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Heart Attack Problem: हार्ट अटैक अक्सर बिना किसी चेतावनी के आता है. आज के समय में जब अधिकतर लोग न्यूक्लियर फैमिली में रहते हैं, ऐसे में बुजुर्गों या अकेले रहने वालों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति घर पर अकेले रहते हुए हार्ट अटैक महसूस करे, तो उसे तुरंत क्या करना चाहिए?
घर पर अकेले हों और अचानक आ जाए हार्ट अटैक तो क्या करें
Heart Attack Problem: आज के समय में हार्ट अटैक सिर्फ उम्र से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है, लेकिन 45 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों और 55 साल से ऊपर की महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है. डायबिटीज, मोटापा, ज्यादा तनाव, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हार्ट अटैक की आशंका को बढ़ा देती है.
हार्ट अटैक के दौरान सीने के बीच में दबाव या दर्द महसूस हो सकता है, जो हाथों, कंधे, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है. इसके साथ सांस लेने में परेशानी, घबराहट, मतली, अत्यधिक पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना भी संकेत हो सकते हैं. अगर यह तकलीफ 20 मिनट से ज्यादा बनी रहे और पहले कभी ऐसा अनुभव न हुआ हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
अगर अकेले रहते हुए हार्ट अटैक का शक हो, तो घबराने की बजाय खुद को शांत रखना बेहद जरूरी है. डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसी स्थिति में जीभ के नीचे सोरबिट्रेट रखी जा सकती है. साथ ही तुरंत एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल और एटोरवास्टेटिन जैसी दवाएं लेना मददगार साबित हो सकता है. इन दवाओं को चबाकर लेने से वे जल्दी असर करती हैं और खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं.
अगर अचानक ब्लड प्रेशर बहुत गिर जाए, चक्कर आएं या कमजोरी महसूस हो, तो सोरबिट्रेट नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इससे बीपी और कम हो सकता है. ऐसे में व्यक्ति को लेट जाना चाहिए और पैरों के नीचे तकिया रखकर शरीर को स्थिर रखना बेहतर होता है.
दवाएं लेने के बाद भी खुद को सुरक्षित समझना गलती हो सकती है. हार्ट अटैक के शक में तुरंत एंबुलेंस बुलानी चाहिए और नजदीकी अस्पताल जाकर ईसीजी कराना जरूरी है. डॉक्टर बताते हैं कि हार्ट अटैक के पहले एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है और इसी दौरान इलाज मिलने से दिल को होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है.
ऐसी स्थिति में सीधे बैठना फायदेमंद होता है क्योंकि इससे फेफड़ों को फैलने की जगह मिलती है और शरीर को ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है. गहरी और धीमी सांसें लेने से दिल पर दबाव भी कुछ हद तक कम हो सकता है.
अकेले रहने वाले बुजुर्गों को हमेशा पड़ोसियों, दोस्तों या रिश्तेदारों के फोन नंबर अपने पास रखने चाहिए. जरूरत के समय किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बुलाने से घबराहट कम होती है और अस्पताल पहुंचने में मदद मिलती है.
हार्ट अटैक से उबरने के बाद नियमित दवाएं लेना, खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार करना, तनाव से दूरी बनाना और समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाना बेहद जरूरी होता है. यही आदतें भविष्य में दोबारा हार्ट अटैक के खतरे को कम कर सकती हैं.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक,
हार्ट अटैक के दौरान शरीर कुछ संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जैसे-
अगर ऐसा दर्द 20 मिनट से ज्यादा बना रहे और पहले कभी ऐसा महसूस न हुआ हो, तो तुरंत सतर्क हो जाएं.
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