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Chamoli Tunnel Landslide: गले तक भरा पानी और गाद; फिर भी चल रहा है डरा देने वाला रेस्क्यू ऑपरेशन; अब तक नौ मजदूरों की मौत; देखें वीडियो

Chamoli Tunnel Landslide: एनडीआरफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक ज़ायरा ने बताया कि ऑपरेशन जारी रहेगा. हालांकि, दलदली हालात और पानी की वजह से ऑपरेशन रात के लिए टाल दिया गया. टनल के अंदर ऑक्सीजन की कमी की वजह से बचाव और राहत का काम रोक दिया गया. ऑपरेशन शुक्रवार सुबह फिर से शुरू होगा.

Chamoli Tunnel Landslide: चमोली ज़िले में अलकनंदा नदी पर बन रहे विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की टनल में भारी लैंडस्लाइड होने से कई मज़दूर फंस गए. इस हादसे में वहां काम कर रहे नौ मज़दूरों की मौत हो गई.छह और मज़दूरों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चल रहा है. दस घायल मज़दूरों का इलाज गोपेश्वर के ज़िला अस्पताल, एक श्रीनगर और एक पीपलकोटी में चल रहा है. एक घायल को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है.

ऑपरेशन जारी

एनडीआरफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक ज़ायरा ने बताया कि ऑपरेशन जारी रहेगा. हालांकि, दलदली हालात और पानी की वजह से ऑपरेशन रात के लिए टाल दिया गया. टनल के अंदर ऑक्सीजन की कमी की वजह से बचाव और राहत का काम रोक दिया गया. ऑपरेशन शुक्रवार सुबह फिर से शुरू होगा.

25 से ज़्यादा मज़दूर कर रहे थे काम

यह घटना गुरुवार, 13 अगस्त को शाम करीब 7:30 बजे हुई. उस समय टनल में 25 से ज़्यादा मज़दूर काम कर रहे थे. ज़्यादातर मज़दूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं.THDC-NTPC के बनाए जा रहे इस 444 MW प्रोजेक्ट का लगभग 70 परसेंट काम पूरा हो चुका है. बताया गया कि यह हादसा प्रोजेक्ट की 3.5 km लंबी टनल में 1.8 km अंदर हुआ, जिस दौरान ग्रेविटी-पैकिंग का काम चल रहा था.

बताया गया कि अंदर एक ज़ोरदार धमाका हुआ, और टनल में भारी मलबा और पानी भरने लगा. इससे वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई, और टनल के अंदर से चीखें गूंजने लगीं.झारखंड की रहने वाली चश्मदीद निस्त्रा भिंगरा ने जिला अस्पताल में इलाज के दौरान बताया कि टनल में 1.8 km अंदर ग्रेविटी पॉइंट पर पैकिंग हो रही थी, जहां सिंटरिंग की गई थी.उन्होंने बताया कि अचानक एक ज़ोरदार धमाका हुआ और उसके बाद टनल के ऊपर से भारी मात्रा में मलबा और पानी बहने लगा. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, सब इधर-उधर हो गए. वह पानी और मलबे में तैरते हुए टनल से बाहर आ रहे थे, लेकिन साथ ही वह मलबे में दब भी रहे थे.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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