमारी बन रही गंभीर? डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचाव कैसे संभव? आइए जानते हैं इस बारे में-
मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. मयूर जैन कहते हैं, ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) डायबिटीज के मरीजों की आंखों में होने वाली बीमारी है. इसमें आंख के पिछले हिस्से में स्थित रेटिना में ब्लड वेसेल्स क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, सूजन या धब्बे आ जाते हैं और आंखों की रोशनी या धुंधली होने लगती है. यह बीमारी आंखों को पूरी तरह अंधा भी कर देती है. हालांकि मरीजों को इसकी जानकारी आसानी से नहीं हो पाती. वे इसे सामान्य आई साइट की दिक्कतें समझकर छोड़ देते हैं और आखों की जांच ही नहीं कराते. ऐसे में ब्लड शुगर कंट्रोल न होने पर यह बीमारी आंखों की रोशनी खत्म होने का कारण बन जाती है.’
डायबिटिक रेटिनोपैथी बेहद गंभीर बीमारी है. डॉक्टर कहते हैं कि, देश में डायबिटीज से जूझ रहे 90 फीसदी लोग आंखों की जांच ही नहीं कराते है. इसके चलते आंखों की इस बीमारी का पता नहीं चल पाता है और बीमारी गंभीर होती जाती है. बता दें कि, देश में डायबिटीज से ग्रस्त 50 साल से ऊपर ज्यादातर लोग ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए गोलियों पर निर्भर हैं. वहीं, कुछ लोग दवाओं के साथ या दवा से अलग इंसुलिन ले रहे हैं. हालांकि, एक बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ डाइट पर निर्भर हैं.
डॉ. जैन कहते हैं कि डायबिटीज से पीड़ितों का ग्लाइसेमिक कंट्रोल खराब पाया गया है, यानी कि वे ब्लड शुगर (Blood Sugar) को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं. जबकि सिर्फ 40 फीसदी लोग ही दवा या किसी अन्य तरीके से शुगर को ठीक से कंट्रोल कर पा रहे हैं. ऐसे में डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचाव के लिए डायबिटीज को कंट्रोल करने के साथ ही साल में एक बार आंखों की जांच बेहद जरूरी है. आंख में कोई परेशानी नहीं है फिर भी डायबिटीज के मरीजों को आंखों की जांच कराते रहना चाहिए ताकि रोग का जल्दी पता चल सके और उसका सही समय पर इलाज हो सके.
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