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BRICS Gala Dinner: कहां से आई BRICS की गाला डिनर परंपरा, जानिए कब और कैसे शुरू हुआ ये खास आयोजन?

18th BRICS Summit: भारत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान गाला डिनर आयोजित होगा. जानिए BRICS गाला डिनर क्या है, इसमें कौन शामिल होता है और इसकी परंपरा कैसे शुरू हुई.

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Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-09-11 15:50:18

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BRICS Gala Dinner History: भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगी. पहले दिन का समापन शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री की ओर से आयोजित रात्रिभोज के साथ होगा. ऐसे में सवाल है कि BRICS का गाला डिनर क्या होता है और इसकी परंपरा कैसे शुरू हुई?

क्या है BRICS गाला डिनर?

BRICS गाला डिनर उस देश की ओर से आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह होता है, जो उस साल BRICS की अध्यक्षता करता है. इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होते हैं. यह सिर्फ एक रात्रिभोज नहीं होता. इसके जरिए नेताओं को औपचारिक बैठकों से अलग एक सहज माहौल में बातचीत करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मौका मिलता है.

कैसे शुरू हुई ये परंपरा?

BRICS की औपचारिक शुरुआत 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुए पहले शिखर सम्मेलन से हुई थी. उस समय रूस ने सम्मेलन में शामिल नेताओं के लिए एक औपचारिक राजकीय भोज का आयोजन किया था. इसके बाद BRICS शिखर सम्मेलनों में इस तरह के रात्रिभोज की परंपरा आगे बढ़ी. हर मेजबान देश गाला डिनर के जरिए अपनी संस्कृति, खान-पान और परंपराओं की झलक पेश करता है.

डिनर में क्या होता है?

गाला डिनर के मेन्यू में आमतौर पर मेजबान देश के पारंपरिक और स्थानीय व्यंजन शामिल किए जाते हैं. इसके साथ लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हो सकती हैं. इस तरह यह आयोजन विदेशी मेहमानों को मेजबान देश की संस्कृति से परिचित कराने का माध्यम बनता है.

ये भी पढ़ें: BRICS Summit 2026: PM मोदी का खास डिनर, पुतिन की मौजूदगी और ग्रुप फोटो…11 से 13 सितंबर को भारत मंडपम में क्या-क्या होगा?

कूटनीति में क्यों है खास?

BRICS बैठक में व्यापार, आर्थिक सहयोग, विकास, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा होती है. गाला डिनर नेताओं को इन औपचारिक बैठकों से अलग अनौपचारिक बातचीत का मौका देता है. ऐसी मुलाकातों में नेता एक-दूसरे की बात बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और व्यक्तिगत रिश्ते मजबूत कर सकते हैं. इसे सॉफ्ट पावर का भी एक जरिया माना जाता है. हालांकि, डिनर में सीधे कोई बड़ा समझौता जरूरी नहीं होता, लेकिन यह भविष्य की कूटनीतिक बातचीत के लिए विश्वास और सहमति का माहौल बनाने में मदद करता है.

ये भी पढ़ें: BRICS Summit से पहले रेलवे का बड़ा एक्शन, 26 ट्रेनें कैंसिल, 25 से ज्यादा के बदले रूट; देखें पूरी लिस्ट

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Last Updated: 2026-09-11 15:50:18

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BRICS Gala Dinner History: भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगी. पहले दिन का समापन शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री की ओर से आयोजित रात्रिभोज के साथ होगा. ऐसे में सवाल है कि BRICS का गाला डिनर क्या होता है और इसकी परंपरा कैसे शुरू हुई?

क्या है BRICS गाला डिनर?

BRICS गाला डिनर उस देश की ओर से आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह होता है, जो उस साल BRICS की अध्यक्षता करता है. इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होते हैं. यह सिर्फ एक रात्रिभोज नहीं होता. इसके जरिए नेताओं को औपचारिक बैठकों से अलग एक सहज माहौल में बातचीत करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मौका मिलता है.

कैसे शुरू हुई ये परंपरा?

BRICS की औपचारिक शुरुआत 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुए पहले शिखर सम्मेलन से हुई थी. उस समय रूस ने सम्मेलन में शामिल नेताओं के लिए एक औपचारिक राजकीय भोज का आयोजन किया था. इसके बाद BRICS शिखर सम्मेलनों में इस तरह के रात्रिभोज की परंपरा आगे बढ़ी. हर मेजबान देश गाला डिनर के जरिए अपनी संस्कृति, खान-पान और परंपराओं की झलक पेश करता है.

डिनर में क्या होता है?

गाला डिनर के मेन्यू में आमतौर पर मेजबान देश के पारंपरिक और स्थानीय व्यंजन शामिल किए जाते हैं. इसके साथ लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हो सकती हैं. इस तरह यह आयोजन विदेशी मेहमानों को मेजबान देश की संस्कृति से परिचित कराने का माध्यम बनता है.

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कूटनीति में क्यों है खास?

BRICS बैठक में व्यापार, आर्थिक सहयोग, विकास, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा होती है. गाला डिनर नेताओं को इन औपचारिक बैठकों से अलग अनौपचारिक बातचीत का मौका देता है. ऐसी मुलाकातों में नेता एक-दूसरे की बात बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और व्यक्तिगत रिश्ते मजबूत कर सकते हैं. इसे सॉफ्ट पावर का भी एक जरिया माना जाता है. हालांकि, डिनर में सीधे कोई बड़ा समझौता जरूरी नहीं होता, लेकिन यह भविष्य की कूटनीतिक बातचीत के लिए विश्वास और सहमति का माहौल बनाने में मदद करता है.

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