Iran-Israel-America War: फिल्म निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमला बोलते हुए कहा कि एआई कोई अहंकार नहीं रखता, न देरी करता है और न विरोध. यह डोनाल्ड ट्रंप की सोच के अनुरूप सटीक विकल्प दे सकता है.
राम गोपाल वर्मा ने बोला डोनाल्ड ट्रंप पर हमला
Ram Gopal Varma On Donald Trump Statement: ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हर दिन ही प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. इसे लेकर भारत में भी सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं. वहीं अब फिल्म निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है. राम गोपाल वर्मा ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर चिंता जताते हुए सवाल किया कि क्या वह केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सलाह पर काम कर रहे हैं?
राम गोपाल वर्मा ने पोस्ट में पूछा,- “क्या ट्रंप सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सलाह सुन रहे हैं? ट्रंप एक पल में कहते हैं कि बड़े पैमाने पर लड़ाई खत्म हो गई है, तो दूसरे पल में एक छोटी-सी मुहिम जो अब खत्म होने वाली है. फिर वे पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकी देते हुए कहते हैं कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत नहीं खोला गया तो ईरान को पाषाण युग में वापस भेज देंगे. इसके कुछ देर बाद वह अचानक सार्थक बातचीत की बात करने लगते हैं और दावा करते हैं कि ईरान में सत्ता परिवर्तन पहले ही हो चुका है.”
उन्होंने सवाल किया कि किस तरह की भरोसेमंद मानवीय जानकारी हर कुछ घंटों में ओवल ऑफिस पहुंच सकती है जो इन विरोधाभासों को सही ठहरा सके? खासकर तब जब ट्रंप अधिकारियों की बात न मानने, विरोधियों को निकालने और सलाहकारों पर भरोसा न करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने कहा कि पारंपरिक ब्रीफिंग, सैटेलाइट फीड या कैबिनेट की चर्चाएं इंसानी गति से चलती हैं.
वर्मा ने आगे कहा कि युद्ध के लक्ष्य, आर्थिक प्रभाव, ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई या घरेलू राजनीति पर पड़ने वाले असर को तुरंत नहीं बदला जा सकता. लेकिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लाइव डेटा को तेजी से विश्लेषित कर सकता है. यह युद्ध की जानकारी, लोगों की भावनाएं, तेल की कीमतें, सहयोगी देशों की प्रतिक्रियाएं आदि को देखते हुए “क्या होगा अगर” वाले हजारों परिदृश्य तैयार कर सकता है.
फिल्म निर्माता-निर्देशक ने लिखा कि एआई कोई अहंकार नहीं रखता, न देरी करता है और न विरोध. यह ट्रंप की सोच के अनुरूप सटीक विकल्प दे सकता है. ये अचानक बदलाव ठीक वैसे ही लगते हैं जैसे कोई एआई को-पायलट काम करता हो. हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर यूजर खुद ट्रंप जितना ही कम ध्यान रखने वाला हो तो इतने सारे विकल्पों में उलझ सकता है.
वहीं पोस्ट के अंत में राम गोपाल वर्मा ने एक अलग मुद्दे पर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षक बच्चों को गाली-गलौज और अश्लील शब्दों से दूर रखने की कोशिश करते हैं ताकि वे बड़े होकर सम्मानजनक इंसान बनें. लेकिन, अगर अमेरिका के राष्ट्रपति खुद सार्वजनिक रूप से अश्लील और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं तो माता-पिता अपने बच्चों को क्या समझाएंगे?
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