<

हर बच्चे पर थेरेपी का अलग असर, सही योजना के लिए मनोवैज्ञानिक आकलन ज़रूरी

इंदौर की बाल मनोवैज्ञानिक का कहना है कि थेरेपी तभी असरदार होती है जब वह बच्चे की ज़रूरत के अनुरूप हो इंदौर (मध्य प्रदेश) [भारत], 27 अक्टूबर: शुरुआती…

इंदौर की बाल मनोवैज्ञानिक का कहना है कि थेरेपी तभी असरदार होती है जब वह बच्चे की ज़रूरत के अनुरूप हो

इंदौर (मध्य प्रदेश) [भारत], 27 अक्टूबर: शुरुआती हस्तक्षेप पर हुए शोध की एक बात बार-बार सामने आती है : हर बच्चा एक ही उपचार पर एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देता। ‘पीडियाट्रिक्स’ पत्रिका (2011) की एक व्यवस्थित समीक्षा में पाया गया कि बच्चों के नतीजों में बड़ा अंतर होता है और पहले से यह बताना कठिन है कि किसे किस तरीक़े से ज़्यादा लाभ मिलेगा। माता-पिता यही अपने घर में देखते हैं: थेरेपी शुरू होती है, कुछ महीने बदलाव दिखता है, फिर प्रगति ठहर जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका उत्तर अक्सर थेरेपी से पहले की कड़ी में है, यानी संपूर्ण बाल मनोवैज्ञानिक आकलन, जो बताता है कि बच्चा क्या पहले से कर पाता है, असली कठिनाई कहाँ है और मदद कहाँ से शुरू हो।

इसका मतलब देरी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार ऑटिज़्म के संकेत बचपन में ही पहचाने जा सकते हैं, फिर भी पहचान अक्सर बहुत देर से होती है, जबकि समय पर मिली प्रमाण-आधारित शुरुआती मदद बच्चों के संवाद और सामाजिक व्यवहार को बेहतर कर सकती है। जल्दी सहायता और सही आकलन साथ-साथ चलते हैं।

ज़रूरत बड़ी है। 195 देशों को शामिल करने वाले ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिज़ीज़ अध्ययन 2016 (द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ, 2018) के अनुसार पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 5.29 करोड़ बच्चे, यानी करीब 8.4 प्रतिशत, किसी विकासात्मक अक्षमता से प्रभावित थे। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि 2021 में दुनिया में लगभग 127 में से एक व्यक्ति ऑटिज़्म से प्रभावित था। 53 अध्ययनों के वैश्विक विश्लेषण में 3 से 12 वर्ष के बच्चों में एडीएचडी 7.6 प्रतिशत मिला, और मानदंडों के आधार पर अनुमान लगभग 4 से 11 प्रतिशत तक रहे।

इसके साथ एक जटिलता भी है। एडीएचडी, सीखने की विशिष्ट कठिनाई, भाषा में देरी, चिंता और ऑटिज़्म एक-दूसरे जैसे दिख सकते हैं या साथ मौजूद हो सकते हैं, इसलिए बच्चे को एक से ज़्यादा तरह की मदद चाहिए हो सकती है, और उसका क्रम मायने रखता है। मानकीकृत परीक्षण बच्चे के प्रदर्शन की तुलना उसकी उम्र के बड़े समूहों से करते हैं, जिससे वास्तविक कठिनाई और सामान्य भिन्नता में फ़र्क़ दिखता है। वे एक आधार-रेखा भी बनाते हैं, जिससे आगे प्रगति नापी जा सकती है, और परिणाम बच्चे की भाषा, पढ़ाई और संस्कृति के संदर्भ में पढ़े जाते हैं।

इंदौर की क्लिनिकल एवं चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. विनी झारिया, जिन्हें 12 वर्ष से अधिक का अनुभव है, कहती हैं, “माता-पिता जल्दी मदद शुरू करके सही करते हैं। नतीजा तब बदलता है जब मदद बच्चे के अनुरूप हो। आकलन शोध को एक बच्चे की योजना में बदलता है, और इसके लिए इंतज़ार ज़रूरी नहीं। योजना का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन शुरू हो सकता है, जबकि सीधी थेरेपी आमने-सामने तय की जाती है।”

