Pregnancy Health Tips: प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में एनीमिया का खतरा अधिक देखा जाता है. इसको प्रेग्नेंसी एनीमिया भी कहा जाता है. डॉक्टर की मानें तो, प्रेग्नेंसी में एनीमिया का होना बेहद कॉमन है. इस स्थिति में ब्लड में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है और उसके बाद समस्या शुरू हो जाती है. अब सवाल है कि आखिर, प्रेग्नेंसी एनीमिया क्या है? गर्भावस्था में एनीमिया का खतरा क्यों बढ़ जाता है? शिशु की सेहत के लिए एनीमिया कितना घातक?
जानिए, प्रेग्नेंसी में एनीमिया का क्यों बढ़ता है खतरा? (Canva)
Pregnancy Health Tips: प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए बेहद सुखद पल होता है. हर कोई चाहता है कि उसका बच्चा हेल्दी हो. इसके लिए जरूरी है कि, मां अपनी सेहत का ख्याल रखें. क्योंकि, एक मां से ही बच्चे की सेहत निर्भर करती है. वैसे तो इस दौरान कई परेशानियों का जोखिम होता है, लेकिन एक बीमारी का खतरा ज्यादातर महिलाओं में देखा जाता है. वो है एनीमिया. इसको प्रेग्नेंसी एनीमिया भी कहा जाता है. डॉक्टर की मानें तो, प्रेग्नेंसी में एनीमिया का होना बेहद कॉमन है. इस स्थिति में ब्लड में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है और उसके बाद समस्या शुरू हो जाती है. अब सवाल है कि आखिर, प्रेग्नेंसी एनीमिया क्या है? गर्भावस्था में एनीमिया का खतरा क्यों बढ़ जाता है? शिशु की सेहत के लिए एनीमिया कितना घातक? एनीमिया के लक्षण क्या हैं और इससे बचाव कैसे करें? इस बारे में बता रही हैं स्पंदन हॉस्पिटल बड़ौत की डायरेक्टर एवं सीनियर आयुर्वेदिक गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा तोमर-
डॉ. प्रज्ञा कहती हैं कि, एनीमिया की स्थिति में शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने लगती है. हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जो शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन कैरी करता है. प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई की ज्यादा जरूरत होती है. अगर शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल 11gm/dL से कम हो, तो इसे प्रेग्नेंसी एनीमिया कहा जाता है.
अगर गर्भवती महिला के खून में पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं होगा तो शरीर के अंगों और ऊतकों को सामान्य से कम ऑक्सीजन मिलेगी. गर्भ में मौजूद शिशु मां के द्वारा मिल रही चीजों और ऑक्सीजन पर निर्भर करता है इसलिए उसके स्वास्थ्य के लिए बेहतर भी नहीं होगा. अगर हम भारत की बात करें तो भारत महिलाओं में आयरन की कमी वाली एनीमिया का सबसे बड़ा देश है. शोध की मानें तो भारत में 10 में से 6 गर्भवती महिलाओं में एनीमिया है.
थकान, कमजोरी या ऊर्जा में कमी महसूस होना. सांस की कमी महसूस होना, चक्कर आना, सिर दर्द होना. चिड़चिड़ापन, टांगों में ऐंठन, बाल झड़ना, भूख कम हो जाना इत्यादि. यह कुछ साधारण लक्षण हैं, जिनके जरिए किसी भी गर्भवती महिला के बारे में पता लगाया जा सकता है कि वह एनीमिया से पीड़ित है या नहीं.
प्रेग्नेंसी के दौरान शिशु के विकास के लिए शरीर को सामान्य से ज्यादा आयरन की जरूरत होती है. ऐसे में अगर महिला की डाइट में आयरन से भरपूर फूड्स को शामिल नहीं किया जाए, तो एनीमिया होने का रिस्क रहता है. वहीं, फॉलिक एसिड रेड ब्लड सेल्स बनाने के लिए काफी जरूरी होता है. इसकी कमी से भी एनीमिया होने का रिस्क बढ़ जाता है. गांव-देहात में अब भी इन गोलियों को खाने से महिलाएं बचती हैं. इसके अलावा, महिलाओं में विटामिन-बी12 की कमी, किडनी या लिवर की बीमारी, थैलेसीमिया जैसी हेल्थ कंडिशन भी एनीमिया का कारण बन सकती है.
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