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मोहब्बत के इंजेक्शन में इंफेक्शन का डोज! KISS करने से पहले सावधान, प्यार के साथ मुफ्त मिल सकती ये बीमारी

Kissing Health Risks: आमतौर पर किस करने को प्यार का संकेत माना जाता है. लेकिन, आपको बता दें कि किस करने से केवल भावनाएं ही नहीं, बल्कि कुछ इंफेक्शन और बीमारियां भी फैल सकती हैं. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ‘किसिंग डिजीज’ (Kissing Disease) के नाम से मशहूर एक मामूली सा दिखने वाला वायरस, भविष्य में आपकी नसों और दिमाग को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. अब सवाल है कि आखिर, यह चुंबन रोग है क्या? कैसे फैलती यह बीमारी? MS से क्या है नाता? आइए जानते हैं इस बारे में-

Kissing Health Risks: हर इंसान अपने प्यार का इजहार अलग तरीके से करता है. किस (Kiss) करना भी इनमें से एक है. अक्सर लोग बच्चों और अपने पार्टनर को किस करके अपना प्यार जाहिर करते हैं. आमतौर पर किस करने को प्यार का संकेत माना जाता है. लेकिन, आपको बता दें कि किस करने से केवल भावनाएं ही नहीं, बल्कि कुछ इंफेक्शन और बीमारियां भी फैल सकती हैं. सुनने में बेशक आपको यह बात थोड़ी अटपटी लगे, लेकिन हाल ही में आई एक मेडिकल रिसर्च ने यही दावा किया है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ‘किसिंग डिजीज’ (Kissing Disease) के नाम से मशहूर एक मामूली सा दिखने वाला वायरस, भविष्य में आपकी नसों और दिमाग को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. चौंकाने वाली बात तो यह है कि, किस करने से मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) विकसित होने की संभावना लगभग तीन गुना अधिक होती है. कहने का मतलब, दिल से दिया गया प्यार, कभी-कभी बैक्टीरिया और वायरस मुफ्त में दे सकता है. अब सवाल है कि आखिर, यह चुंबन रोग है क्या? कैसे फैलती यह बीमारी? MS से क्या है नाता? क्या हैं लक्षण और क्या बरतें सावधानियां? आइए जानते हैं इस बारे में-

चुंबन रोग क्या होता है?

टीओटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस चुंबन रोग को मेडिकल भाषा में ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस’ (Infectious Mononucleosis) कहा जाता है. यह बीमारी ‘एपस्टीन-बार वायरस’ (EBV) की वजह से होती है, जो दुनिया के सबसे आम संक्रमणों में से एक है. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, मेडिकल जगत में  मोनोन्यूक्लिओसिस को यूं ही किसिंग डिजीज नहीं कहा जाता है. EBV वायरस लार के जरिए फैलकर बुखार, थकान और गले की सूजन का पूरा सिलेबस खोल देता है.

कैसे फैलती है यह बीमारी?

इस चुंबन से जुड़ी बीमारी को मोटे तौर पर यूं समझिए कि, इश्क का इम्तिहान, बिस्तर पर आराम के साथ देना पड़ सकता है. दिलचस्प बात यह है कि इसे ‘किसिंग डिजीज’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य रूप से लार (Saliva) के जरिए फैलती है. यहां एक बात क्लियर कर दूं कि, यह बीमारी सिर्फ किस करने से ही नहीं, बल्कि झूठा खाने, एक ही गिलास से पानी पीने या रोजमर्रा के करीबी संपर्क से भी फैल सकती है.

what kissing disease

चुंबन रोग का MS से क्या जुड़ाव?

अमेरिका में लगभग 19,000 लोगों पर की गई एक स्टडी (Mayo Clinic-led study) में यह पाया गया कि जिन लोगों को कभी ‘मोनो’ यानी किसिंग डिजीज हुई थी, उनमें भविष्य में मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) होने का खतरा उन लोगों के मुकाबले तीन गुना अधिक था जिन्हें यह संक्रमण कभी नहीं हुआह. रिसर्च यह भी बताती है कि संक्रमित लोगों में यह दिमागी बीमारी सामान्य से काफी पहले भी दिखाई देने लगती है.

क्या होती है मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS)?

मायोक्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, MS एक ऐसी क्रोनिक स्थिति है जिसमें हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम ही अपनी नसों की सुरक्षात्मक परत (Myelin Sheath) पर हमला कर देता है. इससे दिमाग और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संकेतों का तालमेल बिगड़ जाता है. इसकी शुरुआत थकान, नजर धुंधली होने, सुन्नपन और शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षणों से होती है, जो वक्त के साथ बढ़ते चले जाते हैं.

क्या KISS करना बंद कर देना चाहिए?

इस चुंबन की बीमारी के बाद से अक्सर लोगों का सवाल होगा कि, क्या किस करना बंद कर दें? ऐसा भी नहीं! बस थोड़ा मेडिकल कॉमन सेंस अपनाइए. मतलब अगर आपको या आपके पार्टनर को कोई इंफेक्शन, छाले, बुखार या ओरल प्रॉब्लम है, तो उस वक्त मोहब्बत को थोड़ी छुट्टी दे दीजिए. याद रखिए मोहब्बत का असली मकसद खुशी देना है, न कि इंफेक्शन बांटना. 

संक्रमण के किन लक्षणों की अनदेखी से बचें?

-आंखों में दर्द या धुंधला दिखाई देना.
-हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना.
-बिना किसी कारण के बहुत ज्यादा थकान रहना.
-रीढ़ की हड्डी में बिजली जैसा झटका महसूस होना.
-अचानक आई कमजोरी या शरीर का संतुलन बिगड़ना.

एप्सटीन-बार वायरस से बचाव कैसे करें?

मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली के सीनियर न्यूरो सर्जन कहते हैं कि, इस दिशा में वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और यह चर्चा कर रहे हैं कि क्या एपस्टीन-बार वायरस (EBV) के खिलाफ कोई वैक्सीन तैयार की जा सकती है या नहीं. फिलहाल, स्वच्छता बनाए रखना, किसी का झूठा खाना पानी न पीना और अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना ही इससे बचने के सबसे आसान तरीके हैं. रिसर्च के नतीजे निश्चित रूप से चिंताजनक हैं. घबराने के बजाय अपनी सेहत को लेकर सावधान रहें.

Lalit Kumar

9 साल से ज्यादा के लंबे करियर में ललित कुमार ने दैनिक जागरण, दैनिक भाष्कर, हिन्दुस्तान और नेटवर्क 18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, समाज, कला व संस्कृति के अलावा जटिल स्वास्थ्य विषयों और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण उनकी विशेषता है। खबरों का डीप एनालिसिस उनकी पहचान है। हर खबर को आसान भाषा में पाठक तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान में वे देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में एक इंडिया न्यूज (डिजिटल) में लाइफस्टाइल, हेल्थ, धर्म और एस्ट्रो टीम का हिस्सा हैं।

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