Cyclone 2026: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद अब भारत पर एक और बड़े खतरे का साया मंडरा रहा है. ISRO के ताजा अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि आने वाले महीनों में समुद्र से उठने वाली तबाही पिछले 44 सालों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है. जानिए आखिर क्या है इस रिपोर्ट में, कौन-सा महीना देश के लिए सबसे भारी पड़ने वाला है और प्रशासन इसे लेकर कितना अलर्ट है.
ISRO Report: 44 साल बाद आने वाली है नेपाल से भी बड़ी तबाही?
नेपाल में आया वो खौफनाक फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) जिसे देखकर दुनिया भर की रूहें कांप गई, जिसने देखते ही देखते सब कुछ तबाह कर दिया था. कई लोगों की जानें चली गई, कई घर बर्बाद हो गए. अब कुछ ऐसा ही डरावना मंजर भारत के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है.
ISRO के एक ताजा अध्ययन ने वैज्ञानिकों से लेकर प्रशासन तक की नींद उड़ा दी है. मौसम के 40 सालों के आंकड़ों की जांच के बाद एक ऐसी चेतावनी जारी की गई है, जिसे सुनकर लोग परेशान हो सकते हैं हालांकि हमारा उद्देश्य आपको डराने का नहीं बल्कि सचेत करने का है. दावा है कि आने वाले महीनों में 44 साल का सबसे बड़ा खतरा दस्तक देने वाला है. आखिर क्या है इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं…
दरअसल इसरो ने बताया है कि उत्तर भारतीय महासागर में अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच 3 चक्रवाती तूफान आ सकते हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक अध्ययन के अनुसार, इस बार तूफानों की कुल ताकत (पावर डिसिपेशन इंडेक्स या PDI) लगभग 13.06 x 10⁶ नॉट³ रहने का अनुमान है. यह पिछले 44 वर्षों के औसत से लगभग 83% अधिक है, जिसका मतलब है कि इस बार मानसून के बाद चक्रवातों की आशंका ज्यादा हो सकती है.
यह पूर्वानुमान महासागर और वायुमंडल के कई सालों के आंकड़ों का अध्ययन करके तैयार किया गया है. यह जानकारी तटीय क्षेत्रों के निवासियों, सरकार और आपदा राहत टीमों को पहले से सतर्क करने में मदद करेगी. हालांकि, इस अध्ययन में यह नहीं बताया गया है कि कौन-सा तूफान किस तारीख को या किस सटीक जगह पर आएगा.
ISRO का अनुमान है कि उत्तर भारतीय महासागर में 2026 के पोस्ट-मानसून सीजन (अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान 3 चक्रवाती तूफान आ सकते हैं. PDI का इस्तेमाल तूफान की ताकत, हवा की गति और वह कितने समय तक मजबूत रहता है, इन सब चीज़ों को मापने के लिए किया जाता है. आसान शब्दों में कहें तो जितना ज्यादा PDI होगा, तूफान उतना ही खतरनाक होने की आशंका रहती है.
इस अनुमान को तैयार करने के लिए मौसम और समुद्र के लगभग 40 सालों के आंकड़ों की जांच की गई है. शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि तूफान किन परिस्थितियों में बनते हैं और वे कितने ताकतवर हो सकते हैं. अक्टूबर से दिसंबर के मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए जनवरी से अगस्त तक के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है.
ISRO-MOSDAC की 2026 Cyclone Seasonal Prediction PDF
भारत समेत उत्तर भारतीय महासागर से सटे कई देशों के तटीय क्षेत्र अक्सर तूफानों से प्रभावित होते हैं. ऐसे में अगर पहले से यह पता चल जाए कि इस सीजन चक्रवात ज्यादा आ सकते हैं, तो तैयारियां समय पर की जा सकती हैं.
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अध्ययन किसी एक तूफान की सटीक तारीख, रास्ता या टकराने की जगह नहीं बताता. यह सिर्फ पूरे सीजन के दौरान तूफानों की कुल गतिविधि का एक अनुमान है. क्योंकि 2026 के लिए PDI का अनुमान पिछले 44 सालों के औसत से काफी ज्यादा है, इसलिए अक्टूबर से दिसंबर के बीच मौसम पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा.
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