Air India New Ticket Price: वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि के चलते एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मार्गों पर ईंधन अधिभार यानी सरचार्ज बढ़ा दिया है, जिससे एयरलाइंस पर पहले से ही मौजूद लागत का दबाव और बढ़ गया है.
ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच एयर इंडिया ने बढ़ाया सरचार्ज
Air India New Ticket Price: वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि के चलते एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मार्गों पर ईंधन अधिभार यानी सरचार्ज बढ़ा दिया है, जिससे एयरलाइंस पर पहले से ही मौजूद लागत का दबाव और बढ़ गया है.
ईंधन पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क में यह वृद्धि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हुई है, जिसके कारण ऊर्जा संकट पैदा हुआ है और तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. टिकटों के किराए में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) कैंपबेल विल्सन ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
घरेलू उड़ानों के किराये में संरचनात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है. एयर इंडिया ने घरेलू ईंधन अधिभार में संशोधन करते हुए पहले के निश्चित शुल्क के स्थान पर दूरी-आधारित संरचना लागू की है, जिसका सीधा-सा अर्थ ये है कि अब यात्री द्वारा भुगतान की जाने वाली अतिरिक्त राशि उनकी यात्रा की दूरी पर निर्भर करेगी. जैसे:
यह कदम दर्शाता है कि ईंधन की बढ़ती लागत टिकटों की कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर रही है, भले ही एयरलाइन कंपनियां इस वृद्धि के कुछ हिस्से को वहन करने की कोशिश कर रही हों. ये संशोधित शुल्क 8 अप्रैल को भारतीय समयानुसार सुबह 9:01 बजे से प्रभावी होंगे. यह अधिभार “प्रति यात्री, प्रति सेक्टर” के हिसाब से लागू होता है, जो टिकट की अंतिम लागत को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
सेक्टर का आसान भाषा में मतलब ये है कि यात्रा का एक चरण. उदाहरण के लिए, दिल्ली से मुंबई की सीधी उड़ान एक सेक्टर है. वहीं यदि कोई यात्री दिल्ली से मुंबई के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट बुक करता है, जैसेकि दिल्ली से मुंबई होते हुए बेंगलुरु की यात्रा, तो इसे दो सेक्टरों के रूप में गिना जाएगा. इस स्थिति में, यात्रा के प्रत्येक चरण के लिए ईंधन अधिभार अलग-अलग लिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि कनेक्टिंग फ्लाइट के यात्रियों को डायरेक्ट फ्लाइट के यात्रियों की तुलना में कुल मिलाकर अधिक सरचार्ज देना पड़ सकता है, भले ही कुल दूरी समान हो.
एयर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भी ईंधन अधिभार बढ़ा दिया है, जिसका असर लंबी दूरी की उड़ानों पर अधिक पड़ेगा. संशोधित शुल्क क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हैं. बांग्लादेश को छोड़कर सार्क जैसे निकटवर्ती क्षेत्रों के लिए, यात्रियों को अब 24 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना होगा, जो प्रति यात्री प्रति सेक्टर लगभग 2,232 रुपये है. वहीं पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व की उड़ानों पर 50 अमेरिकी डॉलर या लगभग 4,650 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा. इसके अलावा चीन और दक्षिणपूर्व एशिया (सिंगापुर को छोड़कर) के मार्गों पर 100 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगेगा, जो लगभग 9,300 रुपये के बराबर है.
बता दें कि सिंगापुर जाने वाली उड़ानों की कीमत थोड़ी कम है. यह लगभग 60 अमेरिकी डॉलर या लगभग 5,580 रुपये है. अफ्रीका जाने वाले यात्रियों को 130 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना होगा, जो लगभग 12,090 रुपये के बराबर है. यूनाइटेड किंगडम सहित यूरोप के लिए अधिभार 205 अमेरिकी डॉलर निर्धारित किया गया है, जो लगभग 19,065 रुपये के बराबर है.
सबसे अधिक अधिभार उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के मार्गों पर लागू होता है, जहां यात्रियों को प्रति सेक्टर 280 अमेरिकी डॉलर या लगभग 26,040 रुपये का भुगतान करना होगा. अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए ये संशोधित शुल्क अधिकांश मार्गों के लिए 8 अप्रैल से प्रभावी होंगे, जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए ये बदलाव 10 अप्रैल से लागू होंगे. गौरतलब है कि ये सभी सरचार्ज अमेरिकी डॉलर मूल्यों को 7 अप्रैल को दोपहर 1:30 बजे की विनिमय दर 1 अमेरिकी डॉलर = 93 रुपये का उपयोग करके भारतीय रुपये में परिवर्तित किया गया है.
एयर इंडिया की विज्ञप्ति में उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक जेट ईंधन की कीमतें मार्च के अंत तक बढ़कर 195.19 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं, जो फरवरी के अंत में 99.40 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, यानी ईंधन की कीमतों में लगभग 100% की वृद्धि हुई है. साथ ही इसी समय, रिफाइनिंग मार्जिन, जिसे क्रैक स्प्रेड के रूप में जाना जाता है, में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जो कुछ ही हफ्तों में 27.83 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 81.44 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया है. एयर इंडिया ने कहा कि सरचार्ज में बढ़ोतरी के बावजूद संशोधित शुल्क ईंधन की लागत में हुई वृद्धि, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर, को पूरी तरह से कवर नहीं करते हैं. इससे पता चलता है कि एयरलाइंस अभी भी वृद्धि के एक हिस्से को स्वयं वहन कर रही हैं, भले ही वे इसका कुछ हिस्सा यात्रियों पर डाल रही हों.
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