<
Categories: देश

Explainer: 2 सीटों वाली पार्टी कैसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी ताकत? जानें बीजेपी के 45 साल के सफर की पूरी कहानी!

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व से शुरू हुआ सफर, लाल कृष्ण आडवाणी के आक्रामक हिंदुत्व और मुरली मनोहर जोशी की राष्ट्रवाद की धार तक. जानिए कैसे इस 'सियासी तिकड़ी' ने शून्य से शिखर तक का रास्ता तय किया और अब नितिन नबीन के रूप में पार्टी को मिला है सबसे युवा अध्यक्ष. यहां पढ़िए बीजेपी की सियासी सफर की पूरी कहानी

नितिन नबीन बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं. जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पिछले साल दिसंबर में पार्टी ने उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था. नितिन नबीन बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और वो पिछले 5 बार से बिहार विधानसभा में विधायक रह चुके हैं. 

बीजेपी की स्थापना के बाद से अब तक 11 राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और नितिन नबीन ने भाजपा में सबसे कम उम्र के और 12 वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर आज दिल्ली में पदभार ग्रहण कर लिया है. हालांकि, अध्यक्ष पद के लिए कभी चुनाव की ज़रूरत नहीं पड़ी अभी तक सभी अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए हैं. मालूम हो कि  भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल, 1980 को हुई थी. इस तरह, बीजेपी ने अपनी स्थापना के बाद से 45 साल पूरे कर लिए हैं. ऐसे में आज के इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे बीजेपी के राजनीतिक इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं ने पार्टी का नेतृत्व किया और किस तरह इस पार्टी ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है.

अटल से शुरू हुआ सफर...

6 अप्रैल, 1980 को जनता पार्टी छोड़ने के बाद, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विजया राजे सिंधिया और सिकंदर बख्त जैसे नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बनाई. उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में काम करने का फैसला किया, जिन्हें बीजेपी का पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. अटल बिहारी वाजपेयी ने 1980 से 1986 तक बीजेपी का नेतृत्व किया.

1984 के लोकसभा चुनावों में, बीजेपी सिर्फ़ दो सीटों पर सिमट गई, जिसके बाद पार्टी की कमान लाल कृष्ण आडवाणी को सौंप दी गई. आडवाणी 1986 में बीजेपी अध्यक्ष चुने गए और 1991 तक पार्टी का नेतृत्व किया. इस दौरान, आडवाणी ने आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति शुरू की, और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर राम मंदिर जैसे मुद्दों को अपने एजेंडे में शामिल किया. 1989 में बीजेपी की सीटों की संख्या 2 से बढ़कर 76 हो गई, और वह किंगमेकर बनकर उभरी। बीजेपी ने 1991 के चुनाव राम मंदिर के मुद्दे पर लड़े और 120 सीटें जीतीं. उस साल, बीजेपी देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई.

अटल-आडवाणी-जोशी की तिकड़ी

अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के बाद, मुरली मनोहर जोशी ने बीजेपी अध्यक्ष का पद संभाला. इन तीनों नेताओं की यह राजनीतिक तिकड़ी बीजेपी के लिए बहुत सफल रही. मुरली मनोहर जोशी 1991 में बीजेपी अध्यक्ष चुने गए, और उसी साल दिसंबर में, उन्होंने तिरंगा यात्रा का नेतृत्व किया। 26 जनवरी, 1992 को, उन्होंने जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराया. इससे राष्ट्रवाद को और बढ़ावा मिला, और उनके अध्यक्ष रहते हुए, 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ.

मुरली मनोहर जोशी ने 1991 से 1993 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. इसके बाद, बीजेपी का नेतृत्व फिर से लाल कृष्ण आडवाणी को सौंप दिया गया. आडवाणी ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ और आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति से बीजेपी को देश की नंबर एक पार्टी बनाने का लक्ष्य रखा. आडवाणी के दूसरे कार्यकाल के दौरान, बीजेपी पहली बार केंद्र में सत्ता में आई. 13 महीने की सरकार बनी. आडवाणी ने 1993 से 1998 तक अध्यक्ष के रूप में काम किया.

कुशाभाऊ और बंगारू

देश में पहली बार बीजेपी के सत्ता में आने के बाद, पार्टी की कमान कुशाभाऊ ठाकरे को सौंपी गई, जिन्हें बीजेपी में पिता तुल्य माना जाता है. कुशाभाऊ के अध्यक्ष बनने के बाद, मध्य प्रदेश में बीजेपी की राजनीतिक जड़ें काफी मजबूत हुईं, यही वजह है कि वह आज भी वहां सत्ता में है. कुशाभाऊ 1998 से 2000 तक बीजेपी अध्यक्ष रहे.

आडवाणी तीसरी बार अध्यक्ष बने

कृष्णमूर्ति के बाद, वेंकैया नायडू बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उन्होंने 2002 से 2004 तक यह पद संभाला. 2004 के लोकसभा चुनाव वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में हुए, लेकिन "इंडिया शाइनिंग" अभियान बुरी तरह फेल होने के बाद, बीजेपी की कमान एक बार फिर लाल कृष्ण आडवाणी को सौंप दी गई. आडवाणी 2004 में तीसरी बार बीजेपी अध्यक्ष चुने गए और 2005 तक पार्टी का नेतृत्व किया. आडवाणी पाकिस्तान यात्रा पर गए और जिन्ना के मकबरे पर उनकी तारीफ की. इस वजह से उन्हें बीजेपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा.

