ozempic, सेमाग्लूटाइड नामक दवा का ब्रांड नाम है, जो एफडीए द्वारा अनुमोदित दवा है और टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित वयस्कों में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक हो सकती है.
ozempic for obesity
डायबिटीज अपने साथ कई समस्याओं को लेकर आती है, जिनमें से मोटापा भी शामिल है.
लेकिन मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. भारतीय बाजार में ओजेम्पिक नाम की दवा आ चुकी है जिसे मुख्य रूप से टाइप 2 डायबिटीज़ मैनेजमेंट के लिए मंजूरी मिली है.ओजेम्पिक, सेमाग्लूटाइड नामक दवा का ब्रांड नाम है, जो एफडीए द्वारा अनुमोदित दवा है और टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित वयस्कों में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक हो सकती है.
ओजेम्पिक सेमाग्लूटाइड-बेस्ड इंजेक्टेबल दवा है जिसे मुख्य रूप से टाइप 2 डायबिटीज़ मैनेजमेंट के लिए उपयोग किया जाता है. इसकी कीमत लगभग ₹2,200 प्रति हफ़्ते की डोज़ है. यह GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट इंसुलिन प्रोडक्शन बढ़ाने, भूख कम करने और पाचन धीमा करने के लिए गट हार्मोन की नकल करता है. ट्रायल्स में जब इसे डाइट और एक्सरसाइज़ के साथ लिया गया, तो देखा गया कि इससे शरीर का वज़न 10-15% तक कम हो गया. हालांकि भारत में अभी तक वज़न घटाने के लिए इसे आधिकारिक तौर पर मंज़ूरी नहीं मिली है, लेकिन इसका ऑफ-लेबल इस्तेमाल ग्लोबल ट्रेंड्स जैसा है, जिससे एक्सपर्ट्स संभावित साइड इफ़ेक्ट्स और सप्लाई की समस्याओं के बीच मेडिकल देखरेख पर ज़ोर दे रहे हैं.
ओजेम्पिक दिमाग को पेट भरा हुआ महसूस कराने और पेट खाली होने में देरी करने का सिग्नल देता है, जो बिना किस औजार के बेरियाट्रिक सर्जरी के असर जैसा है. क्लिनिकल स्टडीज़, जिनमें न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन में छपी स्टडीज़ भी शामिल हैं, दिखाती हैं कि सेमाग्लूटाइड इस्तेमाल करने वालों ने 68 हफ़्तों में 15% तक वज़न कम किया, जो सिर्फ़ लाइफस्टाइल में बदलाव से कहीं बेहतर है. इसके अतिरिक्त इस दवा के इस्तेमाल से डायबिटीज़ के मरीज़ों को कार्डियोवैस्कुलर फ़ायदे भी हुए हैं. ICMR के आंकड़ों के अनुसार भारत में मोटापा 20% से अधिक शहरी वयस्कों को प्रभावित करता है, ऐसे में यह दवा एक वरदान साबित हो सकती है.
ओजेम्पिक से होने वाली आम दिक्कतों में जी मिचलाना, उल्टी, डायरिया और कब्ज शामिल हैं, जो आमतौर पर कुछ हफ्तों बाद ठीक हो जाते हैं, लेकिन पैंक्रियाटाइटिस, गॉलब्लैडर की समस्या या थायरॉइड ट्यूमर जैसे दुर्लभ जोखिमों के लिए डॉक्टर की निगरानी की ज़रूरत होती है. विशेषज्ञों के अनुसार कम डोज़ (हर हफ़्ते 0.25mg) से दवा की शुरुआत की जानी चाहिए और 4-8 हफ़्तों में धीरे-धीरे डोज़ बढ़ानी चाहिए. अगर आप प्रेग्नेंट हैं, ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं, या मेडुलरी थायरॉइड हिस्ट्री है तो इस दवा को लेने से बचना चाहिए.
Bollywood Double Meaning Songs: बॉलीवुड की 3 ऐसी बड़ी सुपरहिट फिल्में हैं, जिनके एक गानें…
सूरत (गुजरात) [भारत], जनवरी 2: मानसरोवर सोसायटी, एस.एम.सी. लेक, डिंडोली, सूरत स्थित प्रतिष्ठित न्यू मॉडल…
Palak Tiwari Traditional Look: पलक तिवारी (Palak Tiwari) ने अपने लेटेस्ट लुक से एक बार…
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक डॉ. श्याम बिहारी…
Neelam Giri Khesari Lal Yadav New Bhojpuri Song: भोजपुरी के लेटेस्ट गाने 'बुलबुल' को आवाज़…
Chanakya Niti 2026: चाणक्य नीतियां आज भी उतनी ही उपयोगी हैं जितनी 2,300 साल पहले…