बच्चेwidth=

उनके अनुसार दुनिया भर से भारतीय मूल के अभिभावक, विशेषकर खाड़ी देशों और कनाडा से, ऑनलाइन असेसमेंट के लिए उनसे संपर्क करते हैं। उनकी प्रैक्टिस में कई बाल मनोवैज्ञानिक आकलन हो चुके हैं, जिनमें एडीएचडी असेसमेंट, आईक्यू और संज्ञानात्मक परीक्षण, एसएलडी और डिस्लेक्सिया आकलन, स्लो लर्नर आकलन, साइको-एजुकेशनल टेस्टिंग, व्यवहार आकलन और ऑटिज़्म (एएसडी) आकलन शामिल हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य उपकरण इस्तेमाल होते हैं: आईक्यू के लिए वेक्सलर स्केल (WISC, WAIS), संज्ञानात्मक क्षमता और शैक्षिक उपलब्धि के लिए वुडकॉक-जॉनसन (WJ), एडीएचडी के लिए कॉनर्स (Conners) रेटिंग स्केल और ऑटिज़्म के लिए एडोस (ADOS), जिसे व्यापक रूप से स्वर्ण-मानक माना जाता है। यूएई, सऊदी अरब, क़तर, कुवैत, ओमान, बहरीन, कनाडा और जर्मनी तथा अन्य देशों में बसे भारतीय परिवार इसी तरह जुड़ते हैं। हर परिवार को मानक प्रारूप में विस्तृत लिखित रिपोर्ट मिलती है, जो भारत या विदेश में स्कूल, बाल रोग विशेषज्ञ और थेरेपिस्ट के साथ साझा की जा सकती है। एडोस जैसे कुछ उपकरण प्रशिक्षित विशेषज्ञ आमने-सामने ही देते हैं, इसलिए ज़रूरत पड़ने पर इंदौर के उर्जस्विनी चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में प्रत्यक्ष सत्र रखे जाते हैं।

ऑनलाइन प्रक्रिया एक कॉल से शुरू होती है, जिसमें अभिभावक चिंताएँ बताते हैं और स्कूल रिपोर्ट, कॉपियाँ तथा पुरानी थेरेपी या चिकित्सा रिपोर्ट भेजते हैं। फिर विस्तृत अभिभावक साक्षात्कार और बच्चे के साथ वीडियो सत्र होते हैं, और अंत में लिखित रिपोर्ट आती है, जिसमें बच्चे की ताकतें, ज़रूरतें, सुझाई गई थेरेपी तथा घर और स्कूल की योजना होती है। 144 छोटे बच्चों पर ‘जर्नल ऑफ़ ऑटिज़्म एंड डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स’ में छपे अध्ययन में टेलीहेल्थ आकलन 92 प्रतिशत बच्चों में प्रत्यक्ष आकलन से मेल खाया, हालाँकि यह कुछ ख़ास उपकरणों और उम्र पर लागू होता है। यह कोई ठप्पा नहीं है और चिकित्सकीय जाँच का विकल्प भी नहीं। ज़रूरत हो तो सुनने, देखने या बाल रोग विशेषज्ञ की जाँच की सलाह भी दी जाती है।

बोलने में देरी, पढ़ने-लिखने में लगातार कठिनाई, अत्यधिक बेचैनी या ध्यान की कमी, मेहनत के बावजूद धीमा सीखना, गिरता स्कूल प्रदर्शन, या थेरेपी के बावजूद रुकी प्रगति, ये और गौर से देखने के कारण हैं, निदान नहीं। किसी भी थेरेपिस्ट से अभिभावक ये प्रश्न पूछ सकते हैं:

  • क्या मेरे बच्चे का सोच, सीखने, ध्यान, भाषा और भावनाओं का पूरा आकलन हुआ है?
  • उसकी ताकतें क्या हैं और ठीक-ठीक क्या कठिन है?
  • जो कौशल उसे पहले से आते हैं, उन पर समय तो नहीं जा रहा?
  • अगले कुछ महीनों के लक्ष्य क्या हैं और उन्हें कैसे नापा जाएगा?
  • समीक्षा कब होगी, और प्रगति रुके तो क्या बदलेगा?
  • घर पर क्या अभ्यास कराऊँ और स्कूल को क्या पता होना चाहिए?

