Winter Heart Risk: ठंड में इजाफा होने के साथ ही हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ने लगता है. सर्द के मौसम में डॉक्टर भी दिल की विशेष देखभाल की सलाह देते हैं.
Winter Heart Risk
Winter Heart Risk: अनियमित जीवनशैली, तनाव, बेतरतीब लाइफस्टाइल और खराब खानपान के अलावा कई अन्य चीजें भी हैं, जिनकी वजह से दुनियाभर के लोगों में हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. भारत की बात करें तो यहां पर हार्ट अटैक बेहद गंभीर रूप ले चुका है. एक आंकड़ा बताता है कि भारत में प्रत्येक वर्ष करीब 7 लाख लोगों की जान हार्ट अटैक से चली जाती है. बुजुर्गों के अलावा हार्ट अटैक के शिकार युवा भी हो रहे हैं. यहां तक कि टीनएजर्स भी हार्ट अटैक की चपेट में आ रहे हैं. इस स्टोरी में हम बात करेंगे सर्दियों में हार्ट अटैक के अधिक खतरे, दिल की देखभाल, बहुत ज़्यादा ठंड के समय में हार्ट अटैक का रिस्क क्यों बढ़ जाता है? क्या यह कंट्रोल्ड BP को भी ट्रिगर कर सकता है? खतरे के संकेत? हार्ट अटैक में 40 पैसे की टैबलेट कैसे जान बचा सकती है? समेत अन्य जरूरी बातें, जिनसे आप हार्ट अटैक के खतरों से बच सकते हैं.
भारत में प्रत्येक वर्ष ठंड के मौसम के दौरान हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि शुरू हो जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है, क्योंकि ठंड के दौरान दिल की नसें सिकुड़ जाती हैं. यहां तक कि खून का प्रवाह रुक सकता है. दरअसल, ब्लड वेसल्स के सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर (BP) बढ़ जाता है. इससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में हाई ब्लड प्रेशर की भी दिक्कत हो जाती है. इससे ठंड में शरीर को गर्म रखने के लिए दिल को अधिक काम करना पड़ता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और लापरवाही की स्थिति में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
हार्ट अटैक का खतरा उन लोगों को अधिक होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित होते हैं. क्या सामान्य रक्तचाप (BP) होने पर भी किसी को हार्ट अटैक आ सकता है? यह सवाल लोगों के जेहन में होता है. इसका जवाब हां है, क्योंकि हार्ट अटैक के अन्य कारक और कारण भी होते हैं. जैसे कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, मोटापा, तनाव और धूम्रपान के चलते भी हार्ट अटैक आने का खतरा अधिक होता है. कुछ लोगों को ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है. ऐसे में किसी मरीज का BP अनियंत्रित तरीके से बहुत अधिक बढ़ जाए तो यह हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकता है. इसका यह मतलब नहीं है कि BP से आपको हार्ट अटैक का खतरा कम है. हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह आज भी BP ही है.
डॉक्टरों के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में दिल पर अधिक दबाव पड़ता है. इससे धमनियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और इनमें प्लाक जमा हो जाता है. ऐसी स्थिति में दिल में खून का प्रवाह प्रभावित होता है. सामान्य तौर पर यह हार्ट अटैक का बड़ा कारण बन सकता है. ऐसे में लोगों को अपने BP पर नजर रखनी चाहिए. डॉक्टरों की हिदायत है कि अगर किसी का BP अचानक ही 180/120 mmHg या उससे अधिक हो जाए तो यह चिंता की बात है. मेडिकल की भाषा में इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस कहा जाता है. यह स्थिति हार्ट अटैक या स्ट्रोक की वजह बन सकती है.
दुनिया की खतरनाक बीमारियों में कैंसर और एड्स के बाद हार्ट अटैक का नंबर आता है. आजकल की तनाव भरी और व्यस्त जीवनशैली में लोगों को अपने दिल की देखभाल जरूर करनी चाहिए. इसमें सबसे पहले खानपान है, जिसके जरिये आप दिल की बीमारियों से दूरी बना सकते हैं. अगर आप भी दिल की बीमारियों से दूरी बनाना चाहते हैं तो कुछ बातों को ध्यान रखना जरूरी है.
कार्डियक अरेस्ट और दिल का दौरा पड़ने में क्या अंतर होता है? इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. ये दोनों शब्द अक्सर मेडिकल टर्म में ही इस्तेमाल किए जाते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, दिल का दौरा तब पड़ता है जब हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है या अवरुद्ध हो जाता है. वहीं, जब कोई दिल का रोग मनुष्य में मौजूद होता है और उसे दिल का दौरा पड़ने से व्यक्ति में कार्डियक अरेस्ट हो जाता है.
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