Bird Flu in Bihar: बिहार के दरभंगा और कटिहार से एक दहशत भरी खबर आमने आ रही है. दरभंगा में मृत मिले कौवों में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) की पुष्टि के बाद अब कटिहार जिले से बड़ी संख्या में कौवों की मौत की खबर है. यहां बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) के मामलों को देखते हुए राजधानी पटना में अलर्ट जारी कर दिया गया है. आइए जानते हैं कि आखिर बर्ड फ्लू है क्या? क्या चिकन खाने वालों में फैल सकता बर्ड फ्लू? क्या हैं इसके लक्षण?
बिहार में बर्ड फ्लू की आहट से राजधानी पटना में अलर्ट.
Bird Flu in Bihar: बिहार के दरभंगा और कटिहार से एक दहशत भरी खबर आमने आ रही है. दरभंगा में मृत मिले कौवों में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) की पुष्टि के बाद अब कटिहार जिले से बड़ी संख्या में कौवों की मौत की खबर है. यहां बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) के मामलों को देखते हुए राजधानी पटना में अलर्ट जारी कर दिया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने चिकन की दुकानों और चिकन परोसने वाले भोजनालयों को भी जरूरी आदेश दिए हैं. संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए मृत कौवों को गड्ढों में डालकर दफनाया जा रहा है. अब सवाल है कि आखिर बर्ड फ्लू है क्या? क्या चिकन खाने वालों में फैल सकता बर्ड फ्लू? मनुष्यों में कब पहचाना गया बर्ड फ्लू? क्या हैं इसके लक्षण? आइए जानते हैं इस बारे में-
बिहार के कटिहार में 100 से ज्यादा कौवों की मौत से सनसनी फैल गई. सूचना मिलने पर पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार के नेतृत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया. मृत पक्षियों के सैंपल लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. उनका कहना है कि, फिलहाल कौवों की मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है. पोस्टमॉर्टम और लैब जांच के बाद स्थिति साफ हो पाएगी.
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा एक वायरल संक्रमण है जो आमतौर पर पक्षियों को प्रभावित करता है. मगर साथ ही साथ मनुष्यों को भी अपनी चपेट में ले सकता है. H5N1 स्ट्रेन, इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक उपप्रकार यानि सबटाइप है, जो लोगों में बर्ड फ्लू का सबसे आम रूप है.
बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा खासतौर से पक्षियों को प्रभावित करता है लेकिन अब इंसानों में भी ये रोग पाया जा रहा हैं. इसके चलते हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक मरीज की गंभीर एवियन इन्फ्लूएंजा ए से मृत्यु हो गई थी, जो बर्ड फ्लू से हुई पहली मौत थी. उस व्यक्ति में पाए गए बर्ड फ्लू (bird flu outbreak) के एक स्ट्रेन में नौ म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन की पहचान की गई थी. ये म्यूटेशन वायरस को बीमारी पैदा करने में मदद करते हैं. इसके चलते ये वायरस ब्रेन में रेप्लिकेट करने और बीमारी की गंभीरता को बढ़ाने में सक्षम होता है.
सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार इसे पहली बार 1997 में हांगकांग में पोल्ट्री के बीच प्रकोप के दौरान मनुष्यों में पहचाना गया था. जबकि H5N1 के मानव मामले कम हैं. इस संक्रमण की संभावना उन व्यक्तियों में ज्यादा पाई जाती हैं, जो संक्रमित पक्षियों के संपर्क में रहे हैं. अमेरिका ने 2024 से बर्ड फ्लू के चल रहे मानव मामलों की सूचना दी है.
तेज बुखार का बढ़ना
सिरदर्द की समस्या
खांसी आना
कपकपी महसूस होना
मांसपेशियों में दर्द का सामना करना
सांस की तकलीफ बढ़ जाना
थकान और कमज़ोरी शरीर में महसूस होना
नाक का बहना
गले में खराश भी बढ़ने लगती है
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