146 साल बाद सरिता योल्मो (Sarita Yolmo) दार्जिलिंग टॉय ट्रेन (Darjeeling Toy Train) की पहली महिला ड्राइवर (First Women Driver) बनकर पूरे भारत का नाम रोशन किया है.
सरिता योल्मो दार्जिलिंग टॉय ट्रेन की पहली महिला चालक बनीं
Darjeeling’s iconic toy train: दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (DHR) के 146 साल के गौरवशाली इतिहास में एक बेहद ही गर्व का क्षण देखने को मिल रहा है. दरअसल, सरिता योल्मो न सिर्फ एक चालक हैं, बल्कि वे उस कांच की दीवार को तोड़ने का प्रतीक भी हैं जिसे पार करने में एक सदी से सबसे ज्यादा समय लगा था.
साल 1881 में शुरू हुई इस 'यूनेस्को विश्व धरोहर' (UNESCO World Heritage Site) में अब तक सिर्फ पुरुष लोको-पायलट ही अपनी सेवाएं देते हुए लगातार आए थे. तो वहीं, दूसरी तरफ सरिता योल्मो दार्जिलिंग की रहने वाली हैं, जो इस उपलब्धि को स्थानीय समुदाय के लिए पहले से और भी ज्यादा खास बनाता है.
टॉय ट्रेन को घुमावदार रास्तों और कठिन चढ़ाइयों पर चलाना बेहद ही मुश्किल कामों में से एक था. लेकिन, सरिता योल्मो दार्जिलिंग ने यह साबित किया की मेहनत का काम कभी भी मुश्किल नहीं होता है.
उनकी यह सफलता भारतीय रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है, जहां अब वे सबसे चुनौतीपूर्ण और पारंपरिक रूप से पुरुषों के माने जाने वाले क्षेत्रों में भी बढ़-चढ़कर अपना लगातार योगदान दे रही हैं.
यह खबर न सिर्फ पर्यटन के लिए एक नया आकर्षण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की लड़कियों के लिए एक संदेश भी देता है कि कोई भी पटरी इतनी कठिन नहीं जिसे कभी पार नहीं किया जा सकता है.
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