स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन, ऑटिज़्म फ़ैक्ट शीट; वॉरेन व अन्य, पीडियाट्रिक्स, 2011; ओलुसान्या व अन्य, द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ, 2018; सलारी व अन्य, इटैलियन जर्नल ऑफ़ पीडियाट्रिक्स, 2023; वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, जर्नल ऑफ़ ऑटिज़्म एंड डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स, 2023।

(डॉ. विनी झारिया एक आर.सी.आई.-पंजीकृत (RCI-registered) क्लिनिकल और बाल मनोवैज्ञानिक (Child Psychologist) हैं और अपने क्षेत्र में एक दशक से अधिक के अनुभव के साथ एक टेडएक्स (TEDx) वक्ता भी हैं। वह ऊर्जस्विनी चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर और स्पेशल स्कूलइंदौर की संस्थापिका हैं। उनके कार्यों में मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, आई.क्यू. और संज्ञानात्मक परीक्षण (cognitive testing), विकासात्मक एवं व्यावहारिक मूल्यांकन, सीखने में आने वाली कठिनाइयाँ (learning difficulties) और बहुविषयक बाल हस्तक्षेप (multidisciplinary child intervention) आदि शामिल हैं। कई अंतरराष्ट्रीय पद्धतियों में प्रशिक्षित, वे एडीएचडी, ऑटिज़्म, सीखने की कठिनाइयों और डिस्लेक्सिया वाले न्यूरोडाइवर्स बच्चों के साथ काम करती हैं और अभिभावकों व स्कूलों में जागरूकता फैलाती हैं एवं कई पुरस्कारों से सम्मानित हैं।)

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

Indianews Webdesk

Recent Posts

IND vs NZ 4th T20 Live Streaming: भारत-न्यूजीलैंड का मैच कब और कहां देखें लाइव, जानें पूरी डिटेल

IND vs NZ 4th T20 Live Streaming: भारत और न्यूजीलैंड का चौथा टी20 मैच 30…

Last Updated: October 29, 2026 12:39:11 IST

Karwa Chauth 2026 Vrat Katha: करवा चौथ पर क्यों पढ़ी जाती है व्रत कथा? जानें करवा माता की कहानी और व्रत का महत्व

Karwa Chauth Ki Kahani: करवा चौथ पर महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला…

Last Updated: October 29, 2026 12:28:15 IST

Anirudh-Kavya Wedding Invitation: अनिरुद्ध-काव्या की शादी का शाही न्योता! 3 महीने में तैयार हुआ विंटेज वेडिंग बॉक्स, अंदर की चीजें देख रह जाएंगे हैरान

Anirudh-Kavya Wedding Invitation: अनिरुद्ध रविचंदर और काव्या मारन की शादी की खबरों के बीच शाही…

Last Updated: October 29, 2026 11:32:49 IST

Watch Video: BARC में नौकरी, कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई और फिर बन गया संन्यासी; इंजीनियर की कहानी सुन लोग रह गए हैरान

Watch Video: BARC में नौकरी और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने वाले एक शख्स ने…

Last Updated: October 29, 2026 11:03:32 IST

Gold Price 29 October 2026: करवाचौथ पर सोना सस्ता हुआ या महंगा? खरीदने से पहले जरूर चेक करें ताजा रेट

Gold Price 29 October 2026: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का…

Last Updated: October 29, 2026 10:35:30 IST

Silver Price Today 29 October 2026: चांदी की कीमतों में बड़ा उलटफेर! एक झटके में 1,487 सस्ती हुई सिल्वर, जानें आज का ताजा भाव

Silver Price Today 29 October 2026: 29 अक्टूबर 2026 को चांदी की कीमतों में गिरावट…

Last Updated: October 29, 2026 10:07:57 IST