UP Assembly Election 2027 Ayodhya Seat : समाजवादी पार्टी ने इस हाई-प्रोफाइल सीट के लिए सबसे पहले अपने उम्मीदवार की घोषणा करके एक संदेश दिया है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या से पूर्व MLA तेज नारायण पांडे (पवन पांडे) को उम्मीदवार बनाया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सपा इस सीट पर शुरुआती बढ़त हासिल करने का इरादा रखती है.
अयोध्या सीट पर किस पार्टी का रहा दबदबा
UP Ayodhya Assembly Seat History: 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज़ हो गई हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस समेत सभी बड़ी पार्टियां अपनी चुनावी रणनीति बनाने में लगी हुई हैं. राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से अगर कोई एक सीट है जिस पर पूरे देश का ध्यान है, तो वह अयोध्या विधानसभा सीट है.
समाजवादी पार्टी ने इस हाई-प्रोफाइल सीट के लिए सबसे पहले अपने उम्मीदवार की घोषणा करके एक संदेश दिया है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या से पूर्व MLA तेज नारायण पांडे (पवन पांडे) को उम्मीदवार बनाया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सपा इस सीट पर शुरुआती बढ़त हासिल करने का इरादा रखती है.
बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता अभी अयोध्या से विधायक हैं. उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार तेज नारायण पांडे (पवन पांडे) को लगभग 19,990 वोटों से हराया था. अयोध्या विधानसभा सीट 1967 में बनी थी.
अभी की अयोध्या विधानसभा सीट 1967 में बनी थी. इससे पहले, 1952, 1957 और 1962 के विधानसभा चुनाव अभी की अयोध्या सीट के तहत नहीं हुए थे, क्योंकि उस समय विधानसभा सीटों का डिलिमिटेशन अलग था. मौजूद ऑफिशियल चुनाव रिकॉर्ड के मुताबिक, इस सीट पर पहला चुनाव 1967 में हुआ था, जिसमें बी. किशोर भारतीय जनसंघ के टिकट पर पहले MLA चुने गए थे.
| वर्ष | विजेता उम्मीदवार | पार्टी |
|---|---|---|
| 1952 | वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी | — |
| 1957 | वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी | — |
| 1962 | वर्तमान अयोध्या विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी | — |
| 1967 | बी. किशोर | भारतीय जनसंघ |
| 1969 (मध्यावधि) | विश्वनाथ कपूर | कांग्रेस |
| 1974 | बेद प्रकाश अग्रवाल | भारतीय जनसंघ |
| 1977 | जयशंकर पांडे | जनता पार्टी |
| 1980 | निर्मल कुमार | कांग्रेस (आई) |
| 1985 | सुरेंद्र प्रताप सिंह | कांग्रेस |
| 1989 | जयशंकर पांडे | जनता दल |
| 1991 | लल्लू सिंह | भाजपा |
| 1993 | लल्लू सिंह | भाजपा |
| 1996 | लल्लू सिंह | भाजपा |
| 2002 | लल्लू सिंह | भाजपा |
| 2007 | लल्लू सिंह | भाजपा |
| 2012 | तेज नारायण पांडेय ‘पवन पांडेय’ | समाजवादी पार्टी |
| 2017 | वेद प्रकाश गुप्ता | भाजपा |
| 2022 | वेद प्रकाश गुप्ता | भाजपा |
अयोध्या विधानसभा सीट पर बीजेपी के लल्लू सिंह सबसे लंबे समय तक रहे. उन्होंने लगातार पांच चुनाव 1991, 1993, 1996, 2002 और 2007 में जीतकर रिकॉर्ड बनाया.यह सिलसिला 2012 में खत्म हुआ, जब समाजवादी पार्टी के पवन पांडे ने लल्लू सिंह को हराकर एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया. हालांकि, 2017 और 2022 के चुनावों में BJP ने वापसी की और वेद प्रकाश गुप्ता लगातार दो बार MLA चुने गए.
2024 के लोकसभा चुनावों में, फैजाबाद संसदीय क्षेत्र, जिसमें अयोध्या विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है, BJP के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ. राम मंदिर के उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने BJP उम्मीदवार को हरा दिया. इस नतीजे से पता चला कि अयोध्या में धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय समस्याएं, सामाजिक माहौल और उम्मीदवार की स्वीकार्यता भी वोटरों के फैसलों पर असर डालती है.
अयोध्या विधानसभा क्षेत्र न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में सबसे चर्चित विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. राम जन्मभूमि आंदोलन, बाबरी मस्जिद विवाद, राम मंदिर का निर्माण और हिंदुत्व की राजनीति जैसे मुद्दों ने इसे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रखा है. इसीलिए यहां का चुनावी मुकाबला पूरे देश का ध्यान खींचता है.
अयोध्या विधानसभा सीट एक जनरल कैटेगरी की सीट है, मतलब यह किसी भी रिज़र्व कैटेगरी के लिए रिज़र्व नहीं है. इसके बावजूद, इसकी पॉलिटिकल अहमियत बहुत ज़्यादा है. बीजेपी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत सभी बड़ी पार्टियां यहां काफी असर डालती हैं, क्योंकि अयोध्या का चुनावी मैसेज अक्सर न सिर्फ़ उत्तर प्रदेश की पॉलिटिक्स बल्कि नेशनल पॉलिटिकल बहस पर भी असर डालता है.
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