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देशभर में गर्मी का कहर जारी! कई राज्यों में स्कूल बंद, बच्चों की सुरक्षा के लिए जान लें जरूरी बातें

Heatwave Alert: कई राज्यों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से हालात चिंताजनक हो गए हैं. भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखने को मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के साथ सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि जरा सी लापरवाही बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है. अब सवाल है कि आखिर, गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

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Last Updated: April 26, 2026 11:39:57 IST

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Heatwave Alert: देशभर में गर्मी अपने पूरे सुरूर में है. कई राज्यों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से हालात चिंताजनक हो गए हैं. भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखने को मिलता है. चटख धूप और लू के कारण बच्चों की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है, जिसे देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में है. कई राज्यों में स्कूलों का समय बदल गया है तो कहीं छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं. इसका मकसद है बच्चों को दोपहर की तेज गर्मी से बचाना. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के साथ सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि जरा सी लापरवाही बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है. ऐसे में पैरेंट्स और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और जरूरी कदम उठाएं. अब सवाल है कि आखिर, गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए किन बातों का ध्यान रखें? आइए जानते हैं इस बारे में-

कई राज्यों में स्कूल बंद

मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भीषण गर्मी को देखते हुए झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्रशासन ने तेजी से कदम उठाए हैं. झारखंड में स्कूल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं, जबकि ओडिशा में रेड अलर्ट के चलते कई जिलों में छुट्टियां बढ़ाई गई हैं. छत्तीसगढ़ में गर्मी से बचाव के लिए समर वेकेशन पहले ही शुरू कर दी गई. कुछ जगहों पर स्कूल का समय घटाकर सुबह तक सीमित कर दिया गया है. 

गर्मी में बच्चों को ज्यादा खतरा क्यों?

बच्चे गर्मी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. उनका शरीर जल्दी गर्म हो जाता है, उन्हें पसीना कम आता है. ऐसी स्थिति वे डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत पहचान नहीं पाते हैं. यह छोटी सी लापरवाही हीट स्ट्रोक, थकावट और पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की घटनाएं बढ़ रही हैं. यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा बनती जा रही है.

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर बच्चे में ज्यादा पसीना, चक्कर, सिरदर्द, उल्टी, तेज दिल की धड़कन या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हो जाएं. ऐसे में शरीर को ठंडा रखना और पानी देना बेहद जरूरी है.

बच्चों को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

बच्चों को बार-बार पानी, नारियल पानी या ORS दें. दोपहर 11 बजे से 4 बजे तक बाहर खेलने से रोकें. हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनाएं. घर को ठंडा रखने के लिए पंखा, कूलर या AC का इस्तेमाल करें. इसके अलावा, तरबूज, खीरा और छाछ जैसे पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ खिलाएं.

स्कूलों में अपनाए जा रहे उपाय

कई स्कूल अब सुबह जल्दी क्लास ले रहे हैं, बीच-बीच में पानी पीने के लिए ब्रेक दे रहे हैं और समय कम कर रहे हैं. जरूरत पड़ने पर स्कूल बंद भी किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों को तेज धूप से बचाया जा सके.

गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या करें?

  • बच्चों को दोपहर में घर के अंदर रखें.
  • उन्हें पर्याप्त पानी पिलाएं.
  • मौसम की जानकारी लेते रहें.
  • स्कूल के निर्देशों का पालन करें.

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Last Updated: April 26, 2026 11:39:57 IST

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Heatwave Alert: देशभर में गर्मी अपने पूरे सुरूर में है. कई राज्यों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से हालात चिंताजनक हो गए हैं. भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखने को मिलता है. चटख धूप और लू के कारण बच्चों की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है, जिसे देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में है. कई राज्यों में स्कूलों का समय बदल गया है तो कहीं छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं. इसका मकसद है बच्चों को दोपहर की तेज गर्मी से बचाना. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के साथ सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि जरा सी लापरवाही बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है. ऐसे में पैरेंट्स और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और जरूरी कदम उठाएं. अब सवाल है कि आखिर, गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए किन बातों का ध्यान रखें? आइए जानते हैं इस बारे में-

कई राज्यों में स्कूल बंद

मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भीषण गर्मी को देखते हुए झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्रशासन ने तेजी से कदम उठाए हैं. झारखंड में स्कूल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं, जबकि ओडिशा में रेड अलर्ट के चलते कई जिलों में छुट्टियां बढ़ाई गई हैं. छत्तीसगढ़ में गर्मी से बचाव के लिए समर वेकेशन पहले ही शुरू कर दी गई. कुछ जगहों पर स्कूल का समय घटाकर सुबह तक सीमित कर दिया गया है. 

गर्मी में बच्चों को ज्यादा खतरा क्यों?

बच्चे गर्मी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. उनका शरीर जल्दी गर्म हो जाता है, उन्हें पसीना कम आता है. ऐसी स्थिति वे डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत पहचान नहीं पाते हैं. यह छोटी सी लापरवाही हीट स्ट्रोक, थकावट और पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की घटनाएं बढ़ रही हैं. यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा बनती जा रही है.

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर बच्चे में ज्यादा पसीना, चक्कर, सिरदर्द, उल्टी, तेज दिल की धड़कन या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हो जाएं. ऐसे में शरीर को ठंडा रखना और पानी देना बेहद जरूरी है.

बच्चों को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

बच्चों को बार-बार पानी, नारियल पानी या ORS दें. दोपहर 11 बजे से 4 बजे तक बाहर खेलने से रोकें. हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनाएं. घर को ठंडा रखने के लिए पंखा, कूलर या AC का इस्तेमाल करें. इसके अलावा, तरबूज, खीरा और छाछ जैसे पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ खिलाएं.

स्कूलों में अपनाए जा रहे उपाय

कई स्कूल अब सुबह जल्दी क्लास ले रहे हैं, बीच-बीच में पानी पीने के लिए ब्रेक दे रहे हैं और समय कम कर रहे हैं. जरूरत पड़ने पर स्कूल बंद भी किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों को तेज धूप से बचाया जा सके.

गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या करें?

  • बच्चों को दोपहर में घर के अंदर रखें.
  • उन्हें पर्याप्त पानी पिलाएं.
  • मौसम की जानकारी लेते रहें.
  • स्कूल के निर्देशों का पालन करें.

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