Dawood Ibrahim Property: देश के फरार चल रहे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम की पुश्तैनी जमीनों को आखिरकार खरीदार मिल गया है. 5 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा कराई गई नीलामी में मुंबई के एक बोलीदाता ने सभी 4 चार कृषि भूमि के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई. हालांकि, सुरक्षा कारणों की वजह से बोलीदाता के नाम को उजागर नहीं किया गया है.
दाऊद इब्राहीम की जमीन को आखिरकार नीलामी में खरीदार मिल गई है. मुंबई के एक बोलीदाता ने सबसे ऊंची बोली लगाई है.
Dawood Ibrahim Property Auction: फरार अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़ी रत्नागिरी जिले की पुश्तैनी जमीनों को आखिरकार खरीदार मिल गया है. 5 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा कराई गई नीलामी में मुंबई के एक बोलीदाता ने सभी चार कृषि भूमि पार्सल के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई. यह नीलामी Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act (SAFEMA) के तहत की गई, जो कासकर परिवार से जुड़ी संपत्तियों के निपटान की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
अधिकारियों के मुताबिक, ये चारों जमीनें रत्नागिरी के खेड तालुका स्थित मुम्बके गांव में हैं, जो दाऊद इब्राहिम का पैतृक गांव है. इनमें से कई संपत्तियां उसकी मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं.
मुंबई के इस बोलीदाता की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है. उसे नीलामी की शर्तों के अनुसार अप्रैल 2026 की शुरुआत तक भुगतान करना होगा. अंतिम मंजूरी सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिए जाने के बाद इन संपत्तियों के अधिग्रहण और निपटान की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. इससे पहले नवंबर 2025 में भी नीलामी की कोशिश की गई थी, लेकिन करीब 30% तक रिजर्व प्राइस घटाने के बावजूद कोई खरीदार सामने नहीं आया था. अधिकारियों का कहना है कि दाऊद से जुड़ी संपत्तियों पर ‘कलंक’ (stigma), ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होना, कृषि उपयोग की सीमाएं और कानूनी-सामाजिक संवेदनशीलता जैसे कारणों से खरीदारों की दिलचस्पी कम रही.
नीलामी में सर्वे नंबर 442 (हिस्सा नंबर 13-B) की जमीन, जिसकी रिजर्व कीमत 9.41 लाख रुपये थी, 10 लाख रुपये से अधिक में बिकी. इस पर दो बोलीदाता शामिल हुए थे. वहीं, अन्य तीन जमीनों सर्वे नंबर 533, 453 और 617 पर केवल एक ही बोलीदाता ने हिस्सा लिया और सभी संपत्तियां उसी ने खरीद लीं. अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक दशक में इन संपत्तियों की कई बार नीलामी की गई, जिसमें 2017, 2020, 2024 और 2025 शामिल हैं, लेकिन ज्यादातर बार या तो कम भागीदारी रही या नीलामी विफल रही.
ये संपत्तियां 1990 के दशक में कासकर परिवार से जब्त की गई थीं और बाद में 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़े संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई के तहत केंद्र सरकार के अधीन कर दी गई थीं. इससे पहले दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव भी दाऊद से जुड़ी संपत्तियों की नीलामी में कई बार हिस्सा ले चुके हैं. उन्होंने 2020 में मुंबई के गांव में दाऊद का पुश्तैनी बंगला खरीदा था, लेकिन कुछ मामलों में भुगतान और कानूनी विवादों के चलते प्रक्रिया अटक गई थी.
अधिकारियों का कहना है कि दाऊद से जुड़ी संपत्तियों की बिक्री में भुगतान में देरी, कानूनी अड़चनें और कब्जा हासिल करने में कठिनाई जैसी चुनौतियां लगातार सामने आती रही हैं.
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