हर साल 3 मार्च को विश्व जन्म दोष दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य है कि जन्मजात विसंगतियों, डिसऑर्डर और कंडीशन्स के बारे में लोगों को जागरुक किया जा सके. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इसके कारण और बचाव...
विश्व जन्मदोष दिवस
World Birth Defects Day: दुनियाभर में हर साल 3 मार्च को विश्व जन्म दोष दिवस मनाया जाता है. इसके तहत लोगों को जन्मजात विसंगतियों, डिसऑर्डर और कंडीशन्स के बारे में जागरूक किया जाता है. बीते साल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व जन्मदोष के विषय पर ध्यान देते हुए सभी देशों से अपील की थी, कि जन्म दोषों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए और हेल्थ सिस्टम को मजबूत किया जाए. जन्म दोष किसी भी व्यक्ति की लाइफस्टाइल को प्रभावित करता है. इसके साथ ही इससे परिवारों, समाज और हेल्थ सिस्टम पर भी बोझ बढ़ता है. एक्सपर्ट्स की मानें, तो इसके बर्थ डिफेक्ट होने के कई कारण हो सकते हैं.
इस विषय पर बात करते हुए गायनोकॉलोजिस्ट डॉक्टर मीरा पाठक ने बात करते हुए बताया कि इंडिया में हर साल 17 लाख बेबीस स्ट्रक्चरल या फंक्शनल बर्थ डिफेक्ट के साथ पैदा होते हैं. अगर आंकड़े देखे जाएं तो 100 बच्चों में से 2 या 3 बच्चों में कोई ना कोई कंजाइटल बर्थ डिफेक्ट होता है. ये हार्ट डिफेक्ट, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, क्लेफ्ट लिप, क्लेफ्ट पैलेट, किडनी और लिंब की एब्नार्मेलिटीज के साथ पैदा होते हैं.
इसके आम कारण की बात करें, तो जेनेटिक डिसऑर्डर होना या मदर में डायबिटीज या थायराइड जैसी अनट्रीटेड मेडिसिन होना. मदर में न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी स्पेशली अगर फोलिक एसिड की डेफिशिएंसी होने के कारण भी इस तरह के मामले देखने को मिलते हैं. इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान रुबेला या टोक्सोप्लाज्मोसिस संक्रमण होने के कारण भी जन्मदोष का खतरा हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान शराब और तम्बाकू का सेवन करने से भी बर्थ डिफेक्ट का खतरा बढ़ता है.
डॉक्टर मीरा पाठक ने बताया कि आज के समय में प्री-कंसप्शनल काउंसल अवेलेबल है. प्रेग्नेंसी से पहले काउंसिल करानी चाहिए. अपने मेडिकल टेस्ट कराएं, जेनेटिक टेस्ट्स कराएं. साथ ही ये सुनिश्चित करें कि अगर कोई मेडिकल डिसऑर्डर हैं, तो वक्त रहते उनका इलाज कराएं. जब ये सभी टेस्ट नॉर्मल रेंज में आ जाएं. प्रेग्नेंसी से 3 महीने पहले फोलिक एसिड की टैबलेट लेने से न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी के चांसेज कम हो सकते हैं. प्रेग्नेंसी में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रेग्नेंसी ठहरने के बाद सही समय पर अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कराया जाता है. अगर चीजें इस तरह से मैनेज की जाएं, तो बर्थ डिफेक्ट को रोका जा सकता है.
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