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बैटरी केज के अंदर: 21 पोल्ट्री इकाइयों की जांच में व्यापक चोटें सामने आईं

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Last Updated: October 1, 2026 20:07:57 IST

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हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु की 21 लेयर–हेन पोल्ट्री इकाइयों की एक जांच में बैटरी–केज सिस्टम में रखी गई मुर्गियों के बीच अत्यधिक भीड़भाड़, चोटों, नियमित रूप से चोंच काटने और तनाव के संकेत सामने आए हैं।

जांच में शामिल इकाइयों की अनुमानित क्षमता करीब 3,000 से लेकर 2 लाख मुर्गियों तक थी और सभी 21 इकाइयों में बैटरी–केज सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांचकर्ताओं ने गर्दन और पंखों में चोट, टूटे पैर, खून निकलना, त्वचा संबंधी समस्याएं और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी दर्ज की। कुछ मुर्गियां कथित तौर पर खड़ी होने में भी सक्षम नहीं थीं।

सेंटिएंट के सीईओ अभिषेक पांडे ने कहा, “21 इकाइयों में हमारे जांचकर्ताओं ने जो समान परिस्थितियां दर्ज की हैं, वे गंभीर चिंता का विषय हैं। अत्यधिक भीड़भाड़, नियमित रूप से चोंच काटना, बिना उपचार के चोटें, खराब कचरा प्रबंधन और कमजोर बायोसिक्योरिटी जैसी प्रथाओं को सामान्य व्यवस्था का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।” संगठन के अनुसार, ये निष्कर्ष पोल्ट्री संचालन में बेहतर निगरानी, प्रवर्तन और पशु कल्याण की देखरेख की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

जांच में यह भी पाया गया कि दौरा की गई इकाइयों में चोंच काटना एक नियमित प्रक्रिया थी और इससे जुड़ी चोटें तथा खून निकलने के मामले दर्ज किए गए। जांचकर्ताओं ने मुर्गियों में लगातार आवाज करने, लोगों के करीब आने पर डर की प्रतिक्रिया और सीमित जगह को लेकर आक्रामक व्यवहार भी देखा।

जांच के प्रमुख निष्कर्ष:

जांच की गई सभी 21 इकाइयों में बैटरी–केज सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था।

अत्यधिक भीड़भाड़ और मुर्गियों के बीच लड़ाई देखी गई।

गर्दन और पंखों में चोट, टूटे पैर, खून निकलना और त्वचा संबंधी समस्याएं दर्ज की गईं।

चोंच काटना नियमित प्रक्रिया के रूप में सामने आया और इससे जुड़ी चोटें तथा खून निकलने के मामले दर्ज किए गए।

जांच का वीडियो: https://www.youtube.com/watch?v=gebNfKhsaC8

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हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु की 21 लेयर–हेन पोल्ट्री इकाइयों की एक जांच में बैटरी–केज सिस्टम में रखी गई मुर्गियों के बीच अत्यधिक भीड़भाड़, चोटों, नियमित रूप से चोंच काटने और तनाव के संकेत सामने आए हैं।

जांच में शामिल इकाइयों की अनुमानित क्षमता करीब 3,000 से लेकर 2 लाख मुर्गियों तक थी और सभी 21 इकाइयों में बैटरी–केज सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांचकर्ताओं ने गर्दन और पंखों में चोट, टूटे पैर, खून निकलना, त्वचा संबंधी समस्याएं और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी दर्ज की। कुछ मुर्गियां कथित तौर पर खड़ी होने में भी सक्षम नहीं थीं।

सेंटिएंट के सीईओ अभिषेक पांडे ने कहा, “21 इकाइयों में हमारे जांचकर्ताओं ने जो समान परिस्थितियां दर्ज की हैं, वे गंभीर चिंता का विषय हैं। अत्यधिक भीड़भाड़, नियमित रूप से चोंच काटना, बिना उपचार के चोटें, खराब कचरा प्रबंधन और कमजोर बायोसिक्योरिटी जैसी प्रथाओं को सामान्य व्यवस्था का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।” संगठन के अनुसार, ये निष्कर्ष पोल्ट्री संचालन में बेहतर निगरानी, प्रवर्तन और पशु कल्याण की देखरेख की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

जांच में यह भी पाया गया कि दौरा की गई इकाइयों में चोंच काटना एक नियमित प्रक्रिया थी और इससे जुड़ी चोटें तथा खून निकलने के मामले दर्ज किए गए। जांचकर्ताओं ने मुर्गियों में लगातार आवाज करने, लोगों के करीब आने पर डर की प्रतिक्रिया और सीमित जगह को लेकर आक्रामक व्यवहार भी देखा।

जांच के प्रमुख निष्कर्ष:

जांच की गई सभी 21 इकाइयों में बैटरी–केज सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था।

अत्यधिक भीड़भाड़ और मुर्गियों के बीच लड़ाई देखी गई।

गर्दन और पंखों में चोट, टूटे पैर, खून निकलना और त्वचा संबंधी समस्याएं दर्ज की गईं।

चोंच काटना नियमित प्रक्रिया के रूप में सामने आया और इससे जुड़ी चोटें तथा खून निकलने के मामले दर्ज किए गए।

जांच का वीडियो: https://www.youtube.com/watch?v=gebNfKhsaC8

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