Anaemia In Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान मां का खानपान ही बच्चे को पालता है. साथ ही, जच्चा-बच्चा दोनों को परेशानियों से दूर रखता है. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं. ऐसे कई बीमारियों का रिस्क बढ़ता है. अब सवाल है कि आखिर एनीमिया क्या है? प्रेग्नेंसी में एनीमिया का खतरा क्यों बढ़ता है? इस बारे में बता रही हैं गायनेकोलॉजिस्ट एवं सर्जन डॉ. स्वाती तोमर-
जानिए, प्रेग्नेंसी में एनीमिया का खतरा क्यों बढ़ता है? (AI)
Anaemia In Pregnancy: प्रेग्नेंसी कंसीव होते ही महिलाओं की सेहत काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है. जितना यह पल सुखद होता है, उतना ही जोखिम भरा भी. इसलिए एक मां को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि, मां की सेहत पर ही बच्चे की सेहत निर्भर करती है. ऐसे में सेहतमंद रहने के एक ही फॉर्मूला है हेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान. गर्भावस्था के दौरान मां का खानपान ही बच्चे को पालता है. साथ ही, जच्चा-बच्चा दोनों को परेशानियों से दूर रखता है. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं. ऐसे कई बीमारियों का रिस्क बढ़ता है. प्रेग्नेंसी के दौरान एक बीमारी जिसका जिक्र बार-बार आता है, और बेहद कॉमन माना भी जाता है. इसका नाम है एनीमिया. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट कहती हैं कि भारत में 10 में से 6 गर्भवती महिलाओं में एनीमिया का खतरा है.
अब सवाल है कि आखिर एनीमिया क्या है? प्रेग्नेंसी में एनीमिया का खतरा क्यों बढ़ता है? अगर प्रेग्नेंसी में एनीमिया हो जाए तो क्या होगा? एनीमिया का प्रभाव पेट में पल रहे बच्चे की सेहत पर क्या होगा? इसके लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं? इस बारे में बता रही हैं एम्स दिल्ली में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट एवं सर्जन डॉ. स्वाती तोमर-
एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रेग्नेंसी में एनीमिया यानी खून की कमी का मुख्य कारण शरीर में आयरन, फोलेट और विटामिन B12 की बढ़ती मांग है. बता दें कि, शिशु और प्लेसेंटा के विकास के लिए शरीर में ब्लड की मात्रा 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. ऐसे स्थिति में आयरन की जरूरत दोगुनी हो जाती है. यदि डाइट में पर्याप्त पोषण न हो या बार-बार गर्भधारण हो, तो एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है.
डॉ. स्वाती कहती हैं कि, एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जहां पर एक गर्भवती महिला के रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से काफी कम हो जाता है जिसकी वजह से पूरे शरीर में ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता है. सामान्य तौर पर एनीमिया की स्थिति तब मानी जाती है जब आपको पर्याप्त मात्रा में आयरन ना मिले. आयरन अगर नहीं मिलेगा तो रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाएगा और इसी रक्त की कमी को एनीमिया कहते हैं.
अगर किसी गर्भवती महिला के खून में पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं होगा तो शरीर के अंगों और ऊतकों को सामान्य से कम ऑक्सीजन मिलेगी. गर्भ में मौजूद शिशु मां के द्वारा मिल रही चीजों और ऑक्सीजन पर निर्भर करता है इसलिए उसके स्वास्थ्य के लिए बेहतर भी नहीं होगा. वैसे तो एनीमिया से शुशु की सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं, लेकिन मुख्य नुकसान में मानसिक और शारीरिक विकास का धीमा होना, चिड़चिड़ापन, लगातार थकान, कमजोरी, पीली त्वचा और हृदय गति तेज हो सकती है. अगर हम भारत की बात करें तो भारत महिलाओं में आयरन की कमी वाली एनीमिया का सबसे बड़ा देश है.
गर्भवती महिला को एनीमिया होने पर उसे कई परेशानी हो सकती हैं. जैसे- थकान, कमजोरी या ऊर्जा में कमी महसूस होना. सांस की कमी महसूस होना, चक्कर आना, सिर दर्द होना. चिड़चिड़ापन, टांगों में ऐंठन, बाल झड़ना, भूख कम हो जाना इत्यादि. यह कुछ साधारण लक्षण हैं, जिनके जरिए किसी भी गर्भवती महिला के बारे में पता लगाया जा सकता है कि वह एनीमिया से पीड़ित है या नहीं. इसके अलावा डॉक्टर से भी नियमित परामर्श लेते रहें.
डॉक्टर कहती हैं कि, इलाज के तौर पर गर्भवती महिलाओं को आयरन अनुपूरक लेने की सलाह दी जाती है. इसमें 0.5 ग्राम फोलिक एसिड और सौ ग्राम एलिमेंटल आयरन होता है. यह आदर्श मात्रा बताई जाती है. साधारण तौर पर भरपूर भोजन के साथ विटामिन सी (जैसे नींबू पानी का सेवन) लेना भी आयरन का स्तर बेहतर करने में मदद करता है.
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