राजनाथ से लेकर गडकरी

आडवाणी के इस्तीफे के बाद, 2005 में बीजेपी की कमान राजनाथ सिंह को सौंपी गई. राजनाथ सिंह 2005 से 2009 तक बीजेपी अध्यक्ष रहे, और उनके कार्यकाल में लोकसभा चुनाव हुए. इन चुनावों में बीजेपी को करारी हार मिली. इसके बाद, राजनाथ सिंह की जगह नितिन गडकरी 2010 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए और तीन साल तक पार्टी संगठन को राजनीतिक दिशा दी, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले, बीजेपी अध्यक्ष बदल दिया गया. गडकरी की जगह एक बार फिर राजनाथ सिंह को संगठन की बागडोर सौंपी गई। राजनाथ सिंह 2013 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर फिर से चुने गए. 2014 के चुनाव उनके नेतृत्व में हुए, लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी का चेहरा नरेंद्र मोदी थे.

नरेंद्र मोदी को नेता बनाकर कैंपेन करने से बीजेपी को फायदा हुआ, और पहली बार पार्टी पूरी बहुमत के साथ सत्ता में आई. यह बीजेपी के सबसे सफल दौर की शुरुआत थी. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और राजनाथ सिंह के उनकी कैबिनेट में गृह मंत्री बनने के बाद, राजनाथ सिंह को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा.

अमित शाह से जेपी नड्डा तक

राजनाथ सिंह के बीजेपी अध्यक्ष पद से हटने के बाद, अमित शाह ने पार्टी की कमान संभाली, और पार्टी ने पूरे देश में अपनी पहुंच बढ़ाई. अमित शाह 2014 से 2017 तक और फिर 2017 से 2020 तक अध्यक्ष रहे. अमित शाह के नेतृत्व में, बीजेपी 2019 में फिर से सत्ता में आई। इसके बाद, अमित शाह मोदी सरकार में गृह मंत्री बने, जिसके बाद उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा.

अमित शाह के इस्तीफे के बाद, जेपी नड्डा को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. जेपी नड्डा पहली बार 2019 में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बने थे और फिर 2020 में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. 2020 से अब तक, जेपी नड्डा बीजेपी का नेतृत्व कर रहे थे, और 2024 के लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व में हुए. बीजेपी ने जीत की हैट्रिक लगाकर इतिहास रच दिया.

बीजेपी को मिला 45 साल का अध्यक्ष

नितिन नवीन को पहले जेपी नड्डा की जगह कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, और अब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा रहा है. नितिन नवीन सिर्फ 45 साल के हैं. उन्हें यह ज़िम्मेदारी देकर पार्टी ने यह दिखाया है कि बीजेपी राजनीति के भविष्य को देखते हुए नई लीडरशिप तैयार कर रही है.

Shivani Singh

नमस्ते, मैं हूँ शिवानी सिंह. पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के सफर में हूं और वर्तमान में 'इंडिया न्यूज़' में सब-एडिटर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रही हूं. मेरा मानना है कि हर खबर के पीछे एक कहानी होती है और उसे सही ढंग से कहना ही एक पत्रकार की असली जीत है. chakdecricket, Bihari News, 'InKhabar' जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सब-एडिटर और एंकर की भूमिका निभाने के बाद, अब मैं अपनी लेखनी के जरिए आप तक पॉलिटिक्स, क्रिकेट और बॉलीवुड की बड़ी खबरों को डिकोड करती हूं. मेरा उद्देश्य जटिल से जटिल मुद्दे को भी सहज और सरल भाषा में आप तक पहुंचाना है.

Recent Posts

गलत ETF चुना तो पछताएंगे! Gold और Silver ETF में निवेश से पहले जान लें ये डिटेल्स

गोल्ड और सिल्वर ETF में इन्वेस्ट करना आसान है लेकिन सही फंड चुनना बहुत जरूरी…

Last Updated: March 3, 2026 08:35:06 IST

Ahaan Panday: सैयारा एक्टर अहान पांडे ने करवाई दर्दनाक सर्जरी, हिल भी नहीं…पढ़ें पूरी स्टोरी!

Ahaan Panday: अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सैयारा' से मशहूर हुए एक्टर अहान पांडे ने बताया है…

Last Updated: March 3, 2026 08:26:57 IST

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, 100 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, जानें ग्रहण टाइम और सूतक काल

Chandra Grahan 2026: आज साल का पहला 'ब्लड मून' वाला चंद्र ग्रहण लग रहा है.…

Last Updated: March 3, 2026 08:18:36 IST

Hina Khan: हिना खान ने पीएम मोदी को लेकर कही ऐसी बात, भड़क गए लोग, फिर पति रॉकी ने…

Hina Khan: हिना खान ने सोशल मीडिया पर भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी को लकर एक…

Last Updated: March 3, 2026 08:16:11 IST