Cancer Medicine Price: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज कराना पहले से ही मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होता है. ऐसे में दवाओं की ऊंची कीमतें आर्थिक परेशानी को और बढ़ा देती हैं. अब इस समस्या को कम करने के लिए केंद्र सरकार कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर मुनाफे की सीमा तय करने की तैयारी कर रही है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से इस संबंध में जानकारी दी गई है. अदालत ने भी कहा है कि दवाओं की कीमतों को लेकर बनाई जाने वाली व्यवस्था का दायरा सिर्फ कैंसर तक सीमित नहीं होना चाहिए.
कितना मुनाफा ले सकेंगे दुकानदार?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार कैंसर के इलाज में काम आने वाली दवाओं की एक सूची तैयार करेगी. इसमें शामिल दवाओं की बिक्री पर ट्रेड मार्जिन की अधिकतम सीमा निर्धारित की जाएगी. ट्रेड मार्जिन का मतलब उस अंतर से है, जो दवा की खरीद कीमत और बिक्री कीमत के बीच होता है. इस कदम का मकसद दवाओं की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोकना और मरीजों को राहत पहुंचाना है. सरकार की योजना लागू होने के बाद सूची में शामिल दवाओं पर तय सीमा से अधिक मार्जिन नहीं लिया जा सकेगा.
दूसरी दवाओं पर भी जताई चिंता
सरकार का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने कहा कि कीमतों में नियंत्रण की ऐसी व्यवस्था अन्य दवाओं के लिए भी लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए. कोर्ट का मानना है कि दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली रकम के बीच बड़ा अंतर गंभीर चिंता का विषय है. मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होनी है. इससे पहले 29 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमत (PTR) के बीच अंतर पर सवाल उठाए थे. कोर्ट ने सुझाव दिया था कि यह अंतर 16 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए.
27,000 रुपये की MRP!
22 सितंबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने कैंसर की एक दवा का उदाहरण दिया था. कोर्ट के मुताबिक, जिस दवा की रिटेलर के लिए कीमत करीब 2,700 रुपये बताई गई, उसकी अधिकतम खुदरा कीमत 27,000 रुपये रखी गई थी. इस बड़े अंतर पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने इसे मरीजों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार बताया था.
मौजूदा व्यवस्था पर सवाल
याचिकाकर्ताओं किशन चंद जैन और संजय कुलश्रेष्ठ ने ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि निर्धारित सूची में शामिल दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण है लेकिन सूची से बाहर की दवाओं की शुरुआती कीमतों पर प्रभावी निगरानी की कमी है.
ये भी पढ़ें: PM-Kisan 24th Instalment: कब आएगी 24वीं किस्त? इन लाभार्थियों को मिल सकते हैं 4000 रुपये, जानें पूरी जानकारी