Men Vasectomy Myths vs Facts: 1970 के दशक में देश में परिवार नियोजन को लेकर प्रयास शुरू हुआ. जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को महिलाओं पर केंद्रित किया है. लेकिन, धीरे-धीरे इस कानून में बदलाव हुआ और सरकार के प्रयास से पुरुष नसबंदी अभियान भी मनाया जाने लगा. पुरुष नसबंदी (Men Vasectomy) जिसे वैसेक्टोमी भी कहते हैं. यह गर्भनिरोध या गर्भ नियंत्रण का बेहद आसान तरीका है, जिसमें नसबंदी कराने के बाद इजैक्युलेशन के दौरान स्पर्म (Sperm) रिलीज नहीं होता है. इस प्रक्रिया में पुरुषों के शरीर में मौजूद वास डेफेरेंस (वह नली जो टेस्टिकल्स से स्पर्म को लेकर यूरेथ्रा तक जाती है) को या तो सील कर दिया जाता है या फिर काट दिया जाता है. यह प्रक्रिया 99 प्रतिशत तक प्रभावशाली होती है और इस सर्जरी को रिवर्स भी किया जा सकता है.
कहने का मतलब स्पर्म की नली को वापस जोड़ा भी जा सकता है, लेकिन यह हमेशा सफल नहीं होता है. लिहाजा जब पुरुष पूरी तरह से आश्वस्त हो जाएं कि उन्हें अब बच्चे नहीं चाहिए तभी उन्हें नसबंदी करवानी चाहिए. हालांकि, लोगों में नसबंदी के बारे में सही जानकारी न होने से कई मिथ होते हैं. यही कारण कि, आज आधुनिक समाज में भी पुरुष नसबंदी से जुड़े कई मिथक और गलत धारणाएं मौजूद हैं. इस आर्टिकल में हम कुछ मिथ और उनकी सेहत से जुड़ी सच्चाई बताएंगे.
पुरुषों की नसबंदी कराने के लेकर मिथ और फैक्ट्स
Myths 1: नसबंदी करवाने से यौन क्षमता प्रभावित होती है
Facts: मायो क्लीनिक की रिपोक्ट के मुताबिक, नसबंदी करवाने से पुरुषों की कामेच्छा, पौरुष, यौन सुख आदि में किसी तरह की कोई कमी नहीं आती है और ना ही इरेक्शन हासिल करने में या फिर ऑर्गेज्म हासिल करने की क्षमता में कमी आती है. यही नहीं, नसबंदी करवाने के बाद शरीर में टेस्टोस्टेरॉन के लेवल में भी कोई बदलाव नहीं आता है. केवल और केवल इजैक्युलेशन के दौरान स्पर्म को निकलने से रोक दिया जाता है.
Myths 2: नसबंदी प्रक्रिया जोखिम से भरी और तकलीफदेह होती है
Facts: बिलकुल नहीं. बता दें कि, पुरुष नसबंदी का ऑपरेशन लोकल ऐनेस्थीसिया देकर किया जाता है. इस प्रक्रिया में मात्र 30-35 मिनट तक का समय लग सकता है. यह बेहद कम रिस्क वाली सर्जरी है और इसमें ज्यादातर मरीजों को थोड़ी बहुत सूजन या टेस्टिकल्स में हल्का दर्द महसूस होता है, जो 2-3 हफ्ते के अंदर अपने आप ही ठीक हो जाती है. वैसे तो महज कुछ दिनों के अंदर ही मरीज पूरी तरह से रिकवर हो जाते हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर 10-15 दिनों तक उन्हें भारी चीजें उठाने या कठोर परिश्रम वाला काम न करने की सलाह दी जाती है.
Myths 3: नसबंदी कराने से आपके यौन अंगों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचेगा
Facts: यह प्रक्रिया वास डेफरेंस नामक नली पर लक्षित होती है. इस प्रक्रिया में किसी अन्य यौन अंग या ऊतक को शामिल नहीं किया जाता है. रक्त आपूर्ति में चोट लगने से अंडकोष को खोने की स्थिति अत्यंत दुर्लभ होती है, इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप पूरी तरह ठीक हैं.
Myths 4: नसबंदी करवाने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है
Facts: करीब 30-35 साल पहले अमेरिका में हुई एक स्टडी में पुरुष नसबंदी और बाद के सालों में प्रोस्टेट कैंसर होने के खतरे की बात कही गई थी. लेकिन इस स्टडी की सच्चाई सामने आ चुकी है, जिसमें बताया गया है कि पुरुष नसबंदी और प्रोस्टेट कैंसर होने के बीच संबंध बेहद कमजोर है. साथ ही नसबंदी को टेस्टिक्युलर कैंसर का जोखिम कारक भी नहीं माना जाता है.
Myths 5: नसबंदी से बढ़ सकता है डिमेंशिया का खतरा
Facts: पुरुष नसबंदी और डिमेंशिया के बीच कनेक्शन को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत और अध्ययन मौजूद नहीं हैं. एक स्टडी जो हुई भी थी वह बेहद छोटी थी और उसका आशय अनिश्चित था.
Myths 6: नसबंदी तुरंत असरदार होती है
हकीकत: डॉक्टरों की मानें तो पुरुष नसबंदी करवाने के बाद पहले साल में अनचाही प्रेगनेंसी होने की आशंका कुछ प्रतिशत तक बनी रह सकती है और इसका कारण ये है कि ऑपरेशन करवाने के बाद भी वास डेफेरेंस में स्पर्म मौजूद और सक्रिय हो सकते हैं.
Myths 7: नसबंदी, यौन रोग के खतरे से भी बचाती है
Facts: एचआईवी-एड्स या सिफलिस जैसी सेक्शुअली ट्रांसमिटड होने वाली बीमारियां (यौन रोग) सीमन के जरिए फैलती हैं. सीमन के सिर्फ 2-5 प्रतिशत हिस्से में स्पर्म होता है. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि स्पर्म की गैर मौजूदगी में भी सीमन, असुरक्षित संबंध बनाने पर यौन रोग का कारण बन सकता है.