एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, लड़कियों की पसंद हर हफ्ते बदल जाती है. उनकी इस पसंद में बदलाव के पीछे बॉयोलॉजिक कारण होते हैं. पर्सनल लाइफ में भी इसका असर होता है. बॉयोलॉजिकी उन्हें कभी चॉकलेटी लड़का पसंद आता है तो कभी वे वाइल्ड लुक वाला. लेकिन, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि लड़कियां रिश्तों को लेकर गंभीर नहीं होती हैं. आइए जानते हैं कब कौन से मर्द आते हैं पसंद-
जानिए, हर हफ्ते क्यों बदल जाती है लड़कियों की पसंद. (Canva)
अब तक यही सुनते आए हैं कि, प्यार इंसान को बदल देता है, लेकिन ये बदलाव हर किसी के लिए अलग-अलग होता है. रिश्ता जुड़ने के बाद कोई बहुत ज्यादा इमोशनल हो जाता है तो कोई ज्यादा मैच्योर. कोई अचानक से ब्यूटी कॉन्शियस हो जाता है तो कोई बेफिक्र. अगर बात लड़कियों की करें तो रिलेशनशिप में आने के बाद उनकी बहुत सी हरकतें और आदतें बदल जाती हैं. यही नहीं, वे फैशन की दुनिया से लेकर निजी जिंदगी में भी कंफ्यूज्ड नजर आती हैं. इस बात को अब साइंस ने भी मान लिया है. एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, लड़कियों के पसंद में बदलाव के पीछे बॉयोलॉजिक कारण होते हैं. पर्सनल लाइफ में भी इसका असर होता है. बॉयोलॉजिकी उन्हें कभी चॉकलेटी लड़का पसंद आता है तो कभी वे वाइल्ड लुक वाला. लेकिन, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि लड़कियां रिश्तों को लेकर गंभीर नहीं होती हैं. साइक्लॉजी टुडे की एक रिपोर्ट कहती है कि ऐसा संभव है कि एक लड़की कुछ दिनों तक चॉकलेटी लुक वाले लड़के को पसंद करे और कुछ दिन बाद उसका पसंद बदल जाए. वह अगले हफ्ते वाइल्ड लुक वाले लड़के पर दिल फेंकती नजर आ सकती है.
लड़कियों के पसंद में बदलाव के पीछे का कारण उनकी बॉडी में हर माह होने वाला हार्मोनल-बॉयलॉजिकल चेंज है. रिपोर्ट की मानें तो, ‘गुड जीन्स ओवुलेट्री शिफ्ट हाइपोथेसिस’ (good genes ovulatory shift hypothesis) नामक अध्ययन के आधार पर किया है. इसमें कहा गया है कि लड़कियों का विपरित लिंग के प्रति आकर्षण उनके पीरियड साइकिल के हिसाब से बदल सकता है. ऐसा बिल्कुल संभव है कि कोई लड़की पीरियड साइकिल के शुरू में चॉकलेटी लुक वाले लड़के को पसंद करे और वही लड़की जब ओवुलेट होती हो तो उस दौरान वह किसी वाइल्ड लुक वाले लड़के के साथ समय बिताना पसंद करे.
रिपोर्ट कहती है कि महिलाएं जब ‘लोवर रिस्क ऑफ कंसेप्शन’ के दौर में होती हैं तो सोचती हैं कि गुड लुकिंग (हैंडसम) लड़का एक अच्छा पिता बन सकता है. यहां ‘लोवर रिस्क ऑफ कंसेप्शन’ से मतलब उस समय अवधि से है, जब महिलाएं संबंध बनाएं तो उनके गर्भवती होने की संभावना काफी कम रहती है. यही वह समय होता है जब लड़कियां चॉकलेटी लुक वाले लड़कों की ओर ज्यादा आकर्षित होती हैं. इसके उलट जब महिलाएं ओवुलेट होती हैं. यानी पीरियड्स साइकिल का वह समय जब महिलाओं में ऐग बनते हैं और संबंध बनाने पर उनके मां बनने की संभावना ज्यादा होती है, ऐसे समय में वह वाइल्ड लुक वाले लड़कों की ओर आकर्षित होती हैं. हालांकि, इस रिपोर्ट की लेखक यहां पर थोड़ा सचेत करती हैं. वह कहती हैं कि इस तथ्य को अभी पूरी तरह से रियल लाइफ पर लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस क्षेत्र में अभी और रिसर्च की जरूरत है.
राइटर करेन वु पीएचडी (Karen Wu Ph.D) ने ‘डु फर्टाइल वुमेन प्रेफर मोर मैस्कुलीन मेन’ (Do Fertile Women Orefer More Masculine Men?) शीर्षक से यह लेख लिखा है. उन्होंने रियल लाइफ में खुद इसको लेकर एक्सपेरिमेंट किए हैं. इस अध्ययन में उन्होंने 262 सिंगल एशियन अमेरिकन महिलाओं को शामिल किया. इनकी उम्र 18 से 30 साल रखी गई. इस दौरान इन महिलाओं को उनकी उम्र के हिसाब से विभिन्न वर्गों में बांटा गया और उनसे पीरियड साइकिल को लेकर प्रश्नावली दी गई. इन सभी का तीन मिनट का स्पीड डेट टेस्ट किया गया. हर टेस्ट के बाद लड़कियों को अगली डेट का विकल्प दिया गया और उनसे प्रीफ्रेंस बताने को कहा गया कि वे किस तरह के लड़के- चॉकलेटी या वाइल्ड के साथ डेट करना पसंद करेंगी? इस अध्ययन के निष्कर्ष में पाया गया कि अधिकतर महिलाओं के एक पीरियड साइकिल में पसंद में काफी अंतर था.
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