वो कहते हैं न कि प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है. और दिल टूटने पर यह कहके टाल देते हैं कि शायद यही भगवान की मर्जी थी. लेकिन ये बात पूरी तरह से सच नहीं है. असल में दिलों के टूटने और जुड़ने के पीछे भगवान को कसूरवार ठहराना छोड़िए, क्योंकि ये असल में केमिकल लोचा है. समझिए प्यार को साइंस की नजर से-
'जोड़ियां भगवान बनाते है'...कहने वाले जरूर जान लें इस कैमिकल का नाम, दिल तोड़ने-जोड़ने के लिए यही है 'कसूरवार'
वो कहते हैं न कि प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है. और दिल टूटने पर यह कहके टाल देते हैं कि शायद यही भगवान की मर्जी थी. लेकिन ये बात पूरी तरह से सच नहीं है. असल में दिलों के टूटने और जुड़ने के पीछे भगवान को कसूरवार ठहराना छोड़िए, क्योंकि ये असल में केमिकल लोचा है. पहली नजर में प्यार और दिलों के टूटने के पीछे आपसे डीएनए का बड़ा रोल है और इसमें तड़ता लगाने का काम करते हैं 3 केमिकल, समझिए प्यार को, साइंस की नजर से-
जो लोग कहते हैं कि प्यार पहली नजर का धोखा है, वो कहीं न कही सही हैं. इसके पीछे का लॉजिक फेमस क्रोएशियाई जेनिटिसिस्ट तमारा ब्राउन ने बाताय है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे डीएनए में मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन नाम का एक पार्ट है, जो पहली नजर में सच्चा प्यार ढूंढने का काम करता है. इसी की वजह से हमारी बॉडी अलग तरह की एनर्जी रिलीज करती है. इसी एनर्जी की वजह से हम किसी को पसंद और ना पसंद करते हैं.
अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि प्यार में पड़ते ही इंसान के हार भाव बदल गए. प्यार में पड़े लोगों ने ये अनुभव भी किया होगा कि उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ में कई तरह के चेंजेस आते हैं. ऐसा नोराड्रेनालाइन, डोपामाइन और फेनएथलामिन के कारण होता है.
आपके दिमाग में लव फीलिंग्स जनरेट करने के लिए नोराड्रेनालाइन नाम का केमिकल जिम्मेदार है, जो आपको प्यार करने के लिए उकसाता है.
जैसे प्यार का क्रेडिट कुछ खास केमिकल्स और हार्मोन्स को जाता है, इसी तरह दिल टूटने या ब्रेकअप के लिए भी हार्ट ब्रेक हार्मोन्स, कॉर्टीसोल, एड्रिनेलिन जैसे केमिकल जिम्मेदार होते हैं. इनके एक्टिव होते ही नोराएड्रिनेलिन, सिरोटोनिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हैप्पी हॉर्मोन्स तेजी से घटने लगते हैं और मन उदास हो जाता है.
इस मामले में इंग्लैंड की प्रसिद्ध डॉक्टर डेबोराह ली बताती है कि दिल टूटने पर सिर्फ दिमाग ही नहीं, आपकी बॉडी भी अलर्ट हो जाती है. फिर हैप्पी हार्मोन्स रिलीज नहीं हो पाते और स्ट्रैस हार्मोन्स जैसे कार्टीसोल की मात्रा बढ़ने लगती है, इसलिए आप कुछ वक्त के लिए दुखी, परेशान, गुस्सा, नाराजगी, चिड़चिड़े और अकेले हो जाते हैं.
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्टब्रेक के लिए भी कहीं न कहीं कार्टीसोल जिम्मेदार है. इसके जनरेट होने से हाई बल्ड प्रैशर, वेट गेन, बॉडी पेन, मुहांसे और दाने जैसी समस्याएं होने लगती है.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
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