Sickle Cell Disease: शरीर में एक ऐसी खून की बीमारी भी हो सकती है जो शुरुआत में आसानी से समझ में नहीं आती. इसमें लाल खून की कोशिकाएं अपनी सामान्य गोल बनावट छोड़कर टेढ़ी और सख्त हो जाती हैं. जब ऐसा होता है तो खून सही तरीके से नसों में नहीं बह पाता और शरीर को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिलती.इसे 'सिकल सेल' कहते हैं, आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.
जानिए सिकल सेल के कारण, लक्षण और आनुवंशिक खतरों के बारे में
Sickle Cell Causes: सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक यानी जन्म से जुड़ी खून की बीमारी है. इसमें लाल रक्त कोशिकाएं अपनी सामान्य गोल और लचीली बनावट खोकर ‘C’ आकार या दरांती (सिकल) जैसी बन जाती हैं. इसके कारण अचानक तेज दर्द, कमजोरी, खून की कमी और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. कई बार यह समस्या जन्म से ही होती है और परिवार से आगे बढ़ती है.
सामान्य लाल रक्त कोशिकाएं गोल और नरम होती हैं, इसलिए वे आसानी से नसों में घूमकर शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं. लेकिन सिकल सेल में ये कोशिकाएं सख्त और टेढ़ी हो जाती हैं. ये आपस में चिपक सकती हैं और खून की नसों में फंस सकती हैं. इससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती.इसी वजह से दर्द के दौरे, सूजन और कई बार जानलेवा जटिलताएं भी हो सकती हैं.
यह बीमारी HBB नाम के जीन में बदलाव के कारण होती है. यह जीन हीमोग्लोबिन बनाने का काम करता है. हीमोग्लोबिन खून में मौजूद वह हिस्सा है जो ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाता है.अगर किसी व्यक्ति को माता-पिता दोनों से बदला हुआ जीन मिलता है, तो उसे सिकल सेल रोग होता है.अगर केवल एक माता या पिता से बदला हुआ जीन मिला हो, तो उसे “सिकल सेल ट्रेट” कहते हैं. ऐसे लोगों में आमतौर पर गंभीर लक्षण नहीं होते, लेकिन वे यह जीन अपने बच्चों को दे सकते हैं.
सिकल सेल रोग के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग हो सकते हैं. कुछ में हल्के तो कुछ में गंभीर हो सकते हैं. आम लक्षण हैं:
सिकल सेल रोग के कई प्रकार होते हैं. सबसे आम और गंभीर रूप को सिकल सेल एनीमिया (HbSS) कहा जाता है. कुछ अन्य रूप हल्के या मध्यम लक्षण पैदा कर सकते हैं.
सबसे आम समस्या है दर्द के दौरे, जिन्हें सिकल सेल क्राइसिस कहा जाता है. यह तब होता है जब टेढ़ी कोशिकाएं नसों में फंसकर खून का बहाव रोक देती हैं.इसके अलावा हो सकते हैं:
सिकल सेल रोग गंभीर हो सकता है, लेकिन समय पर जांच, सही इलाज और देखभाल से इसे संभाला जा सकता है. अगर परिवार में यह बीमारी रही है, तो
जांच कराना बहुत जरूरी है.यह सिर्फ खून की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली स्थिति है, इसलिए जागरूक रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के लिए दी जा रही है. इंडिया न्यूज सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.
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